तनाव और डिप्रेशन को दूर करने वाले योग

depression

कोरोनाकाल में सुसाइड, स्ट्रेस और डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। दुनियाभर में 26 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन का शिकार है। दिमाग को शांत करने के लिए समय निकालें। 

अवसाद (डिप्रेशन) क्या है (Depression in Hindi):

अवसाद की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, मगर माना जाता है कि इसमें कई चीज़ों की अहम भूमिका होती है।

ज़िंदग़ी के अहम पड़ाव जैसे किसी नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, आमतौर पर अवसाद की वजह बन सकते है।

अगर आपके मन में हर समय बुरा होने की आशंका रहती है तो इससे भी अवसाद में जाने का ख़तरा रहता है। इसके तहत लोग सोचते रहते हैं ‘मैं हर चीज़ में विफल हूँ’।

मेडिकल कारणों से भी अवसाद होता है, जिनमें एक है थायरॉयड की कम सक्रियता होना। कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट्स में अवसाद हो सकता है। इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएँ शामिल हैं।

अवसाद (डिप्रेशन) के तीन लक्षण ( Three Symptoms of depression):

मूड यानि मिज़ाज. इसमें किसी भी काम में मन नहीं लगता, कोई रुचि ना होना, किसी बात से कोई खुशी ना होना, यहां तक दुख का भी एहसास ना होना।

विचार: हर समय नकारात्मक सोचना  

शारीरिक जैसे नींद ना आना या बहुत ज्यादा नींद आना। रात को दो-तीन बजे नींद खुलना। अगर यह लगातार चलता रहें तो यह अवसाद हो सकता है।

अवसाद बिना किसी कारण के भी हो सकता है। यह धीरे-धीरे घर कर लेता है और मदद की कोशिश के बजाए आप उसी से संघर्ष करते हैं।

दिमाग़ के रसायन अवसाद की हालत में किस तरह की भूमिका निभाते हैं अभी तक यह पूरी तरह समझ नहीं आया है। ज़्यादातर विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि यह = सिर्फ़ दिमाग़ में किसी तरह के असंतुलन की वजह से नहीं होता।

डिप्रेशन दूर करने के लिए 5 तरह के योग:

अधोमुख श्वानासन (डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज):

  • पेट के बल लेटें और सांस खींचते हुए पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं और टेबल जैसा आकार बनाएं।
  • सांस को बाहर निकालते हुए धीरे-धीरे कूल्हों (हिप्स) को ऊपर की तरफ उठाएं। अपनी कोहनियों और घुटनों को सख्त बनाए रखें। शरीर को उल्टे वी के आकार में आ जाए।
  • कंधे और हाथ को एक सीध में रखें और पैर कूल्हे की सीध में रखें। टखने बाहर की तरफ रखें।
  • हाथों को नीचे जमीन की तरफ दबाएं और गर्दन को लंबा खींचने की कोशिश करें। आपके कान आपके हाथों के भीतरी हिस्से को छूते रहें।
  • इसी स्थिति में कुछ सेकेंड्स तक रुकें और उसके बाद घुटने जमीन पर टिका दें और मेज जैसी स्थिति में​ फिर से वापस आ जाएं।

सेतुबंधासन (ब्रिज पोज):

  • योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और सांसों की गति सामान्य रखते हुए हाथों को बगल में रख लें।
  • धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर कूल्हों के पास ले आएं। कूल्हों को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं। हाथ जमीन पर रहने दें।
  • कुछ देर के लिए सांस को रोककर रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए वापस जमीन पर आएं। पैरों को सीधा करें और विश्राम करें।
  • 10-15 सेकेंड तक ​आराम करने के बाद फिर से शुरू करें।

शवासन (कॉर्प्स पोज):

  • पीठ के बल लेटकर अपनी आंखें बंद कर लें। दोनों पैरों को अलग-अलग करें और शरीर को रिलैक्स छोड़ दें। हाथ शरीर से थोड़ी दूर रखें और हथेलियों को आसमान की ओर खुला छोड़ दें।
  • धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से की तरफ ध्यान देना शुरू करें। शुरुआत पैरों के अंगूठे से करें। ऐसा करते हुए सांस लेने की गति एकदम धीमी कर दें।
  • धीरे-धीरे आप गहरे मेडिटेशन में जाने लगेंगे। आलस या उबासी आने पर सांस लेने की गति तेज कर दें। शवासन करते हुए कभी भी सोना नहीं चाहिए।
  • सांस लेने की गति धीमी​ लेकिन गहरी रखें। आपका फोकस सिर्फ खुद और अपने शरीर पर रहेगा। 10-12 मिनट के बाद, आपका शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाएगा।

चक्रासन:

  • पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों और पैरों को सीधा रखें। अब पैरों को घुटने के यहाँ से मोड़ लें।
  • अब अपने हाथों को पीछे की ओर अपने सिर के पास ले जाकर जमीन से टिका लें।
  • सांस को अंदर की ओर लें और अपने पैरों पर वजन को डालते हुए कूल्हों को ऊपर उठाए।
  • दोनों हाथों पर वजन को डालते हुए अपने कंधों को ऊपर उठाए और धीरे-धीरे अपने हाथों को कोहनी के यहाँ से सीधे करते जाए।
  • ध्यान रखें की दोनों पैरों के बीच की दूरी और दोनों हाथों की बीच की दूरी समान होनी चाहिए।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को अपने दोनों पैरों के पास लाने की कोशिश करें और जितने पास ला सकते है लाए।

उत्तानासन:

  • सीधे खड़े हो जाए और दोनों हाथों को कूल्हों पर रखें। सांस को भीतर खींचते हुए कमर को मोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
  • धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और दबाव ऊपरी जांघों पर आने लगेगा। अपने हाथों से टखने को पीछे की ओर से पकड़ें।
  • आपके पैर एक-दूसरे के समानांतर रहेंगे। आपका सीना पैर के ऊपर छूता रहेगा। जांघों को भीतर की तरफ दबाए और शरीर को एड़ी के बल स्थिर बनाए रखें।
  • सिर को नीचे की तरफ झुकाए और टांगों के बीच से झांककर देखते रहें। इसी स्थिति में 15-30 सेकंड तक स्थिर बने रहें। जब आप इस स्थिति को छोड़ना चाहें तो पेट और नीचे के अंगों को सिकोड़ें।
  • सांस को भीतर की ओर खींचें और हाथों को कूल्हों पर रखें। धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठें और सामान्य होकर खड़े हो जाए।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है।अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ  डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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