दांतो में सड़न है जानें इसके कारण, लक्षण और उपचार | Daily Health Tip | Aayu App

tooth decay

हमारे दाँतों में सड़न की एक वजह हमारा गलत खानपान भी हो सकता है। इसलिए चिपचिपी चीज़ें जैसे चॉक्लेट और ऐसे खाद्य पदार्थ जिसमे शक्कर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा हो खाने से बचें।

One of the reasons of tooth decay could be our wrong eating habits. Avoid eating things which contains sugar and carbohydrate in excess amount such as choclates.

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आजकल दांतों में सड़न होना बहुत आम बात है। आपको दांतों से संबंधित कुछ आम परेशानियां और हमें कौन-कौन सी छोटी-छोटी सावधानियाँ रखनी चाहिए जिनसे आप दांतों की सड़न (Tooth decay) से बच सकते है।

दांतों में सड़न: (Tooth decay)

  • हमारे दांत कैल्शियम ,फॉस्फोरस और अन्य खनिज से मिलकर बनते है। लेकिन हमारे शरीर का सबसे कठोर भाग हमारे दाँत ही होते है परन्तु लापरवाही और जागरूकता ना होने की वजह से हम दांतों के सड़न के शिकार बन जाते है।
  • दांतों की सड़न (Tooth decay) से दांतों में दर्द और खाना खाने में तकलीफ जैसी समस्याएँ होती है। कई बार इससे आत्मविश्वास में भी कमी आ जाती है।

दांतों में सड़न के कारण: ? (Causes of Tooth decay in Hindi)

दांतों की सड़न एक आम समस्या है परन्तु यह हमारे मुंह उनसे के अन्दर होती है और हमें दिखाई नहीं देती इसलिए हम कई बार इसे नजरअंदाज कर देते है।

खान पान: ध्यान रखने वाली बात यह है कि जिन खाद्य पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट और शक्कर की मात्रा ज्यादा होती है और जो खाने में चिपचिपे होते है उनसे दांतों में सड़न का ज्यादा खतरा होता है।

दांतों की सफाई और उनकी बनावट: दांतों की ठीक तरह से सफाई ना करना सड़न बन सकती है। रोजाना दांतों को दो बार साफ़ जरुरी करें। इससे आप मुँह में मौजूद बैक्टीरिया को बढ़ाने से बचा सकते है और साथ ही फंसे हुए खाद्य प्रदार्थ को साफ़ कर सकते हैं। दांतों को साफ़ रखने के लिए आपको सहीं तरीके से ब्रश करना और माउथवाश का प्रयोग करना आना चाहिए।

मुख में मौजूद बैक्टीरिया: बैक्टीरिया हर किसी के मुँह में होते है लेकिन अगर हम अपने मुँह की सफाई अच्छी तरह से करते है तो हम इन बैक्टीरिया (Bacteria) की तादात को बढ़ने से रोक सकते है।

आपको बता दें कि जैसे ही आप खाना बंद करते है बैक्टीरिया (Bacteria) अपना काम शुरू कर देते है, वह दांतों पर सफ़ेद परत बनाता है जिसे प्लाक कहा जाता हैं। यही प्लाक बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है और नियमित दो समय ब्रशिंग करके इसे बनने से हम रोक सकते है। मुँह में मौजूद बैक्टीरिया को एसिड बनाने के लिए कार्बोहाइड्रेट और शक्कर की जरुरत होती है, जिससे दांतों में सड़न होती है।

दांतों में सड़न के लक्षण: (Symptoms of Tooth decay In Hindi)

दांतों की सड़न का पहला लक्षण है दांत की उपरी सतह ( इनेमल) पर भूरा दाग जैसा लगना। फिर यह दाग थोडा बड़ा होता है और एक छेद का रूप लेता है उस जगह पर खाना फंसना शुरू हो जाता है। खाना फंसने से सड़न की प्रक्रिया तेज हो जाती है और दांत का छेद बड़ा हो जाता है। 

जब यह छेद थोडा गहरा हो जाता है और अंदरूनी सतह (डेंटिन) में पहुँच जाता है तब हमे ठंडे या मीठे से कनकनाहट होने लगती है। जब सड़न इससे भी ज्यादा अन्दर चला जाता है तब वह पल्प (दांतों की नस) तक पहुँच जाता है और इसे संक्रमित कर देता है, तब हमें दांतों में ज्यादा दर्द होता है।

दांतों में सड़न से बचाव: (Prevention of Tooth decay in Hindi)

  • हर 6 महीने में अपने दन्त चिकिसक से दांतों का चेकअप करवाएँ।
  • सुबह थोडा जल्दी उठें और अपने रोजमर्रा के काम के लिए समय निकाले।
  • 2 बार दांतों को साफ़ करें, एक बार सुबह और एक बार रात्रि में।
  • ब्रश ज्यादा जोर से ना रगड़ें और 2 मिनट से ज्यादा ना करें।
  • माउथवॉश का प्रयोग करें।
  • रात को सोने से पहले एक बार दांतों के बीच में फ्लॉस (floss) से सफाई करें।
  • मीठा और चिपचिपा पदार्थ कम खाएं।
  • केक, पेस्ट्री, टॉफ़ी, चिप्स कम खाएं और अपने भोजन मे साबूत अनाज का प्रयोग करें।
  • सोडा युक्त कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करें।
  • नशा ना करें।

दांतों की सड़न का इलाज: (Treatment of Tooth decay in Hindi)

  • अगर आपके दांतों में सड़न हो गई है तो सबसे पहले आप अपने दन्त चिकित्सक से मिलें, उन्हे अपनी समस्या विस्तार से बताएं।
  • अगर सड़न छोटी है और दांतों की उपरी सतह पर है तो आपके दन्त चिकित्सक उसे साफ़ करके उस छेद में फिलिंग करेंगे। यह फिलिंग दांत के रंग की भी हो सकती है और मेटालिक की भी हो सकती है।
  • अगर सड़न के कारण दांत का बड़ा हिस्सा ख़राब हो गया है और दांतों के दर्द की शिकायत है तो दन्त चिकित्सक पहले दांतों का x-ray लेगा फिर आपको इलाज़ के बारे में बताएगा।
  • ज्यादातर बहुत ज्यादा सड़े हुए दांतों को दांतों के नस का इलाज (Root canal therapy ) द्वारा बचाया जाता है फिर उसपर एक कैप लगाई जाती है।
  • बहुत ही ज्यादा ख़राब और पूरी तरह सड़ चुके दांतों को निकाल कर उस जगह दूसरा अर्टिफिशियल दांत लगाया जाता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें.

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