Sexual and reproductive health awareness day: यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में वो सब कुछ जो आपके लिए जानना है जरूरी

Sexual and reproductive health awareness day

Sexual and reproductive health awareness day: देशभर में 12 फरवरी को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस मनाया गया | भारत सरकार के ‘नेशनल हेल्थ पोर्टल’ के मुताबिक लोगों को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियाँ पता होनी चाहिए, जैसे गर्भनिरोधक पद्धति को सुरक्षित ढंग से कैसे अपनाएं, यौन संचारित संक्रमण (एचआईवी-एड्स), अनचाहे गर्भ और असुरक्षित गर्भपात से कैसे बचें। इस अवसर यौन स्वास्थ्य के बारे में जागरुक (Sexual and reproductive health awareness) किया जाता है। 

इस अवसर पर महिलाओं को पीरियड् के बारे में भी जागरुक किया जाता है, बताया जाता है कि मासिक धर्म के दौरान क्या खाना चाहिए। इसके अलावा ये भी कि शारीरिक संबंध बनाने के दौरान स्वच्छता जरूरी है क्यूँकि इससे यौन संचारित बीमारियां फैलती हैं |

प्रजनन स्वास्थ्य क्या है? (What is reproductive health)

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस (Sexual and reproductive health awareness day) प्रतिवर्ष 12 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिवस यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के मुद्दों तथा यौन संचारित संक्रमण के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। 

यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Diseases) प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम (health awareness program), स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों का  प्रचार-प्रसार करते हैं। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य की स्थितियों में सुधार तथा जीवन को बचाने में मदद भी करते हैं। यह कार्यक्रम कभी-कभी बहुत गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के खिलाफ़ निवारक कार्रवाई को भी प्रोत्साहित करते हैं।

महिलाओं के प्रजनन संबंधी अधिकार (how to support women’s reproductive rights)

how to support women’s reproductive rights

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (Sexual and reproductive health) पर आज भी खुलकर बात न होने की वजह से प्रतिवर्ष लाखों महिलाएं यौन संक्रमण से पीड़ित हो रही हैं। जबकि यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर खुलकर बात हो इसलिए प्रतिवर्ष 12 फरवरी को ‘यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है।

ग्रामीण महिलाएं आज भी अस्पतालों में नहीं आती हैं जब तक की उन्हें गंभीर समस्या न हो, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (Sexual and reproductive health awareness) जैसे विषयों पर किशोरी और महिलाएं बात ही नहीं करती हैं।

महिलाओं और पुरुषों में जागरूकता (Sexual and reproductive health awareness) की कमी से संक्रमण हो रहा है। इसी वजह से वह एचआईवी और एचपीवी जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। यह समस्याएं मुख्य रूप से असुरिक्षत यौन संबंध, असुरक्षित प्रसव और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में यौन संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों मुताबिक हर साल संक्रमण के 35.70 करोड़ नए मामले सामने आ रहे है।

प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों से आपका क्या तात्पर्य है (Sexual and reproductive health rights) 

‘जागरूकता की कमी से बढ़ रहा यौन संक्रमण’ (Lack of Knowledge about Sexually Transmitted Diseases) 

Sexually Transmitted Diseases

भारत सरकार की एक नेशनल हेल्थ की रिपोर्ट मुताबिक महिलाओं को ऐसी सेवाओं की जानकारी होनी चाहिए, जो अनचाहे गर्भ से बचने में उनकी मदद करे। गर्भनिरोधक गोलियां अनचाहे गर्भ को रोकने में मदद करती हैं। इससे गर्भपात के बढ़ते आंकड़ों में कमी आ सकती है, जो महिलाओं के यौन स्वास्थ्य के लिहाज से एक अच्छा संकेत होगा। प्रजनन और यौन स्वास्थ्य की जानकारी (Sexual and reproductive health awareness) होने से गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियां, उनके चलते होने वाली मौतों और विकलांगता की घटनाएँ भी कम होंगी।

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गर्भावस्था और असुरक्षित गर्भपात (Unintended Pregnancy and Unsafe Abortion)

Unintended Pregnancy and Unsafe Abortion

रिपोर्टों के मुताबिक जब महिलाओं में उपलब्ध सेवाओं और जानकारियों का अभाव होता है तो अनचाहे गर्भधारण का जोखिम बढ़ जाता है। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो गर्भावस्था से जुड़े आधे से ज्यादा मामले अनचाही प्रेग्नेंसी के होते हैं। इनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा मामले आखिर में गर्भपात का कारण बनते हैं। वहीं, अगर गर्भपात असुरक्षित हो तो इससे महिलाओं के जीवन और सेहत को खतरा पैदा हो जाता है। हालांकि कुछ उपाय हैं जिनसे असुरक्षित गर्भपात को रोका जा सकता है। यहां सेक्स और इससे संबंधित स्वास्थ्य शिक्षा का महत्व बढ़ जाता है।

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यौन संक्रमण को रोकने के लिए सेक्स एजुकेशन जरूरी है (Sex education can help prevent the risk of unplanned pregnancy and sexually transmitted diseases) 

सेक्स एजुकेशन इंसान की भावनात्मक और शारीरिक ज़रूरतों, उसकी प्रकृति और व्यवहारिक पहलुओं की तार्किक शिक्षा है।

बाल-यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में अब गुड टच और बैड टच के बारे में बताया जा रहा है, जो सेक्स एजुकेशन का ही एक हिस्सा है। हमें समझना होगा कि सेक्स एजुकेशन का मतलब सिर्फ़ सेक्स नहीं है, बल्कि ये पीरियड,सहमति, यौनिकता, प्रजनन स्वास्थ्य (Sexual and reproductive health awareness), यौनिक अधिकार, सुरक्षित सेक्स, परिवार नियोजन, भावुक रिश्तों और उनकी ज़िम्मेदारियों और सहमति जैसे मुद्दों की बात है, जिसके बारे में अपने बच्चों को बताने से पहले हमें खुद भी इन पहलुओं को समझना और इन्हें अपनी जीवन-अपने परिवार में लागू करना होगा। 

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क्योंकि स्कूल में टीचर या किताबों में चाहे कितनी भी बातें लिखा-पढ़ा दी जाएँ वास्तविकता यही है कि जब बच्चे उन बातों का प्रयोग अपने आसपास होता नहीं देखते, वे उससे ख़ुद को जोड़ नहीं पाते। 

सरल शब्दों में कहूँ तो सेक्स एजुकेशन इंसान की भावनात्मक और शारीरिक ज़रूरतों, उसकी प्रकृति और व्यवहारिक पहलुओं की तार्किक शिक्षा है, जो बच्चों के समक्ष उनके विकास की साफ़ तस्वीर प्रस्तुत करती है और समाज के विकास में अहम भूमिका अदा करती है। ये इंसान को संवेदनशील बनाने में मदद करता है।  

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डिस्क्लेमर-

Sexual and reproductive health awareness यानि यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरुकता, इसके बारे में हर किसी को जानना जरूरी है। इस लेख में हमने यौन स्वास्थ्य, यौन संक्रमण, इससे होने वाली बीमारियां आदि की जानकारी दी है। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आएगा। अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। हम आपकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे।

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