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प्रेगनेंसी में नींद ना आने के कारण और समाधान

प्रेगनेंसी में नींद ना आने के कारण और समाधान

नींद मानव जीवन का महत्वपूर्ण पहलू है, जो शरीर को शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करता है। नींद की कमी से अवसाद और चिंता जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है। यदि आप गर्भवती या प्रेगनेंसी के दौर में है, तो नींद की कमी दुखदायक हो सकती है क्योंकि यह पहले से ही थकान और तनाव से गुजरते शरीर और दिमाग की समस्याओं को बढ़ा देती है।

गर्भावस्था(प्रेगनेंसी) के दौरान अच्छी नींद क्यों नहीं आ पाती

गर्भावस्था के दौरान रात में जागना आम है क्योंकि हर तिमाही में शरीर की रासायनिक संरचना (Chemical Composition) में बदलाव होते है और शरीर को इसके अनुकूल होने में कुछ महीने लग जाते है। एक अध्यन में पाया गया है कि 78% महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान, ज्यादा नहीं, तो कम से कम एक स्तर पर सोने में परेशानी होती है।

हालांकि नींद के बारे में एक गलतफहमी यह भी है कि गर्भावस्था के दौरान नींद की गुणवत्ता की अपेक्षा कितनी देर नींद आई इस बात पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं की नींद की गुणवत्ता जानने के लिए आर.ई.एम. होता है। आर.ई.एम. (रैपिड आई मूवमेंट) के एक से अधिक चक्र को पूरा करने के लिए गहरी नींद की उचित गहराई तक पहुँचना मुश्किल बात है। चक्र में कम से कम 1.5 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है,

इसका मतलब यह है कि हो सकता है कि गर्भवती महिला दिन भर में 8 घंटे सोती है, पर नींद की निरंतरता और गहराई सीमित होने के कारण वह कुल मिलाकर 2 घंटे के बराबर ही होती है। गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर और उसकी स्थिति के बारे में ज्यादा सटीकता के बारे में जागरूकता होनी चाहिए।

जब कुछ गलत होता है, तो यह चेतावनी देता है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि जब आप सोने का प्रयास करती है, तब भी आप जागरूक हो सकती है, जिसका अर्थ है कि आप अधिक बार जागती है। गर्भावस्था के दिन बढ़ते जाने के साथ-साथ नींद कम होती जाती है। गर्भावस्था के दौरान नींद ना आना हालांकि ऐसी चुनौती नहीं है, जिसके बारे में आमतौर पर बात की जाती है।

गर्भावस्था में नींद न आने के कारण

हर एक तिमाही में अलग मनोवैज्ञानिक चुनोतियाँ होती है, जो आपकी नींद को प्रभावित करती है। इस कारण से यह महत्वपूर्ण है कि हम गर्भावस्था के दौरान अनिद्रा से निपटने के लिए कदम उठाएं। एक स्वस्थ आर.ई.एम. चक्र की ओर पहला कदम गर्भावस्था के दौरान नींद न आने के कारणों को समझना होता है।

बार-बार पेशाब आना: यह बार-बार होने वाली समस्या है, जो आपकी गर्भावस्था के दौरान अनिद्रा का कारण बन सकती है, यह समस्या पहली तिमाही से शुरू हो जाती है और पूरी गर्भावस्था के दौरान रहती है।

एच.सी.जी. नामक एक हार्मोन जो गर्भावस्था से जुड़ा होता है, पहली तिमाही की अवधि में पेशाब करने की प्रवृत्ति में वृद्धि करता है। गर्भावस्था के दौरान आपकी किडनी रक्त की मात्रा को लगभग दोगुना साफ करती है, जिससे और अधिक पेशाब आता है। तीसरी तिमाही के दौरान, मूत्राशय पर दबाव डालने के लिए भ्रूण काफी बड़ा हो चुका होता है; इस कारण भी पेशाब करने के लिए रात में जागने की आवश्यकता होती है।

पानी की कमी ना होने देने के लिए दिन भर बार-बार पानी पीना और रात में आखिरी बार पानी पीने और सोने के बीच लगभग दो घंटे का समय रखना चाहिए। इसके लिए आप घबराए नहीं यह गर्भावस्था में एक आम समस्या है।

भावनात्मक तनाव: यह गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय हो सकता है और बार-बार भी।

गर्भावस्था के दौरान हार्मोन के असंतुलन से मन की दशा में बदलाव हो सकता है। इसके कारण नींद में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ध्यान, अरोमाथेरेपी और काउंसलिंग जैसी तनाव से राहत देने वाली तकनीकों को अपनी दिनचर्या में जोड़ें। यह भावनात्मक तनाव को नियंत्रण में रखने में मदद करता है।

शारीरिक थकान: यह गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय हो सकता है और बार- बार भी। हार्मोन असंतुलन, जो भ्रूण के विकास के साथ भावनात्मक तनाव का कारण बनते है, माँ के शरीर पर भी तनाव डालते है, जिससे जोड़ों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द, थकान और माइग्रेन होता है। यह कारण नियमित रूप से नींद को बाधित करने के लिए जाने जाते है।

अपने चिकित्सक द्वारा सुझाई गई व्यायाम की दिनचर्या (प्रसव पूर्व योग, थोड़ी सैर) को लागू करके अपने रक्त संचार में सुधार करने का प्रयास करें।

सीने में जलन: आपको गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय छाती में जलन हो सकती है। लेकिन, यह रात में अधिक होती है। गर्भावस्था के हार्मोन उस मांसपेशी को ढीला कर देते है, जो आपके पेट के तरल पदार्थों को पेट में रखती है। आखिरी तिमाही में शिशु का आकार बढ़ने और पेट पर जोर पड़ने के कारण सीने में जलन की समस्या बढ़ जाती है।

आपको स्वस्थ आहार लेना चाहिए, जो खाद्य प्रकारों के सेवन को प्रतिबंधित करते है, उचित समय पर कई बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करें (सोने से 2 घंटे पहले) और अपने सिर को ऊंचा रखने के लिए तकिए का इस्तेमाल करें।

नींद पूरी करने के लिए फॉलो करने वाले टिप्स:

प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने से कमर के बल ज्यादा देर तक ना सोएं। कुछ-कुछ समय में करवटें बदलते रहें। बाएं तरफ करवट लेकर सोने की कोशिश करें। ऐसे सोने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है।

रात में हल्के खाने का सेवन करें। हार्टबर्न की समस्या से बचने के लिए मसालेदार और तली हुई चीजों से दूर रहें।

हेल्दी रहने के लिए रोजाना योग करें। इससे आपके पैर का दर्द और ऐंठन कम होगी।  

दिन में बार-बार कुछ ना कुछ खाते रहें, क्योंकि खाली पेट रहने से जी ज्यादा मिचलाता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को बिस्तर पर दोनों तरफ कुशन का सपोर्ट लेना चाहिए।

सोने से पहले सॉफ्ट म्यूजिक सुनें। इससे मन शांत रहता है और नींद अच्छी आती है।

सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं। ऐसा करने से शरीर रिलेक्स रहता है और नींद अच्छी आती है।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐपडाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है। 

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