TUBERCULOSIS | WORLD TB DAY | विश्व क्षयरोग दिवस पर जानें टीबी के बारे में, पढ़ें लक्षण व बचाव

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टीबी (Tuberculosis) एक गंभीर संक्रामक रोग है जो हवा के माध्यम से फैलता है, टीबी (Tuberculosis) से ग्रसित व्यक्ति यदि खांसता, छींकता या बोलता है तो संक्रामक ड्रापलेट न्युक्लाई हवा के माध्यम से दुसरे व्यक्ति तक पहुँच कर उन्हें भी संक्रमित कर देता है। टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु के वजह से होता है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार टीबी (Tuberculosis) दुनिया के सबसे घातक संक्रामक रोगों में से एक है। प्रत्येक दिन, लगभग 4500 लोग टीबी से अपनी जान गंवाते हैं और लगभग 30,000 लोग इस रोके जाने योग्य और इलाज योग्य बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं। टीबी (Tuberculosis) से निपटने के वैश्विक प्रयासों ने वर्ष 2000 से अनुमानित 54 मिलियन लोगों की जान बचाई है और टीबी मृत्यु दर में 42% की कमी आई है।

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टीबी (Tuberculosis) या क्षयरोग दो अवस्थाओं में पाया जाता है – सुप्त व सक्रीय. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की ही एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में २ अरब से ज़्यादा लोगों को सुप्त टीबी (Latent TB) संक्रमण है। सुप्त टीबी ज़्यादा संक्रामक या ख़तरनाक नहीं है लेकिन इसका इलाज ना कराने पर ये सक्रीय टीबी में बदल सकती है जो एक ख़तरनाक अवस्था है।

सक्रीय टीबी के मरीज़ को हमेशा मास्क पहन के रहना चाहिए या मुंह पर हाथ रख कर खांसना या छींकना चाहिए क्युकी वो स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।

जानें टीबी के लक्षण (Symptoms of Tuberculosis):

1. लगातार 3 हफ्तों से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना।

2. खांसी के साथ खून का आना।

3. छाती में दर्द और सांस का फूलना

4. वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना।

5. शाम को बुखार का आना और ठंड लगना।

6. रात में पसीना आना।

टीबी के लक्षण दिखने के बाद जांच द्वारा ये सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज़ को टीबी है या नहीं।

टीबी का उपचार (Treatment of Tuberculosis):

टीबी के प्राथमिक उपचार के तौर पर एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। टीबी का उपचार काफ़ी लम्बा चलता है और इसमें मुख्यतया आइसोनियाजिड और रिफाम्पिसिन एंटीबायोटिक्स सबसे ज़्यादा प्रयोग ली जाती है।

टीबी (Tuberculosis) के उपचार में 6 से 9 महीनों तक का लम्बा समय लग सकता है जिसमें शुरूआती समय में आइसोनियाजिड, रिफाम्पिसिन, इथाम्बुटोल और पैराजिनामाइड ड्रग्स डी जाती हैं. कुछ समय के बाद दो दवाओं ख़ासकर इथाम्बुटोल और पैराजिनामाइड बंद कर दी जाती है व बचे हुए 4 से 7 महीने केवल आइसोनियाजिड और रिफाम्पिसिन दवाएं डी जाती है। इन एंटीबायोटिक्स के अलावा टीबी के इलाज के लिए  स्ट्रेप्टोमाइसिन इंजेक्शन भी दिया जाता है।

जिन लोगों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी पाया जाता है उन लोगों में  फर्स्ट लाइन ड्रग्स का असर ख़तम होने की स्थिति में उन पर सेकंड लाइन ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है। सेकंड लाइन ड्रग्स में सीप्रोफ्लॉक्सासिन, लेवोफ्लॉक्सासिन, मोक्सीफ्लोक्सासिन, अमिकासिन, कैनामायसिन और कैप्रीयोमायसिन इत्यादि एंटीबायोटिक्स आती है। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के मरीज़ को ये इलाज 2 साल तक लेना पड़ सकता है। अन्य प्रकार एक्सटेनसिवली ड्रग रेजिस्टेंस टीबी में मरीज़ को थर्ड लाइन ड्रग्स डी जाती है जो 2 साल से ज़्यादा समय तक डी जाती है। सबसे ज़्यादा गंभीर एक्सटेनसिवली ड्रग रेजिस्टेंस टीबी है जिसका इलाज़ विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में करवाना चाहिए।

