लू से बचने के तरीके | Daily Health Tip | 29 February 2020 | AAYU App

methods to prevent from heat stroke

गर्मियों 🌞 में ज़्यादा से ज़्यादा प्याज़ खाएं और धूप में सफर करते समय प्याज़ अपने साथ रखें क्योंकि प्याज़ आपको लू से बचाता है। ”

” In Summers, eat onions regularly and keep it in your pocket while going outside because it protects you from sun 🌞 stroke.”

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वातावरण में बदलाव के कारण शरीर में गर्मी प्रवेश करने को लू कहते हैं।

लू के लक्षण:

लू के शिकार होने पर बेचैनी, हाथ पैर और आँखों में जलन, मुंह सूखना, गला सूखना, बार-बार प्यास लगना, ब्लड प्रेशर लो हो सकता है जिससे नसों में ब्लड जमा होने से मृत्यु भी हो सकती है।

लू लगने की पहली अवस्था:

इससे रोगी को बेहोशी, थकावट और कमजोरी होने के साथ साथ नाड़ी की गति तेज हो जाती है और रोगी को पसीना भी आता है। उचित उपचार से रोगी को आराम मिल जाता है।

लू लगने के बाद दूसरी अवस्था:

इस अवस्था में सिर में भयंकर दर्द, त्वचा में रुखापन और सांस की गति धीमी हो जाती है। कई बार रोगी बेहोश भी हो जाता है।

लू की तीसरी अवस्था:

इसमें बुखार के साथ सांस की गति तेज हो जाती है। रोगी के शरीर का रंग नीला पड़ जाता है। वह बेहोश हो जाता है और अंत में उसकी मौत हो जाती है।

गर्मियों में लू से बचाव:

वैसे तो गर्मी, धूप और लू से बचने के लिए आप सतर्क रहते हैं और लू से बचने का पूरा प्रयास भी करते हैं। लेकिन इन सब के बावजूद भी अगर आपको लू लग जाए, तो यह उपाय आपको जरूर आजमाने चाहिए- 

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  • अगर धूप में निकलना बहुत ज़रूरी है तो अपना सिर ढंके। खुले शरीर धूप में न निकलें। आंखों पर सनग्लासेस लगाएं और हो सके तो सफेद या हल्के रंग के कॉटन के कपड़े ही पहनें। 
  • अचानक ठंडी जगह से एकदम गर्म जगह ना जाएं। खासकर एसी में बैठे रहने के बाद तुरंत धूप में ना निकलें।
  • कच्चा प्याज रोज खाएं। धूप में निकलने पर अपने पॉकेट में छोटा सा प्याज रखें, यह शरीर की गर्मी को खुद सोखकर लू से बचाता है।
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। जिससे पसीना आकर शरीर का तापमान नियमित रह सके और शरीर में जल की कमी न हो सके। अधिक गर्मी में मौसमी फल, फल का रस, दही, मठ्ठा, जीरा छाछ, जलजीरा, लस्सी, आमरस पिएं या आम की चटनी खाएं।
  • लू लगने पर तत्काल योग्य डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने से पहले कुछ प्राथमिक उपचार करने पर भी लू के रोगी को राहत महसूस होती है।
  • बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए। 104 डिग्री से अधिक बुखार होने पर बर्फ की पट्टी सिर पर रखनी चाहिए।
  • रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए। रोगी के शरीर को दिन में चार-पांच बार गीले तौलिए से पोंछना चाहिए। चाय-कॉफी आदि गर्म पेय का सेवन अत्यंत कम कर देना चाहिए। 
  • प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े अथवा सुराही के पानी का सेवन करवाना चाहिए। बर्फ का पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि यह हानिकारक होता है।
  • मरीज के तलवे पर कच्ची लौकी घिसें, इससे सारी गर्मी लौकी खींच लेगी और तुरंत राहत मिलेगी। लौकी सिकुड जाए तो समझें कि लू की गर्मी उतर रही है। यह क्रिया बार-बार दोहराएं।
  • जौ का आटा व पिसा हुआ प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करें तो लू से तुरंत राहत मिलती है। जब रोगी को बाहर ले जाएं, तो उसके कानों में गुलाब जल मिलाकर रूई लगाएं।
  • कैरी का पना विशेष लाभदायक होता है। कच्चे आम को गरम राख पर धीरे आंच वाले अंगारे में भुनें। ठंडा होने पर उसका गूदा (पल्प) निकालकर उसमें पानी मिलाकर मसलना चाहिए। इसमें जीरा, धनिया, शकर, नमक, कालीमिर्च डालकर पना बनाएं। पने को लू के रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में दिया जाना चाहिए।

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