Cardiovascular : कार्डियोवस्कुलर के शिकार बन रहे भारत के युवा, जानिए क्या है कार्डियोवस्कुलर

Cardiovascular Heart Disease
  • कार्डियोवैस्कुलर ह्रदय रोग के शिकार हो रहे भारत के 34% युवा
  • दुनिया में सबसे अधिक मृत्यु कार्डियोवैस्कुलर डिजीजे की वजह से

Cardiovascular Heart Disease: कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (यानि सीवीडी दुनिया में सबसे अधिक युवाओं की मौत का कारण है। विश्व स्वास्थ संगठन ने बाक़ायदा इस पर रिपोर्ट भी जारी की है। वहीं पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 26 सालों में भारत में कार्डियोवस्कुलर हार्ट डिजीज के मामलों में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोरोना वायरस के चलते लगातार बढ़ रहे लॉकडाउन की वजह से युवाओं में इस रोग के बढ़ने की संभावना है।

जानिए कार्डियोवस्कुलर हार्ट डिजीज के कारण, लक्षण और इलाज (cardiovascular disease symptoms, causes & treatment)

कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज क्या है (What Is Cardiovascular Heart Disease?)

कार्डियोवैस्क्युलर या सर्कुलरी सिस्टम (परिसंचरण तंत्र) हृदय, धमनियों, शिराओं और रक्त नलिकाओं से बना होता है। इनसे जुड़ी कोई भी समस्या सीवीडी कहलाती है। इस तरह सीवीडी, हृदय और रक्त नलिकाओं से जुड़े कई रोगों का समूह है।

कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज के इन संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें (cardiovascular disease symptoms)

  • -छाती में बेचैनी और भारीपन महसूस होना।
  • -छाती में दर्द के साथ सांस फूलना।
  • -अत्यधिक पसीना आना।
  • -बांहों का सुन्न हो जाना।
  • -बोलने में ज़ुबान लड़खड़ाना।
  • -हृदय की धड़कनें असामान्य हो जाना।
  • -लगातार चक्कर आना, थकान या कमजोरी।
  • -जी मिचलाना, अपच, सीने में जलन या पेट दर्द

कारण- (causes of cardiovascular )

-धूम्रपान, धमनियों की दीवारों को हानि पहुंचाकर सीवीडी के खतरे को 3-6 गुना बढ़ा देता है।

-तनाव कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज की आशंका को 15-20 प्रतिशत बढ़ा देता है।

-कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और मोटापा हृदय तंत्र पर बुरा असर डालते हैं।

-मांसाहार, तली चीजें, फास्ट फूड और ज्यादा नमक व चीनी खाना भी नुकसान पहुंचाता है।

-आनुवंशिक कारण। 

-शारीरिक सक्रियता की कमी का हृदय, धमनियों, और शिराओं पर बुरा असर पड़ता है।

कार्डियोवस्कुलर रोग से बचाव व उपचार (Cardiovascular Treatment)

कार्डियोवस्कुलर रोगों से बचाव के लिए जीवन शैली में बदलाव करें।

शारीरिक सक्रियता को बनाएं रखा जाए।

खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नियमित रुप से व्यायाम करें।

जरूरत पड़ने पर सर्जरी करवा सकते हैं। 

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