डॉट सेंटर्स (DOTS Centres):

ज़्यादातर मरीज़ थोड़ा ठीक लगने पर दवा लेना बंद कर देता, जिससे टीबी (Tuberculosis) दोबारा हमला कर सकती है। डॉट्स के जरिए टी.बी के रोगियों का इलाज किया जाता है। डॉट्स की मदद से टीबी से पूरी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है। विश्व स्तर पर टी.बी. को नियंत्रित करने के लिए इस विधि को अपनाया गया है, जिसमें रोगी को एक-दिन छोड़कर हफ्ते में तीन दिन डॉट्स कार्यकर्ता के द्वारा दवाई का सेवन कराया जाता है। यह दवा आपको विभिन्न सरकारी डॉट्स सेंटर्स (DOTS Centres) पर मुफ्त मिलती है।

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डॉट्स विधि

डॉट्स विधि के अन्तर्गत मरीज़ को दवा की हर ख़ुराक डॉट्स कार्यकर्ता की देखरेख में लेनी होती है। इसमें मरीज़ को हर दुसरे दिन, सप्ताह में तीन बार दावा लेनी होती है। यदि मरीज़ डॉट्स सेंटर नहीं आए तो कार्यकर्ता की ज़िम्मेदारी होती कि वो मरीज़ के घर जा कर उसे समझाए व उसे दवा खिलाए।

सभी प्रकार के टीबी रोगियों का इलाज डाट्स से सम्भव है।

2000 से 2017 तक अब तक 5.4 करोड़ मरीजों का प्रभावी इलाज किया जा चुका है।

डॉट्स (DOTS) क्या है?

टीबी के इलाज के लिए डॉट्स (डाइरेक्टली ऑब्जर्व्ड शॉर्ट कोर्स), अर्थात् सीधे तौर पर लिए जाने वाला छोटी अवधि का इलाज है। यह विश्वभर में टीबी के इलाज के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर अपनाए जाता है।

डॉट्स (DOTS) के क्या लाभ हैं?

  • डॉट्स इलाज में 95% तक सफल है।
  • डॉट्स, बीमारी में तुरंत एवं सुनिश्चित लाभ की गारंटी देता है।
  • डॉट्स ने भारत में लगभग 17 लाख रोगियों को स्वस्थ किया है।
  • डॉट्स, एचआईवी संक्रमित टीबी मरीजों के जीवन काल को बढ़ाता है।
  • डॉट्स सभी स्वास्थ केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं।

टीबी की रोकथाम (Prevention from Tuberculosis)

1. टीबी (Tuberculosis) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से शिशुओं को बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) का टीका ज़रूर लगवाना चाहिए। बच्चों में यह 20% से ज्यादा तक संक्रमण होने के ख़तरे को कम करता है।

2. सक्रिय टीबी का पता चलने पर उसका सही उपचार करवाना चाहिए। टीबी का उपचार जितना जल्दी शुरू होगा, उतनी जल्दी ही बीमारी से आराम  मिलेगा।

3. टीबी (Tuberculosis) रोग से संक्रमित मरीज़ को कभी भी भीड़-भाड़ वाली जगह पर या बाहर कहीं भी नहीं थूकना चाहिए साथ ही छींकते व खांसते समय मुंह पर कपड़ा या हाथ रखना चाहिए।

4. साफ-सफाई का ध्यान रखने से भी टीबी के संक्रमण से बचा जा सकता है।

5. स्वस्थ व संतुलित अहार ले कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षमता मजबूत होने पर टीबी रोग से बचा जा सकता है।

इन तरीकों व उपायों से टीबी रोग से बचा व उपचार किया जा सकता है। विश्व क्षयरोग दिवस पर ये कोशिश करें कि टीबी रोग का पूरी तरह उन्मूलन हो।

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