पार्किसन रोग (Parkinson Disease) क्या है, कैसे करें इलाज?

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पार्किसन रोग काफी लोगों ने सुना नहीं होगा, जिसके कारण लोग इसके लक्षण पहचान नहीं पाते। जिसकी वजह से इसका इलाज करवाना भी मुश्किल हो जाता है। आइये जानते है पार्किसन रोग (Parkinson Disease) क्या है, इसका इलाज कैसे करें।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) क्या है?

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) एक तरह का मानसिक रोग है, जिसमें इंसान के शरीर में कपकपी, कठोरता, चलने में परेशानी, संतुलन आदि समस्याएँ होती है। पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की शुरूआत सामान्य बीमारी के जैसे ही होती है, जो कुछ समय बाद गंभीर बीमारी में बदल जाती है।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के लक्षण:

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के लक्षण या संकेत अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होते है। अक्सर, ये लक्षण शरीर के एक तरफ ही नजर आते है, जो उस हिस्से को खराब कर सकते है।

इसके बावजूद, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि जिन लोगों के शरीर में ये लक्षण नज़र आते है उन्हें तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपनी सेहत की जाँच करवानी चाहिए क्योंकि यह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के संकेत हो सकते है।

  • कपकपी होना: पार्किसन रोग का मुख्य लक्षण शरीर में कपकपी होना है। इसकी शुरूआत शरीर के छोटे से अंग जैसे उंगली, हाथ आदि से होती है, जो कुछ समय के बाद सारे शरीर में फैल जाती है।
  • कार्य क्षमता कमज़ोर करना: यदि किसी व्यक्ति की कार्य क्षमता अचानक से कम हो जाती है, तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि यह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का लक्षण हो सकता है।
  • मांसपेशियों में अकड़न होना: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का अन्य लक्षण मांसपेशियों में अकड़न होना है। ऐसी स्थिति में मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है ताकि इसे समय तक नियंत्रित किया जा सकें।
  • बात करने में परेशानी होना: यदि किसी इंसान को बात करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उसे तुरंत अपनी सेहत की जाँच करवानी चाहिए क्योंकि यह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का संकेत हो सकता है।
  • लिखने में दिक्कत होना: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का एक अन्य लक्षण लिखने में दिक्कत होना भी है। इस समस्या को किसी भी इंसान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे वह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के मरीज़ बन सकते है।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के कारण:

अभी तक पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। लेकिन वैज्ञानिकों ने अपनी समझ के अनुसार कई परिकल्पना की है।

  • जेनेटिक कारण: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) होने का मुख्य कारण जेनेटिक है। यदि किसी इंसान के परिवार में किसी व्यक्ति को पार्किसन रोग (Parkinson Disease) है, तो उन्हें अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उसे पार्किसन रोग (Parkinson Disease) ना हो।
  • वायरस के संपर्क में आना: अक्सर, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) वायरस के संपर्क में आने की वजह से होता है। हालांकि, इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाई के द्वारा किया जा सकता है, लेकिन फिर भी लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • दिमाग की नस दबना: यदि किसी व्यक्ति के दिमाग की नस दब गई है, तो उसे पार्किसन रोग (Parkinson Disease) होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। ऐसे लोगों को जल्दी से जल्दी अपना इलाज शुरू करवाना चाहिए ताकि उन्हें पार्किसन रोग (Parkinson Disease) होने की संभावना ना रहें।
  • सिर पर चोट लगना: ऐसे लोगों को पार्किसन रोग (Parkinson Disease) हो सकता है जिनके सिर में कभी चोट लगी हो। ऐसे लोगों को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है।
  • वातावरण का कारण होना: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) मुख्य रूप से वातावरण का कारण होता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति प्रदूषण, केमिकल युक्त आदि वातावरण में रहता है तो उसे पार्किसन रोग (Parkinson Disease) जैसी गंभीर बीमारियाँ होने की संभावना रहती है।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की पहचान:

ऐसा माना जाता है कि किसी भी बीमारी की पहचान समय रहते करने पर उससे छुटकारा पाना आसान हो जाता है।
यह बात पार्किसन रोग (Parkinson Disease) पर भी लागू होती है, इसलिए इसकी पहचान लोगों की ज़िदगी को बेहतर बना सकती है। इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को पार्किसन रोग (Parkinson Disease) से पीड़ित होने की शंका है।

