YOGA CURES FLU | फ्लू से छुटकारा पाने के लिए जानें 5 योगासन

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फ्लू (Flu) यानी बुखार कई बाहरी कारणों से हर किसी को कभी ना कभी परेशान करता है। फिर चाहे मौसम में बदलाव हो या कोई इन्फेक्शन, फ्लू (Flu) बहुत जल्दी हमारे शरीर को कमज़ोर कर देता है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता ये निर्धारित करती है कि हम पर बीमारियों का असर कितनी जल्दी या देर से होता है।

फ्लू (Flu) या बुखार से बचने के लिए हमारा शरीर मज़बूत होना चाहिए और योग व सही दिनचर्या को शामिल कर के हम एक स्वस्थ शरीर व जीवन पा सकते हैं। फिर भी यदि हम फ्लू (Flu) या बुखार से ग्रस्त हो जाएँ तो कैसे उससे बचा जा सकता है? दवाइयों के अलावा हम कुछ योगासनों द्वारा भी अपने शरीर का तापमान नियंत्रित कर सकते हैं। आइये जानें मेडकॉर्ड्स (MedCords) विशेषज्ञ डॉक्टर्स द्वारा बताये गए वो कौन-कौन से योगासन हैं जो हमें फ्लू (Flu) में फायदा पहुंचा सकते हैं।

1. कपालभाति प्राणायाम:

कपालभाति प्राणायाम आपके शरीर को साफ़ करते हुए विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने का कार्य करता है। प्रतिदिन 3-5 मिनट इस आसन को करने से अच्छी नींद आने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली भी मज़बूत हो जाती है।

kapaal bhaati

इसे करने के लिए सुखासन या पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं व तेज़ गति से श्वास बाहर छोडें। यह प्रक्रिया कुछ मिनट तक करें।

2. विपरित करणी आसन:

viprit karni aasan

पीठ के बल लेट जाएं व अपने दोनों हाथ अपने शरीर के बगल ज़मीन से सटा कर रखें। अब एक साधारण सांस लें व छोडें, उसके बाद अपने दोनों पैरों को उठाते हुए साथ में नितम्ब को उठाएं व अपने हाथों से कमर को सहारा दें। कुछ देर इसी अवस्था में रहें। इस समय आपका भार आपके गर्दन व हाथों पर होना चाहिए। कुछ समय रुककर पूर्व स्थिति में आयें।

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3. सेतु बंध सर्वांगासन:

setu bandh sarvangaasan

सबसे पहले अपने पीठ के बल लेट जाएँ व घुटनों को मोड़ लें। अपनी हथेलियाँ ज़मीन से सटा कर रखें। सांस भरते हुए पीठ के नीचले, मध्य व उपरी हिस्से को ज़मीन से ऊपर उठाएं। इस स्थिति में अपने शरीर का भार आप कन्धों, हाथों व पैरों पर रखें। शरीर के नीचे के हिस्से को स्थिर रखें। आप चाहें तो हाथों से अपनी कमर को सहारा भी दे सकते हैं। 1-2 मिनट इस स्थिति में रहें और फिर आसन से बाहर आ जाएं।  

4. शीतली प्राणायाम:

जैसा की नाम से प्रतीत होता है, शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडा रखने का काम करता है। इस प्राणायाम द्वारा शारीरिक शीतलता व चित्त शांत होता है।

sheetli pranaayam

इसे करने के लिए सबसे पहले आप सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं व जीभ को बाहर निकाल कर नली के अकार में उसे मोड़ लें। अब इस अवस्था में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लें। इस प्रकार नली व ट्यूब से होते हुए हवा मुंह, तालु और कंठ को ठंडक प्रदान करेगी।  

5. अनुलोम-विलोम:

कपालभाति के तरह ही अनुलोम-विलोम भी शरीर की सफाई करता है। सभी श्वास-संबंधी प्राणायाम आसन अधिकतर शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यह फ्लू होने पर शरीर को कमज़ोरी से बचाता है।

anulom vilom

सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। दाएं हाथ के अंगूठे से दांया नासाछिद्र बंद करें और गहरी सांस लें। अब उसी हाथ की दो उँगलियों से बांया नासाछिद्र बंद करें व दांयें अंगूठे को उठा लें। अब दांयें नासाछिद्र से सांस छोडें। इस प्रक्रिया को दुबारा बांयें तरफ से दोहरायें। 10-15 मिनट तक ये आसन करें।

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योग का हमारे जीवन व स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता है। फ्लू (Flu) या बुखार जैसी स्थिति में योग बहुत असरदार होता हैं। शरीर के तापमान को सही बनाये रखने के लिए भी योग बहुत असरकारक है। अतः इसे अपनी दिनचर्या में ज़रूर शामिल करें। आपके सर्वांगीण विकास के लिए यह एक ओषधी का काम करता है।

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