चिंता, चिता से बुरी क्यों है ?

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आज डिजिटल युग में ऐसा व्यक्ति ढूंढना मुश्किल है जो किसी न किसी रूप में तनाव,चिंता, स्ट्रैस से ग्रसित न हो। स्ट्रैस, शरीर और मन की एक ऐसी आंतरिक अवस्था है, जो किसी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक मांग या वातावरण में बदलाव की वजह से होती है ओर ये अवस्था हमारी तनाव को झेलने की क्षमता से ज्यादा तनावपूर्ण, ज्यादा खतरनाक और बुरी महसूस होती है। हो सकता है एक घटना एक व्यक्ति के लिए तनाव पूर्ण हो दूसरे के लिए बिल्कुल भी न हो।

” सुना है सुकरात को जब जहर दिया गया, तो सभी आस पास के लोग बड़ी चिंता और अवसाद में नजर आ रहे थे, लेकिन सुकरात के चेहरे पर जरा सा भी चिंता नहीं था। सुकरात के चेहरे के तरहफ देखते हुए एक शिष्य ने पूछा कि कुछ ही देर में आपकी मृत्यू हो जाएगी, पर आपको तो बिल्कुल भी चिंता नहीं है। सुकरात ने कहा “मैंने जीवन को पूर्णता के साथ जिया है, ऐसा कुछ भी नहीं जिसे जीना बाकी रह गया हो, जो करने आया था वो कर लिया है अब कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं आज मरूं या कल” घटना तो एक ही है मृत्यु, परन्तु सबकी प्रतिक्रियाएं अलग अलग होती हैं। “

तनाव के कारण

तनाव के बहुत सारे कारण हो सकते है जैसे शारीरिक, मानसिक, वातावरण, सामाजिक आदि। तनाव या चिंता के लिए कहा गया है कि चिंता, चिता से भी बुरी होती है। आगे हम समझेंगे की ऐसा क्यों कहा गया है। हमारे शरीर का शायद ही कोई ऐसा अंग या सिस्टम होगा जिस पर चिंता के बुरे प्रभाव न पड़ते हो। सर से पांव तक सारे शरीर पर बहुत बुरे परिणाम सामने आते है।

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महिलाएं लेती हैं ज्यादा टेंशन

चिंता पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होती है। संभवत इसलिए भी क्यों कि वो ज्यादा भावुक होतीं है। टेंशन से अक्सर सर दर्द होता है। टेंशन सरदर्द का सबसे मुख्य कारण है। जो लोग तनाव में रहते है उनके बाल ज्यादा झड़ते है नींद कम आती है, चक्कर आ सकते है, याददास्त कम हो जाती है, हमेशा घबराहट सी बनी रहती है, मन उदास रहने लगता है, उत्साह खत्म होने लगता है, और अगर चिंता लंबे समय तक रहे तो डिप्रेशन भी हो सकता है।

पेट पर पड़ता है बुरा असर

चिंता से पेट पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है जैसे एसिडिटी बनना, पेट में अल्सर बनना, अपच, और गैस बनना आदि। आपने अक्सर लोगों को ये कहते हुए सुना होगा कि, पेट की गैस माथे में चढ़ गई, जबकि होता उल्टा है। टेंशन की वजह से पेट मे गैस बनने लगती है।

टेंशन से बढ़ जाती है हार्ट की समस्या

स्ट्रेस, हृदय पर भी बहुत बुरा असर डालता है। ये प्रमाणित है कि जो लोग ज्यादा तनाव या चिंता में रहते है उनको हार्ट अटैक ज्यादा होते है, उनको ब्लड प्रेशर अधिक पाया जाता है। अगर रोज ब्लड प्रेशर की दवा खाई जाए और चिंता या टेंशन वही बनी रहे तो ब्लड प्रेशर संभवतय कभी ठीक नहीं होगा। इसीलिए ज्यादतर लोग सालों तक ब्लड प्रेशर कम करने की दवा खाते रहते हैं।

बढ़ने लगता है ब्लड शुगर

चिंता से स्वास लेने में भी मुश्किल होने लगती है या फिर स्वास की गति तेज हो जाती है। टेंशन में रहने वाले लोगों को अक्सर शुगर यानी डायबिटीज की बीमारी भी ज्यादा होती है। चिंता की वजह से बनने वाले हार्मोन कोर्टिसोल की वजह से ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है और ऐसा देखा गया है कि अगर आप चिंताग्रस्त रहते हैं तो ब्लड शुगर आसानी से कंट्रोल नहीं होता है या बढ़ता ही जाता है

रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है असर

चिंता से सबसे खतरनाक असर होता है हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी के हमारे शरीर में बैठे डॉक्टर पर। जो लोग अक्सर तनाव पूर्ण जीवन जीते हैं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, उनको इन्फेक्शन और दूसरी तमाम तरह की बीमारियां ज्यादा होती हैं। हम में से काफी लोगों के शरीर में टीबी के कीटाणु पाए जाते हैं पर वो हमें बीमार सिर्फ इसलिए नहीं कर पाते क्यों कि हमारे शरीर का अंदर वाला डॉक्टर यानी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता उन कीटाणुओं को रोके रखती है। इसलिए आपने देखा होगा कि लगतार लंबे समय तक तनाव में रहने से टीबी की बीमारी और दुसरे फंगल इन्फ़ेक्सन भी हो जाते हैं।

सेक्सुअल लाइफ हो जाती है खराब

चिंता या तनाव की वजह से हमारी सेक्सुअल लाइफ पर भी बुरा असर पड़ता है जैसे सेक्स इच्छा में कमी होना, पुरुषों में लिंग में तनाव का अभाव, महिलाओं में मासिक धर्म मे अनियमितता, सफेद पानी की समस्या आदि। इसीलिए अक्सर टेंशन में रहने वाली महिलाएं सफेद पानी की शिकायत करती हैं।

टेंशन के कारण होने लगते है ये बदलाव

जो लोग तनाव में रहते हैं उनके स्वभाव में भी काफी बदलाव देखने को मिलता है जैसे वो चिड़चिडे ज्यादा रहते हैं और उन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आता हैं, बैचेन रहते हैं, किसी काम को करने का उत्साह नहीं रहता, वो या तो कम खाएंगे या फिर ज्यादा खायेंगे इसीलिए या तो पतले या मोटे हो जाते हैं।

गलती से भी ना करें ये काम

आपने ऐसे लोग देखे होंगे जो जब भी टेंशन में होते हैं, तो या तो बिड़ी, सिगरेट, गुटखा,खैनी या शराब, बियर आदि नशें का सेवन करते हैं। असल में जब आप किसी भी तरह का नशा करते हैं तो दिमाग में एक हार्मोन निकलता है जिसे डोपामीन या हैप्पी हार्मोन या फील गुड हॉर्मोन भी कहते हैं और जब भी डोपामीन निकलता है तो हमें अच्छा महसूस होता है और तनाव से थोड़ी देर के लिए मुक्ति मिलती है। उस तनाव से मुक्ति और अच्छा महसूस करने लिए हम धीरे धीरे नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं और उसके आदि हो जातें हैं। खुश लोग अक्सर नशे से दूर रहते हैं।

टेंशन से मुक्ति

टेंशन से मुक्ति के लिए नशा करना वैसा ही है जैसे अगर किसी को पेट में कैंसर की गांठ हो और वो आराम के लिए सिर्फ दर्द की दवा खाता रहे। उसे कैंसर की वजह से हो रहे दर्द में तो आराम मिलेगा, पर थोड़ी देर के लिए और मूल बीमारी कैंसर धीरे धीरे बढ़ती रहेगी। इसलिए टेंशन मुक्ति के लिए नशा नहीं करना चाहिए। आगे चल कर टेंशन और नशा दोनों के लिए इलाज़ लेना पड़ेगा।

चिंता या तनाव से कभी कभी एक और समस्या पैदा हो जाती है, मानसिक तनाव की वजह से शरीर में तरह तरह के लक्षण जैसे पेट दर्द, शरीर का गर्म महसूस होना, शरीर में अलग अलग जगह पर दर्द महसूस होना आदि। असल में समस्या तनाव या टेंशन है पर लक्षण शरीर में महसूस होतें हैं इसलिए एक आम व्यक्ति कन्फ्यूज़ हो जाता है और शरीर की बार-बार जांचें जैसे एंडोस्कोपी कराते हैं पर उनमें कुछ नहीं आता। कारण, समस्या शरीर में नहीं मन में है। मैनें ऐसे बहुत सारे व्यक्तियों को देखा है जो अनावश्यक जांच और दवा लेकर सालों तक परेशान रहते हैं और ऐसा अधिकतर पेट की बीमारियों में देखा गया है।

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अगर आपके घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमार है या उसकी बीमारी घरेलू उपायों से कुछ समय के लिए ठीक हो जाती है, लेकिन पीछा नहीं छोड़ती है तो आपको तत्काल उसे डॉक्टर से दिखाना चाहिए. क्योंकि कई बार छोटी बीमारी भी विकराल रूप धारण कर लेती है. अभी घर बैठे स्पेशलिस्ट डॉक्टर से “Aayu” ऐप पर परामर्श लें . Aayu ऐप डाउनलोड करने के लिए नीचे दी गई बटन पर क्लिक करें.

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