मच्छर के काटने से होने वाली 5 बीमारियां | Mosquito bite

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विश्व मच्छर दिवस (world mosquito day) 20 अगस्त को प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जो 1897 में सर रोनाल्ड रॉस द्वारा एक ब्रिटिश चिकित्सक की ऐतिहासिक खोज का प्रतीक है. उन्होंने पाया कि मादा मच्छर मनुष्यों में मलेरिया पहुंचाती हैं यानी मादा एनोफिलीज मच्छर मलेरिया परजीवी को संक्रमित करने के लिए जिम्मेदार थीं. मलेरिया के कारणों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए भी विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है. आइए आज मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के बारे में जानते हैं.

मच्छर का नाम स्पेनिश शब्द से आया है जिसका अर्थ है छोटी मक्खी. मूल रूप से मच्छर मक्खियों की तरह पौधे और गंदगी में पनपते है. आमतौर पर हम जानते है कि मच्छर इंसानों का खून पीने के लिए काटते है. लेकिन यह सच नहीं है. दरअसल, मादा मच्छर अपने अंडे देने से पहले उनके विकास के लिए खून चूसती है.

मच्छर जनित विभिन्न बीमारियां

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मलेरिया

मलेरिया मादा मच्छर एनाफिलीज के काटने से फैलता है. इस मच्छर में प्लास्मोडियम नाम का परजीवी (प्रोटोजोआ) पाया जाता है जिसके कारण मच्छर के काटने से ये रक्त में कई गुणा बढ़ता है और फिर इंसान के शरीर को बीमार कर देता है. इस रोग से ग्रसित व्यक्ति को बुखार, कंपकंपी लगना, पसीना आना, तेज सिरदर्द, शरीर में टूटन के साथ जी मिचलाने और उल्टी होने तक के लक्षण आते हैं. इसमें रोगी को बार-बार बुखार आता है. लेकिन ये लक्षण आने के बावजूद इसमें मरीज को प्रोटोजोआ का पता लगाना बहुत जरूरी करता है. मादा एनाफिलीज में सिर्फ एक नहीं बल्कि करीब आठ तरह के प्रोटोजोआ होते हैं.

मच्छर होता है शाकाहारी!

आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका खून चूसने वाला मच्छर नर नहीं बल्कि मादा होती है. नर मच्छर तो शाकाहारी होता है. मादा मच्छर एक साथ 300 अंडे तक दे सकती है. लेकिन अपने पूरे जीवन काल में ये करीब 500 अंडे देती है.

डेंगू

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं. ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह में काटते हैं. डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता.

लाइट के उजाले में भी काट सकते है डेंगू के मच्छर

आमतौर पर डेंगू का मच्छर सिर्फ दिन के उजाले में ही काटता है, लेकिन सच यह है कि वह रात में लाइट के उजाले में भी काट सकता है. डेंगू के मच्छर सुबह और शाम को सूर्यास्त के समय ज़्यादा काटते हैं. ये मच्छर 15-16 डिग्री से कम तापमान में पैदा नहीं हो पाते हैं. डेंगू के सबसे ज़्यादा मामले जुलाई से अक्टूबर के बीच दर्ज किए जाते हैं.

पीत-ज्वर

पीला बुखार (पीत-ज्वर) तेज गति के साथ फेलने वाला एक संक्रामक रोग है. पीला बुखार सूक्ष्म रोग विषाणु स्टैगोमिया मच्छर के काटने या संक्रमण से मनुष्य के शरीर में फैलता है. यह मच्छर दिन के समय ही काटता है. इसमें पीलिया के लक्षण भी पाएं जाते है. इसे त्वचा और आखों में पीलापन दिखाईं पड़ने लगता है. ये मच्छर बंदरगाहों में ज्यादा पाया जाता है. पीला बुखार आरएनए वायरस से फैलता है यह संक्रमित और भयानक रोग है. यह पुरे शरीर को प्रभावित करता है.

75 फीट की दूरी से सूंघ लेते है मच्छर

मच्छर इंसान की सांस तक सूंघ सकते हैं. बता दें, ये 75 फीट की दूरी से कार्बन डाइऑक्साइड सूंघ सकते हैं.

जीका

यह एडीज इजप्टी मच्छर से फैलता है. यह ज्यादातर दिन के समय (अलसुबह और दोपहर) काटता है. यह मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और यलो फीवर का कारण भी बनता है. वायरस प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती से उसके बच्चे में भी फैलता है या शारीरिक सम्बंध बनाने के दौरान एक से दूसरे इंसान में ट्रांसमिट होता है. संक्रमित इंसान का ब्लड ट्रांसफ्यूजन या ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन होने पर भी इंफेक्शन फैल सकता है. जीका वायरस से संक्रमण के बाद लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं. 3-14 दिन का समय लगता है. लक्षण बेहद माइल्ड दिखाई देते हैं. इसमें हल्का बुखार, स्किन पर चकत्ते, कंजक्टिवाइटिस, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द ऐसा करीब 2-7 दिन तक हो सकता है.

काफी खतरनाक है जीका

जीका का वायरस इतना खतरनाक है कि अगर किसी गर्भवती महिला को हो जाए तो गर्भ में पल रहे बच्चे को भी यह बुखार हो सकता है. जिस वजह से बच्चे के सिर का विकास रूक सकता है और वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन भी फैल सकता है.

चिकनगुनिया

चिकनगुनिया वायरस मच्छरों के कारण फैलता है. एक बार इसकी चपेट में आने पर व्यक्ति की हालत खराब हो जाती है. यह वायरस सबसे ज्यादा असर हड्डियों पर डालता है, जिसके कारण व्यक्ति चलने-फिरने या हाथों से किए जाने वाले साधारण काम को करने में काफी परेशानी होती है. ठीक हो जाने के बाद भी मरीज हड्डियों के दर्द से परेशान रहता है और दर्द जाने में महीनों का वक्त लग जाता है.

एडिस एजिप्टी (Aedesaegypti) के काटने से डेंगू भी होता है

चिकनगुनिया बीमारी का पता पहली बार 1952 में अफ्रीका में चला था. मोज़ाम्बिक और तंजानिया के सीमावर्ती मकोंडे इलाक़े में इस बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया था. मकोंडे इलाक़े में स्वाहिली भाषा बोली जाती है जिसमें चिकनगुनिया का मतलब होता है-“अकड़े हुए आदमी की बीमारी.” जिस व्यक्ति के ख़ून के नमूने से चिकनगुनिया वायरस की पहचान हुई थी, वह हड्डी के दर्द से बुरी तरह अकड़ गया था.

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