बेल एक वरदान है, इसके फायदे अनेक

बेल का प्रयोग कई तरह से किया जाता है। कई लोग इसका शर्बत पीना भी पसंद करते है। श्रीफल एक वरदान की तरह है इसके अनगिनत फायदे है। आइये जानते है इसके फायदे के बारे में। बेल से जहाँ कई रोगों की रोकथाम होती है तो कई रोग इससे ठीक भी होते है। कफ, बदहजमी, दस्त, डायबिटीज, ल्यूकोरिया में बेल के बहुत फायदे है।

बेल क्या है?

बेल एक वृक्ष है जिसकी खासियत है कि इसके पीले पड़े हुए फल, एक साल के बाद हरे हो जाते है। इसके पत्ते 6 महीने तक ऐसे ही रहते है। इसकी छाया ठंडक पहुँचाती है और स्वस्थ बनाती है। इस बेल का पेड़ मध्यमाकार और कांटों से युक्त होता है। इसके तने की छाल मुलायम, हल्के भूरे रंग से पीले रंग की होती है। नई शाखाएं हरे रंग की, और टेढ़ी-मेढ़ी होती है। इसका पत्ता हरे रंग का होता है, और पत्तों के आगे का भाग नुकीला और सुगन्धित होता है।

इसके फूल हरे और सफेद रंग के होते है। इसके फल गोलाकार, अण्डाकार, भूरे या पीले रंग के होते है। फल के छिलके कठोर और चिकने होते है। इसके बीज 10-15 के समूह में छोटे, सफेद एवं चिकने होते है।

बेल के फायदे:

सिरदर्द में फायदेमंद:

  • बेल की सुखी हुई जड़ को थोड़े जल के साथ गाढ़ा पीसें। इसके बाद बेल के पत्तों का पेस्ट बनाएं फिर इससे अपने मस्तक पर लेप करें।
  • एक कपडे को बिल्व के पत्ते के रस में डूबोएं। इस पट्टी को सिर पर रखने से सिरदर्द में छुटकारा मिलेगा।

जूं की समस्या में बेल का उपयोग:

  • बेल के पके फल को दो भागों में तोड़ें। इसके अंदर का पल्प निकालें। इसके एक भाग में तिल का तेल तथा कपूर डालें और दूसरे वाले से पहले वाले को ढकें। इस तेल को बालों में लगाएं।

आँखों के रोग में बेल का उपयोग:

  • बेल के पत्तो पर घी लगाकर आँखों को सेकें और आँखों पर पट्टी बांधें। पत्तों के रस को आँखों में डालने से, या इसका लेप लगाने से आँखों के रोग दूर हो सकते है।

बहरापन दूर करने के लिए बेल का उपयोग:

  • बेल के पत्तों को गाय के मूत्र में पीसे। इसमें चार गुना तिल का तेल, तथा 16 गुना बकरी का दूध मिलाकर धीमी आग में पकाएं।  इसे रोज कानों में डालने से बहरापन, सनसनाहट (कानों में आवाज आना), कानों की खुश्की, और खुजली आदि समस्याएं दूर होती है।

टीबी की बीमारी में बेल का उपयोग:

  • बेल की जड़, अड़ूसा के पत्ते तथा नागफनी और थूहर के पके सूखे हुए फल के 4-4 भाग लें। इसके साथ ही सोंठ, काली मिर्च व पिप्पली का 1-1 भाग लें। इन्हें कूट लें। इसके 20 ग्राम मिश्रण को लेकर आधा लीटर जल में पकाए। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो सुबह और शाम इसका शहद के साथ सेवन करें।

पेट दर्द में बेल का प्रयोग:

  • 10 ग्राम बेल के पत्ते, तथा 7 नग काली मिर्च पीसकर, उसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर शर्बत बनाएं। इसे दिन में 3 बार पिएँ।
  • बेल, एरंड, चित्रक की जड़, और सोंठ को एक साथ कूट लें। इसका काढ़ा बना लें। इसमें थोड़ी सी भुनी हुई हींग, तथा सेंधा नमक 1 ग्राम बुरक लें। 20-25 मिली की मात्रा में पिलाने से पेट दर्द ठीक होता है। इन द्रव्यों का पेस्ट बनाकर गर्म करके पेट पर लगाने से लाभ होता है।

दस्त रोकने के लिए बेल का सेवन:

  • बेल (bel tree) के कच्चे फल को आग में सेंक लें। 10 से 20 ग्राम गूदे को मिश्री के साथ दिन में 3-4 बार खिलाने से दस्त में लाभ होता है।
  • 50 ग्राम बेल की सूखी गिरी, तथा 20 ग्राम सफेद कत्थे के चूर्ण में 100 ग्राम मिश्री मिला लें। इसकी 1.5 ग्राम की मात्रा का दिन में 3-4 बार सेवन करें। इससे दस्त पर रोक लगती है।
  • 200 ग्राम बेलगिरी को 4 लीटर जल में पकाएं। जब जल 1 लीटर रह जाये तो छान लें। इसमें 100 ग्राम मिश्री मिलाकर बोतल में भरकर रख लें। इसमें 10 या 20 मिलीग्राम की मात्रा में, 500 मिलीग्राम भुनी हुई सोंठ मिला लें। और इसका 2 से 3 बार सेवन करें।
  • गर्भवती स्री दस्त होने पर 10 ग्राम बेलगिरी के पाउडर को चावल के धोवन के साथ पीस लें। इसमें थोड़ी मिश्री मिला लें। इसे दिन में 2-3 बार देने से लाभ होता है। 
  • चावल के 20 ग्राम धोवन में बेलगिरी चूर्ण 2 ग्राम, और मुलेठी चूर्ण 1 ग्राम को पीस लें। इसे 3-3 ग्राम शक्कर, और शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करें।
  • कच्चे बेल (bael tree) को कंडे की आग में भूनें। जब छिलका बिल्कुल काला हो जाएं, तब भीतर का गूदा निकालकर 10 से 20 ग्राम तक दिन में तीन बार मिश्री मिला सेवन करें।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें

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