International Day Against Drug Abuse: नशे की लत से छुटकारा पाना मुश्किल है, नामुकिन नहीं

prevention from drug abuse

लत किसी भी चीज की लगे, बुरी ही होती है। नशे की लत की बात की जाए तो नशे की लत से छुटकारा पाना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।

अगर सही तरीके से कोशिश की जाए, मरीज के साथ उसके परिवारवालों का साथ मिले तो यह मुश्किल भी आसान हो जाती है।

अडिक्शन क्या है?

जब शख्स नशे के सेवन को कंट्रोल नहीं कर पाता तो नशीले पदार्थ का सेवन बीमारी का रूप बन जाती है।

  • अडिक्शन एक मानसिक बीमारी है।
  • ज्यादा समय तक नशा करने पर दिमाग में बदलाव होता है, जिसे बिना इलाज के ठीक करना मुमकिन नहीं है।
  • इसमें लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है। इलाज के दौरान दवाई, काउंसलिंग और सामाजिक मेल-मिलाप जरूरी होता है।
  • इलाज के बाद बहुत सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि इसकी आशंका बनी रहती है कि अडिक्शन खत्म होने के बाद, यह फिर से शुरू ना हो जाए।

नशे की लत के शिकार हो जाने के लक्षण:

जब नशे की लत लग जाती है तो इससे दूर रहना मुश्किल हो जाता है। नशे की लत का शिकार होने के कुछ संकेत हैं।

  • नशीली चीज का एक साल से ज्यादा समय से इस्तेमाल करना।
  • नशा बंद करने या सीमित इस्तेमाल के लिए की जाने वाली कोशिश का काम ना करना या इच्छा का लगातार बने रहना।
  • नशे की वजह से ऑफिस, स्कूल या घर में जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहना।
  • रिश्तों में समस्या पैदा होना और लोग दूरी बनाने लगें।
  • खेल, टीवी यहां तक कि सिनेमा जैसे मनोरंजन के साधनों को छोड़ देना या बहुत कम कर देना।
  • नशे की वजह से शरीर में हो रही शारीरिक या मानसिक समस्या के बारे में जानकारी होने के बावजूद नशीली पदार्थों का बार-बार इस्तेमाल करना।
  • नशे का असर ज्यादा हो, इसके लिए लगातार इसकी मात्रा बढ़ाते जाना।

नशे की लत से छुटकारा पाने का इलाज:

अडिक्शन (लत) छुड़वाना बहुत मुश्किल नहीं है। अगर कोई अडिक्ट हो गया है तो उसे विशेष डॉक्टर से मिलने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।

ऐसा कोई शख्स फैमिली, फ्रेंड्स या दफ्तर में हो तो उसे साइकायट्रिस्ट के पास ले जाए। फैमिली समझें कि यह बीमारी है, ना कि कोई गलती। यह समझे कि कोई जानबूझकर नशा नहीं करता क्योंकि यह एक बीमारी है इसलिए इसका इलाज है।

जिस सरकारी अस्पताल में साइकायट्री डिपार्टमेंट है, वहां पर नशे की बीमारी का इलाज भी उपलब्ध होता है। नशा डिप्रेशन की ओर ले जाता है। नशे में मौजूद केमिकल ब्रेन के एक खास हिस्से को प्रभावित करता है। इससे डिप्रेशन हो सकता है। दरअसल, नशा करने की वजह से जीवन में दूसरी कई समस्याएं भी आ जाती हैं। घर-बार छूटना, नौकरी छूटना, पैसे की परेशानी, पर्सनल लाइफ में किसी और तरह की समस्या होना, नशे के कारण हीन भावना से ग्रस्त होना। इन समस्याओं से डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।

इलाज के दौरान अगर मरीज सिर्फ नशे की लत का शिकार है तो सिर्फ उसी का इलाज किया जाता है। अगर वह नशे और डिप्रेशन, दोनों का शिकार होता है तो दोनों का साथ-साथ इलाज किया जाता है।

लत छोड़ने में होने वाली परेशानियां:

  • जब कोई शराब का आदी इसे छोड़ने की कोशिश करता है तो उसके शरीर में कंपकंपी, पसीना आना, मितली या उल्टी होना, सिर दर्द, नींद की कमी, कमजोरी, गुस्सा आना आदि आम बात है।
  • स्मैक या हेरोइन जैसी नशीली चीजों का मादक पदार्थ सेवन बंद करने से उलटी, शरीर में दर्द, बहती नाक, आंखों में पानी, बहुत ज्यादा पसीना, बदहजमी, दस्त, लगातार उबासी लेना, बुखार, अनिंद्रा, उदास मन जैसी समस्याएं आती हैं।
  • तंबाकू का एडिक्शन छोड़ने वाले व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, चिंता, मुश्किल से किसी काम या बात पर ध्यान दे, भूख लगने में वृद्धि, बेचैनी, मन उदास रहना, अनिंद्रा
  • भांग या गांजा छोड़ने का प्रयास करने वाले व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, घबराहट, चिंता, अनिंद्रा, भूख में कमी, वजन में कमी, बेचैनी, उदास मन, कंपकंपी, सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं।
  • धीरे-धीरे शरीर खुद ढाल लेता है तो ये दिक्कतें दूर होने लगती हैं।

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