  • हेल्थ हिस्ट्री या स्वास्थ इतिहास की जाँच करना: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की पहचान करने का सबसे आसान तरीका हेल्थ हिस्ट्री या स्वास्थ्य इतिहास की जाँच करना है। डॉक्टर इससे इस बात का पता लगाने की कोशिश करते है कि किसी व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण तो नहीं।
  • सी.टी स्कैन करना: अक्सर, डॉक्टर पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की पहचान सी.टी स्कैन के द्वारा करते है। इस टेस्ट में मानव शरीर के अंदर के हिस्से की तस्वीर ली जाती है और इस बात का पता लगाया जाता है कि उसमें पार्किसन रोग (Parkinson Disease) किस हद तक पहुँच गया है।
  • एम.आर.आई करना: सी.टी.स्कैन के अलावा, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की पहचान एम.आर.आई के द्वारा की जाती है। इसमें मस्तिष्क की अंदर के हिस्से की जाँच की जाती है और इस बात का पता लगाया जाता है, कि मस्तिष्क के किस हिस्से में दिक्कत है।
  • डोपामाइन  ट्रांसपोर्टर (डी. ए. टी) करना: वर्तमान समय में, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की पहचान करने में डोपामाइन ट्रांसपोर्टर (डी.ए.टी) नामक टेस्ट काफी लोकप्रिय हो सकता है। हालांकि, यह टेस्ट पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की सटीक पहचान नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद यह डॉक्टर को संकेत दे देता है कि व्यक्ति के मस्तिष्क में कुछ गड़बड़ी है।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का इलाज:

जैसे ही किसी व्यक्ति को इस बात की जानकारी मिल जाती है, कि वह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) से पीड़ित है, तो उसे तुरंत अपना इलाज शुरू करना चाहिए। अत: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) से पीड़ित लोगों का इलाज मुख्य रूप से इन 5 तरीकों से किया जाता है।

  • जीवन-शैली में बदलाव: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) का इलाज करने का सबसे आसान तरीका जीवन-शैली में बदलाव करना है। इसके लिए हेल्थी फूड (Healthy Food), एक्सरसाइज, वजन को बनाए रखना आदि कारगर उपाय साबित हो सकते है।
  • दवाई लेना: जीवन-शैली में बदलाव करने के अलावा पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के इलाज में दवाई लेना भी सहायक हो सकता है। डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाईयाँ मस्तिष्क की बंद नसों को खुलने में सहायता करती है, ताकि पार्किसन रोग (Parkinson Disease) खत्म हो सकें।
  • थेरेपी लेना: दवाई लेने के अलावा, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) को थेरेपी के द्वारा भी ठीक किया जा सकता है। इस तरह की थेरेपी दिमाग की नसों को आराम पहुँचाने और उन तक खून का संचार कराने का काम करती है।
  • एक्सरसाइज करना: अक्सर, डॉक्टर पार्किसन रोग (Parkinson Disease) से पीड़ित लोगों को कुछ एक्सरसाइज करने की सलाह देते है। इन एक्सरसाइज से व्यक्ति को पार्किसन रोग (Parkinson Disease) को ठीक करने में सहायता मिलती है।
  • डीप ब्रेन स्टिमुलेशन: जब पार्किसन रोग (Parkinson Disease) से पीड़ित लोगों को किसी भी तरीके से आराम नहीं मिल पाता, तब डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह देते है। इस स्थिति में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (deep brain stimulation) किया जाता है, जिसमें सर्जन दिमाग के हिस्से में इलेक्ट्रोड्स को लगाया जाता है। इन इलेक्ट्रोड्स को जेनरेटर से जोड़कर मस्तिष्क की नसों को शांत किया जाता है।

पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की रोकथाम:

हालांकि, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) काफी सारे लोगों में देखने को मिलता है, जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति कुछ बातों का पालन करें, तो वह पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की रोकथाम आसानी से कर सकते है।

  • पेस्टिसाइड से दूरी बनाए रखें: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) केमिकल युक्त वातावरण से हो सकता है। इसी कारण, हम सभी को पेस्टिसाइड जैसे केमिकलों से दूर रहना चाहिए ताकि इनका हमारी सेहत पर बुरा असर ना पड़ें।
  • ताज़ी सब्जियों का सेवन करें: हमारे खान-पान का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए हम सभी को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत: पार्किसन रोग (Parkinson Disease) की रोकथाम में ताज़ी सब्ज़ियाँ खाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • ग्रीन टी पीना: अक्सर, डॉक्टर द्वारा पार्किसन (Parkinson) रोगियों को ग्रीन-टी पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें कैफीन काफी कम मात्रा में होती है।
  • एक्सरसाइज करना: यदि कोई व्यक्ति हर रोज एक्सरसाइज करते है, तो उसमें पार्किसन रोग (Parkinson Disease) जैसी बीमारियाँ होने की संभावना कम रहती है।
  • हेल्थचेकअप करना: यह सबसे उपयोगी उपाय है, जिसका हम सभी लोगों को करना चाहिए। हम सभी को समय-समय पर अपना हेल्थचेकअप करवाना चाहिए ताकि हमें इस बात की संतुष्टि रहें कि हम पूरी तरह से सेहतमंद है।

हालांकि, पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के मरीज़ों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है, जिसके कारण लोगों में इस बीमारी को लेकर काफी गलतफहमियाँ पैदा हो गई है। इस कारण, यह जरूरी है कि लोगों को पार्किसन रोग (Parkinson Disease) के बारे में सही जानकारी दी जाए ताकि वह इससे छुटकारा पा सकें।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐपडाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है। 

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