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क्या होता है यूटीआई , यूटीआई में संक्रमण होने का कारण और इससे बचने के लिए डाइट

क्या होता है यूटीआई , यूटीआई में संक्रमण होने का कारण और इससे बचने के लिए डाइट

महिलाओं में पेशाब रुक-रुक के आने की समस्या बहुत आम है। ऐसा देखा गया है कि पुरुषों में 45 की उम्र के बाद पेशाब संबंधी परेशानी बढ़ने की आशंका अधिक रहती है, जबकि महिलाओं में यूटीआई की समस्या 15 से 40 की उम्र तक अधिक देखी जाती है। मेनोपॉज के बाद भी महिलाओं में पेशाब संबंधी समस्याएं और बढ़ जाती है।

यूटीआई में संक्रमण होने का कारण:

इस संक्रमण की प्रमुख वजह एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर का कम होना होता है। यूटीआई, ब्लेडर संक्रमण, गर्भावस्था, उम्र, प्रोस्टेट ग्रंथि में बदलाव या पेशाब संबंधी अन्य कई संक्रमण कई वजह से होते हैं। गांव में मासिक धर्म के बाद स्वच्छता ना रखने के कारण लड़कियों में पेशाब संबंधी संक्रमण होते हैं, जो बाद में यूटीआई में बदल जाते हैं।

महिलाओ में प्रसव के बाद 79 फीसदी मामलों में पेशाब पर नियंत्रण खत्म हो जाता है। जिसकी वजह पेलविक (बच्चेदानी के नीचे का हिस्सा) की मांसपेशियों का ढीला होना होता है, ऐसे अधिकांश मामलों में महिलाओं को छींक के साथ पेशाब रिसने की समस्या होती है। महिलाओं में यूरेथ्रा(मूत्रनली) की लंबाई पुरुषों के मुकाबले कम होती है, इससे बैक्टीरिया के लिए वहाँ पहुँचना आसान होता है। महिलाओं में यूरेथ्रा गूदा मार्ग के ज्यादा करीब स्थित होता है। पुरुषों में यूटीआई का खतरा कम होता है क्योंकि उनका यूरेथ्रा लंबा होता है और प्रोस्टेट में बनने वाला द्रव्य बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होता है।

क्या होता है यूटीआई:

ई-कोलाई नामक बैक्टीरिया को यूटीआई का कारण माना जाता है जो पेशाब के रास्ते से यूरीनर ब्लेडर तक पहुँचता है। पेशाब की थैली तक संक्रमण पहुँचने की स्थिति को सिस्टिस कहते हैं जबकि किडनी तक संक्रमण पहुँचने को फिलोनेफिराइटिस कहा जाता है, किडनी तक संक्रमण पहुँचने का मतलब है कि बैक्टीरिया का संक्रमण अपर यूरिनरी ट्रैक्ट तक पहुँच चुका है।

यूटीआई के लक्षण पेशाब करते हुए जलन का अनुभव होना, कम पेशाब होना, पेल्विक क्षेत्र में दर्द या चुभन, कभी कभी पेशाब में हल्का खून आना आदि है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए शुरूआत की स्थिति में यूटीआई का यूरीन की कल्चर और रूटीन जांच से पता चल जाता है, बावजूद इसके नीचले हिस्से से सफेद पानी आदि की समस्या भी देखी जाती है तो पेप्स स्मीयर नामक जांच करवाएं ।

जांच के बाद सात दिन तक एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए संक्रमण दूर करने की कोशिश की जाती है, सात दिन के बाद यूरीन का दोबारा कल्चर टेस्ट किया जाता है, यदि रिपोर्ट नेगेटिव हो तो दवाएं बंद कर दी जाती हैं। बावजूद  इसके यदि कल्चर रिपोर्ट पॉजिटिव हो तो थेरेपी की जाती हैं। 

यूटीआई के संक्रमण से बचने के लिए साफ़-सफाई का ध्यान रखें:

ऐसा देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की 79 प्रतिशत बीमारियाँ मासिक धर्म (पीरियड्स) में स्वच्छता ना अपनाएं जाने की वजह से होती हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां जानने के बाद भी महिलाएं जांच नहीं करवाती। अगर हम बड़ी-बड़ी बिमारियों को छोड़ दें तो ज्यादातर महिलाऐं पेशाब संबंधी बिमारियों से ग्रसित है। देरी से पता चल पाने की वजह से संक्रमण बढ़ जाता है।

हार्मोनल कारणों की वजह से पेशाब संबंधी कोई भी परेशानी महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा अधिक होती है, महिलाओं का यूरीन पास न कर पाना, रुक-रुक कर पेशाब आना, खांसने पर भी यूरीन निकल जाना या फिर यूरीन के रास्ते जलन आदि की समस्या यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेशन) की वजह से हो सकती है, जबकि एक उम्र के बाद पुरुषों में बार-बार पेशाब आना या फिर रुक-रुक कर पेशाब आने की वजह प्रोस्टेट ग्रन्थि(Prostrate Glands) का बढ़ना होता है।

कब-कब ब्लैडर खाली करना चाहिए:

दवाब के बाद भी यदि तीन से चार मिनट भी पेशाब को रोका गया तो यूरिन के टॉक्सिक तत्व किडनी में वापस चले जाते हैं, जिसे रिटेंशन ऑफ यूरिन कहते हैं। यूरीन शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, जिसे महसूस होने पर एक से दो मिनट के अंदर शरीर से बाहर निकल देना चाहिए। पसीने की तरह पेशाब के माध्यम से गैर जरूरी तत्व भी बाहर निकलते हैं। यदि वह थोड़े समय भी अधिक शरीर में रहते हैं तो संक्रमण की शुरुआत हो सकती है।

महिलाओं व कामकाजी युवाओं में यूरीन संबंधी दिक्कतें आती हैं, जिसकी शुरूआत ब्लेडर में दर्द के रूप में होती है। महिलाओं में लघु शंका संबंधी आदत में सामाजिक तत्व अधिक देखा गया है, जो एक से दो घंटे तक यूरीन रोक लेती है। वहीं 8 से 10 घंटे बैठ कर काम करने वाले युवाओं को यूरीन की जरूरत ही तब महसूस होती हैं, जबकि वह कार्य करने की स्थिति बदलते हैं।

जबकि इस दौरान किडनी से यूरिनरी ब्लेडर में पेशाब इकठ्ठा होता रहता है। हर एक मिनट में दो एमएल यूरीन ब्लेडर में पहुंचता है, जिसे प्रति एक से दो घंटे के बीच खाली कर देना चाहिए। ब्लेडर खाली करने में तीन से चार मिनट की देरी में पेशाब दोबारा किडनी में वापस जाने लगता है, इस स्थिति के बार-बार होने से पथरी की शुरूआत हो जाती है। क्योंकि पेशाब में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्व होते हैं।

यूटीआई के संक्रमण से बचने के लिए डाइट:

यूटीआई की वजह हालांकि संक्रमण को बताया गया है, बावजूद सही डाइट लेने से संक्रमण को रोका जा सकता है। ऐसा पाया गया है कि डाइट में मौजूद पोषक तत्व और फाइबर का सीधा असर यूटीआई संक्रमण से हैं। नियमित रूप से चेरी, कैरबरी, फल और दूध को अपने खाने में शामिल करें इससे आपको यूटीआई के संक्रमण की होने की आशंका कम होती है और अपने खाने में पौष्टिक चीजों को शामिल करें। दरअसल यूटीआई का कारक ई कोलाई बैक्टीरिया के संक्रमण बढ़ने का असर है, जिसका कारण  शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना है। इसलिए अधिक फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन केवल बैक्टीरियल संक्रमण ही नहीं अन्य बीमारियों के खतरे से भी बचाते हैं।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है।अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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