हर वक़्त थकान लगने की समस्या को नजरअंदाज ना करें, जानें थकान के कारण की वजह और इलाज

why there is tiredness

कभी-कभी थकान किसी को भी महसूस हो सकती है लेकिन कुछ लोगों में यह लगातार बनी रहती है।इसलिए आपको थकान के कारण का पता होना चाहिए। हमेशा थकान बने रहने की इस स्थिति को क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम कहते है। यह थकान की ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को लगातार छह महीने या उससे अधिक समय से थकान रहती है और कई बार यह इतना गंभीर रूप लेती है कि सामान्य कामकाज में भी दिक्कत आने लग जाती है। भरपूर आराम और नींद से भी राहत नहीं मिल पाती। थकान क्यों होती है।

थकान के कारण ?

यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन इससे अधेड़ स्त्रियों को अधिक परेशानी होती है। कुछ शोध के हिसाब से मानसिक तनाव, वायरल संक्रमण के अलावा कई अन्य कारण इसके लिए जिम्मेदार होते है।

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थकान के कारण में कमजोर इम्यून सिस्टम आता है : खराब रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को यह समस्या ज़्यादा प्रभावित करती है। काम का दबाव बढ़ते ही थकान महसूस होने लगती है।

थकान के कारण में इन्फेक्शंस होना भी हो सकता है: कुछ बैक्टीरियल इन्फेक्शंस भी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के लिए जि़म्मेदार होते हैं।

थकान के कारण से ब्लड प्रेशर हो सकता है: लो बीपी की समस्या से परेशान लोगों को क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।

थकान के कारण से तनाव हो सकता है: लगातार तनाव में रहने की वजह से सीएफएस की समस्या हो सकती है।

थकान का कारण हॉर्मोन्स का असंतुलन हो सकता है: कई बार शरीर की ग्रंथियों द्वारा हॉर्मोन्स ना बनाने या हॉर्मोन्स असंतुलन की वजह से भी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम गिरफ्त में ले सकता है। क्रॉनिक फटीग से परेशान लोगों के हाइपोथेलेमस, पिट्यूट्री ग्लैंड और एड्रिनल ग्लैंड में हॉर्मोन असंतुलित मात्रा में उत्पन्न होते है।

डॉक्टर के पास कब जाएं:

 सीएफएस जांच के लिए कोई मेडिकल टेस्ट उपलब्ध नहीं है और इसके लक्षण कई अन्य बीमारियों से मेल खाते हैं इसलिए डॉक्टर्स के लिए पहचानना मुश्किल हो जाता है। जब लंबे समय तक थकान महसूस हो और आराम के बाद शरीर में ऊर्जा का संचार ना हो पाए तो डॉक्टर से सलाह लें।

थकान क्यों होती है। इसका सबसे बड़ा कारण लाइफस्टाइल में बदलाव है। आपको पता होना चाहिए थकान कैसे दूर करें तो इसका जवाब भी लाइफस्टाइल में बदलाव ही है।

लाइफस्टाइल में बदलाव करें:

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम का निश्चित इलाज ना होने के कारण जीवनशैली में बदलाव के जरिए ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सीएफएस से परेशान लोगों को कैफीन बेहद कम मात्रा में लेना चाहिए। एल्कोहॉल और निकोटिन से भी दूरी रखनी चाहिए। थकान और सुस्ती महसूस होने पर दिन में नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे रात की नींद प्रभावित होती है। सीएफएस से होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दर्द निवारक दवाएं भी ले सकते हैं।

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लक्षण:

  •  पेट में दर्द, आंतों में समस्या, डायरिया और पेट फूलने जैसा एहसास हो सकती है।
  • एलर्जी और खाने की चीज़ों के प्रति संवेदनशीलता, एल्कोहॉल, खुशबू, केमिकल दवाओं और शोर के प्रति चिड़चिड़ापन हो सकता है।
  • संवेदनशीलता बढ़ना
  • ठंड लगना और रात में पसीना आना
  • छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, और लंबे समय तक खांसी रहना
  • डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, अवसाद आदि
  • काम करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होना। कभी-कभी बिलकुल काम ना कर पाना
  • स्लीप डिसॉॅर्डर
  • याददाश्त कमज़ोर पडऩा
  • धुंधला दिखाई देना, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, आंखों में दर्द या रूखापन

अस्वीकरण: सलाह सहित यह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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