World Antibiotic Awareness Week: एंटीबायोटिक के ज्यादा सेवन से होने वाले नुकसान

world antibiotic awareness week

World Antibiotic Awareness Week: विश्व एंटीबायोटिक जागरूकता सप्ताह का मकसद जनता के साथ-साथ चिकित्सकों एवं दवा विक्रेताओं को एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव से सचेत करना है। इस बार की थीम “Antimicrobials: handle with care” है।

1. एंटीबायोटिक दवा की पहचान कैसे करें: How to find Antibiotic medicine’s

सर्दी-खांसी, फ्लू और सिर व बदन दर्द के लिए कई बार लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवाईयाँ खा लेते है। एंटीबायोटिक दवाओं की पहचान व्यक्ति खुद ही कर सकता है। अगर दवा के पत्ते के पीछे लाल लाइन है, तो यह खतरे की चेतावनी है यानि यह दवा एंटीबायोटिक है और बिना चिकित्सकीय परामर्श इसका सेवन घातक हो सकता है।

2. क्यों खतरनाक होती है एंटीबायोटिक?

एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग से इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। साधारण बैक्टीरियल इंफेक्शन भी अब सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो पाता। एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस और एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस धीरे-धीरे इंसान को सूक्ष्मजीवियों के आगे लाचार बना देता है।

3. एंटीबायोटिक दवाओं का क्या काम है?

  • एंटीबायोटिक दवाओं का काम शरीर में होने वाले इंफेक्शन को खत्म करना होता है। ज्यादातर बीमारियों में माना जाता है कि व्यक्ति जब बिना डॉक्टर के परामर्श के कोई भी दवा ले लेता है तो यह आदत एक समय बाद व्यक्ति को बीमार बना देती है।
  • लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल से शरीर में इनका असर प्रभावित जगह पर धीरे-धीरे कम होने लगता है और ये दूसरे अंगों को नुकसान पहुँचाने लगती है।

4. एंटीबायोटिक के सेवन पर पाँच R पर करें फोकस

डब्ल्यूएचओ की थीम के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सक की परामर्श के नहीं करना चाहिए। हर बीमारी के अनुसार दवा भी अलग-दी जाती है। दवा देते समय ज्यादातर विशेषज्ञ पाँच आर ध्यान में रखते हैं।

इसका अर्थ है: राइट पेशेंट, राइट ड्रग, राइट डोज, राइट ड्यूरेशन और राइट टाइम। इनके आधार पर यदि दवा तय की जाती है तो रोग के लक्षणों में कमी आती है लेकिन इन बातों को ध्यान में रखते हुए भी एंटीबायोटिक न दी जाए तो जिस रोग के बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए दवा देते है वह एक समय बाद दोबारा विकसित होने लगती है। यह एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस की स्थिति कहलाती है।

5. एंटीबायोटिक के ज्यादा सेवन से होने वाले नुकसान:

एंटीबायोटिक दवाओं का नियमित या अधिक मात्रा में सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बिना डॉक्‍टर की सलाह लिए अपनी मर्जी से इस दवा को खाने वाले लोगों की जान खतरे में रहती है। हर बीमारी में और लगातार सेवन से इसका असर भी कम होता जाता है।

बैक्‍टीरियल इंफेक्शन यानि संक्रमण से होने वाली बीमारियों की रोकथाम और उन्‍हें जड़ से खत्‍म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्‍तेमाल किया जाता है।

इनके रिजल्‍ट बेहतर आते है जिसके चलते लोग बिना डॉक्टर के परामर्श के ही इन दवाओं का किसी भी बीमारी में सेवन करते है, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक होता है। जो लोग इन दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल करते है उन्हें जान का खतरा ज्यादा रहता है।

डब्‍ल्‍यूएचओ की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इस दवा के लगातार सेवन से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। हर बीमारी में एंटीबायोटिक के इस्‍तेमाल से इसका असर भी लगातार कम होता जा रहा है।

इस दवा से मरने वाले जीवाणुओं में इससे लड़ने की ताकत विकसित होती जा रही है। मतलब जो जीवाणु इस दवा के खाने से मर जाते थे और बीमारी ठीक होती जाती थी अब ऐसा नहीं हो पा रहा है।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐपडाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है। 

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