जीका वायरस क्या है?, जानें लक्षण | Zika Virus

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जीका वायरस (Zika Virus) मच्छरों के काटने से फैलता है. यह बीमारी एडीज मच्छर के काटने से होता है. जो दिन में सक्रिय रहते हैं. एडीज मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है, जिसके खून में जीका का वायरस मौजूद है, तो यह किसी दूसरे व्यक्ति को भी काटकर संक्रमण को फैला सकता है. मच्छरों के अलावा असुरक्षित शरीरिक संबंध से भी जीका का वायरस फैलता है .

जीका वायरस का इतिहास

1947 में पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम यूगांडा के जीका जंगल में पीले बुखार पर शोध व् रिसर्च कर रही थी. वैज्ञानिकों की टीम ने एक रीसस मकाक यानी एक प्रकार के लंगूर को पिंजरे में रख कर शोध कर रही थी. उस लंगूर को बुखार था और उसी से ही यह वायरस मिला था. तभी से ही इस वायरस को जीका वायरस के नाम से जाना जाता है. जब 1948 में फिर से वैज्ञानिकों की टीम ने जीका जंगल में रिसर्च की, तब उन्हें जीका जंगल के मच्छरों में भी वही वायरस मिला. सन 1954 में भी नाइजीरिया में एक व्यक्ति में इसके लक्षण पाए गये थे. इसके बाद 2007 में इसकी खोज होने से पहले इसके संक्रमण के मामले अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए गये थे.

जीका वायरस के लक्षण

इस वायरस से संक्रमित हर पांच में से एक व्यक्ति में ही इसके लक्षण दिखते हैं.

  • व्यक्ति को बुखार होता है.
  • शरीर की त्वचा पर लाल दाग हो जाते हैं.
  • आंखों में संक्रमण हो जाता है और आंखे लाल हो जाती हैं.
  • मांसपेशियों और जोडों में दर्द की शिकायत होती है.
  • सिरदर्द की भी समस्या देखी जाती है.

काफी खतरनाक है जीका वायरस

यह वायरस इतना खतरनाक है कि अगर किसी गर्भवती महिला को हो जाए तो गर्भ में पल रहे बच्चे को भी यह बुखार हो सकता है. जिस वजह से बच्चे के सिर का विकास रूक सकता है और वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन भी फैल सकता है. वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन में स्किन रैशेज़ या दाग, पीलिया, लिवर से जुड़ी बीमारियां, अंधापन, दिमागी बीमारी, ऑटिज़्म, सुनने में दिक्कत और कई बार बच्चे की मौत भी हो सकती है. वहीं, वयस्कों में जीका वायरस गुलैन-बैरे सिंड्रोम का कारण बन सकता है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती हैं, इस वजह से शरीर में कई दिक्कतों की शुरुआत होती है.

वयस्कों में यह वायरस गुलैन-बैरे सिंड्रोम का कारण बन सकता है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती हैं. इस वजह से शरीर में कई दिक्कतों की शुरुआत होती है.कभी-कभी इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति पैरालिसिस का शिकार भी हो सकता है.

कैसे करें बचाव

  • यह वायरस मच्छरों के कारण फैलता है. ऐसे में मच्छरों की रोकथाम जरूरी है.
  • मच्छरों की रोकथाम के लिए घरों के आस-पास और घर में किसी जगह पानी को इकट्ठा न होने दें.
  • गमले, कूलर जैसी जगह जहां पानी इकट्ठा रहता है उसे खाली कर दें.
  • मच्छरों से बचाव के लिए खुद को ढक कर रखें.
  • शरीर को कपड़ों से सुरक्षा करें और हल्के रंग के कपड़े पहनें.
  • मच्छरदानी का प्रयोग करें.

जांच और इलाज

WHO के अनुसार लक्षण दिखने पर ब्लड, यूरिन या सीमेन टैस्ट से पुष्टि की जाती है. जीका वायरस के संक्रमण का फिलहाल कोई इलाज नहीं है. इलाज के तौर पर बुखार और दर्द को कम करने वाली दवाएं देने के साथ मरीज में लगातार पानी की पूर्ति की जाती है. गर्भवती महिलाओं को खास देखभाल की जरूरत होती है. क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चा आसानी से संक्रमित हो जाता है.

सेहत का असली साथी मेडकॉर्ड्स

यदि आपके परिवार का कोई सदस्य जीका वायरस की वजह से परेशान हैं तो आज ही हमारे टोल फ्री नंबर +91-781-681-1111 पर कॉल करें और नज़दीकी सेहत साथी के पास जा कर एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लें. याद रहे की लक्षण गंभीर होने पर घरेलु इलाजों पर निर्भर न रहें और जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें.

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