MIGRAINE | क्यों होता है माइग्रेन का अटैक?

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आमतौर पर हमें कभी ना कभी सिरदर्द की शिकायत होती है, किन्तु कई लोगों में यह सिरदर्द लम्बे समय तक बना रहता है। लम्बे समय तक व असहनीय सिरदर्द होना माइग्रेन (Migraine) होने के संकेत हो सकते हैं।

विश्व स्तर पर, World Health Organization के अनुसार, दुनिया में 18 से 65 साल की उम्र के आधे से तीन चौथाई व्यस्कों में पिछले साल सिरदर्द की समस्या देखी गयी। जिनमें से 30% या उससे अधिक में माइग्रेन (Migraine) की समस्या पायी गयी। महिलाओं में माइग्रेन का ख़तरा पुरुषों से दौगुना होता है।

तनाव, भागदौड़, अनियमित दिनचर्या, टेक्नोलॉजी का उपयोग, आनुवांशिक व कई अन्य कारक है जो एक सामान्य सिरदर्द को माइग्रेन (Migraine) में बदल सकते हैं।

माइग्रेन (Migraine) का दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है जो बहुत तेज़ होता है। माइग्रेन में सिर के आधे भाग में दर्द होता हैं। माइग्रेन में सिरदर्द के साथ मन घबराना, उल्टी, तेज़ रौशनी से संवेदनशीलता, हाथ पैरों में झुनझुनी, ब्लाइंड स्पॉट जैसे कई और लक्षण दिखाई देते हैं।

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मेडकॉर्ड्स (MedCords) डॉक्टर के अनुसार माइग्रेन (Migraine) के लिए दर्दनिवारक दवाइयों से कुछ समय के लिए उसके दर्द को कम किया जा सकता है लेकिन इसके बने रहने पर आप एक एक्सपर्ट डॉक्टर से ज़रूर परामर्श लें।

क्या है माइग्रेन (Migraine) के लक्षण:

माइग्रेन (Migraine) अक्सर बचपन, किशोरावस्था या शुरुआती व्यस्कता में शुरू होता है। माइग्रेन चार चरणों में हो सकता है और ये ज़रूरी नहीं की हर प्रभावित व्यक्ति इन चारों चरणों का अनुभव करे। यह 4 चरण हैं:

प्रोड्रोम, ऑरा, तेज़ सिरदर्द (अटैक) और पोस्ट-ड्रोम


प्रोड्रोम: माइग्रेन से एक या दो दिन पहले, आप अपने शरीर में कुछ बदलावों को नोटिस कर सकते हैं। इससे आप आने वाले माइग्रेन अटैक को भांप सकते हैं। ये लक्षण हैं:

  • कब्ज़
  • मूड में बदलाव
  • खाने की इच्छा
  • गर्दन में अकड़न
  • बढ़ी हुई प्यास और पेशाब
  • बार-बार जम्हाई लेना
migraine image

ऑरा

माइग्रेन (Migraine) से पहले या दौरान यह स्थिति आ सकती है। हर माइग्रेन में ऑरा का अनुभव हो, यह आवश्यक नहीं हैं।

ऑरा तंत्रिका तंत्र से जनित लक्षण हैं। इसमें आमतौर पर दिखने में परेशानी होने लगती हैं। साथ ही आँखें चकाचौंध होना या सब हिलता हुआ सा या हेज़ी दिखने लगता है।  

कभी कभी ये आपके बोलने, छूने व गति से सम्बंधित संवेदनाओं को भी प्रभावित करता है।

इनमें से प्रत्येक लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हुए 20-60 मिनट तक रह सकता है। इसके कुछ लक्षण हैं:

  • विभिन्न आकृतियाँ, चमकीले धब्बे या प्रकाश की चमक दिखाई देना
  • दृष्टि खोना
  • हाथ या पैर में सुई चुभने जैसी संवेदनाएं
  • चेहरे या शरीर के एक तरफ की सुन्नता
  • बोलने में कठिनाई
  • शोर सुनाई देना
  • शरीर में झटके या कम्पन

सिरदर्द या अटैक

इलाज ना लेने की स्थिति में माइग्रेन (Migraine) चार से 72 घंटे तक रह सकता है। हर व्यक्ति में इसकी आवृत्ति या फ्रीक्वेंसी अलग होती है। माइग्रेन महीने में कई बार आपको परेशान कर सकता है। निम्नलिखित लक्षण माइग्रेन के दौरान देखे जा सकते हैं:

  • एक तरफ या सिर के दोनों तरफ दर्द
  • धड़कन या स्पंदन के साथ दर्द
  • प्रकाश, ध्वनि और कभी-कभी गंध व स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता
  • मतली और उल्टी
  • धुंधली दृष्टि
  • बेहोशी

पोस्ट-ड्रोम

माइग्रेन (Migraine) अटैक के बाद अंतिम चरण, पोस्ट-ड्रोम के रूप में जाना जाता है। इस अवस्था में आप बहुत थका हुआ महसूस करते हैं। कुछ लोग इस समय उर्जावान भी अनुभव कर सकते हैं। यह असर सब में अलग होता है। पोस्ट-ड्रोम के साथ आप कुछ घंटों के लिए निम्नलिखित लक्षण देख सकते हैं:

  • उलझन
  • मूडी होना
  • सिर चकराना
  • दुर्बलता
  • प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता

सिरदर्द साधारण है या माइग्रेन, यह जाना पाना अक्सर मुश्किल होता है। यदि आप नियमित रूप से माइग्रेन (Migraine) के दर्द के जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो आप इनका रिकॉर्ड रखें और आपने उसका इलाज कैसे किया, ये रिकॉर्ड रखें। फिर किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से इन रिकार्ड्स के आधार पर परामर्श लें। इस तरह से डॉक्टर आपके दर्द के पैटर्न के आधार पर बेहतर तरीके से इलाज़ कर पायेंगें।

यदि आपको निम्नलिखित लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो आप तुरंत चिकित्सक के पास जायें। यह स्थिति गंभीर हो सकती है। यह लक्षण हैं;

  • भयानक सिरदर्द
  • बुखार के साथ सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, मानसिक भ्रम, दौरे, दोहरी दृष्टि, कमजोरी, सुन्नता या बोलने में परेशानी
  • सिर में चोट लगने के बाद सिरदर्द होना, खासकर तब जब सिरदर्द और भी बदतर हो जाए
  • सिरदर्द जो खाँसी, थकावट या तनाव के बाद तेज़ हो जाये
  • 50 से अधिक की उम्र में नया सिरदर्द

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माइग्रेन (Migraine) को शुरूआती स्तर पर पहचानने से हम उसके दुष्परिणामों से बच सकते हैं। साथ ही उसको शुरूआती दौर में काबू कर सकते हैं।

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