malnutrition in india: कुपोषण के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय । malnutrition and its prevention

malnutrition in india / कुपोषण के कारण

malnutrition in india: कुपोषण किसी को भी हो सकता है। अगर आप नियमित रुप से पौष्टिक आहार का सेवन नहीं करते हैं तो आप भी कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। कुपोषण एक गंभीर स्थिति है।  यदि आपको प्रोटीन (protein) कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन (vitamin) और खनिजों सहित पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो आप कुपोषण से पीड़ित हो सकते हैं।

आइए इस लेख में जानते हैं कुपोषण के प्रकार, कुपोषण से होने वाली बीमारियाँ, कुपोषण के कारण और निवारण और कुपोषण का उपचार। (malnutrition causes, malnutrition diseases, malnutrition and undernutrition, malnutrition and its prevention, malnutrition and obesity)

1. कुपोषण के प्रकार malnutrition types in Hindi

  • अल्पपोषण (undernutrition) – अगर आपको पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त नहीं हो रहे है तो उम्र के हिसाब से आपकी ऊंचाई और वजन कम हो जाता है। इसके अलावा ऊंचाई के हिसाब से वजन कम होना अल्पपोषण के लक्षण हैं।
  • अतिपोषण (overnutrition) – अधिक पोषक तत्वों को प्राप्त करने से आपको मोटापा, अधिक वजन और आहार से संबंधित गैर-संचारी रोग (जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह और कैंसर) हो जाते हैं।

2. कुपोषण रोग (Malnutrition in India)

  • कुपोषण के लक्षण – Malnutrition Symptoms in Hindi
  • कुपोषण के कारण और निवारण – Malnutrition Causes & Diagnosis in Hindi
  • कुपोषण से बचाव के उपाय – Prevention of Malnutrition in Hindi
  • कुपोषण का उपचार – Malnutrition Treatment in Hindi
  • कुपोषण से होने वाली बीमारियाँ        

3. कुपोषण क्या है? What is Malnutrition in Hindi? 

यूं तो कुपोषण सभी उम्र के लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है लेकिन गर्भवती महिला और शिशु के आरम्भिक वर्षों में बेहतर पोषण अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है। बच्चे के मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है कि वाटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाले पोषक तत्वों के साथ संतुलित आहार बच्चे और माँ को दिया जाए। 

जब बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व, खनिज और कैलोरी प्राप्त नहीं होते, जो बच्चे के अंगो के विकास में मदद करते हैं तब बच्चे का शारीरिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। कुपोषण के कारण बच्चे के शारीरिक व मानसिकता विकास में रुकावट ही नहीं बल्कि मानसिक विकलांगता, जी.आई. ट्रैक्ट संक्रमण, एनीमिया और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। शोधों के अनुसार कुपोषण न केवल पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है, बल्कि अत्यधिक सेवन के कारण भी समस्या हो सकती है।

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4. कुपोषण के लक्षण – Malnutrition Symptoms in Hindi

  1. वसा की कमी
  2. सांस लेने में दिक्कत
  3. ठण्ड ज़्यादा लगना
  4. चोट ठीक होने में ज़्यादा समय लगना
  5. संक्रमण के ठीक होने में लंबा वक़्त लगना
  6. बिमारी ठीक होने में  लंबा वक़्त लगना
  7. कम सेक्स ड्राइव
  8. प्रजनन क्षमता में समस्याएं
  9. थकान या उदासीनता
  10. चिड़चिड़ापन

5. कुपोषण के कारण और निवारण – Malnutrition Causes & Diagnosis in Hindi

कुपोषण के कारण

फॉलिक एसिड की कमी
विटामिन बी-12 की कमी
लौह तत्वों की कमी
कुछ बीमारी जिसकी वजह से रु धिर कोशिका का विखंडन होता
मलेरिया जैसे संक्रमण का दोबारा शिकार होना
कुछ प्रकार का बोन मैरो रोग
घायल होने या बीमारी के कारण रक्त ह्रास
अल्प आहार से कुपोषण का खतरा
गर्भावस्था के दौरान अपर्याप्त मात्रा में आहार लेना
महिलाओं में अधिक मासिक चक्र का होना

6- कुपोषण का निवारण

कुपोषण के निदान में बीएमआई, नियमित रक्त परीक्षण भी शामिल है।

  1. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) – बॉडी मास इंडेक्स में वजन की गणना किलोग्राम में की जाती है। एक स्वस्थ व्यक्ति का बीएमआई 18.5 और 24.9 के बीच होनी चाहिए। 17 से 18.5 के बीच बीएमआई वाले लोग हल्का कुपोषित हो सकते हैं, जिनके बीएमआई 16 से 18 के बीच होते हैं, वे मध्यम कुपोषित हो सकते हैं और 16 से कम बीएमआई वाले लोग गंभीर रूप से कुपोषित हो सकते हैं।
  2. नियमित रक्त परीक्षण – शरीर में एनीमिया (रक्त की कमी, विटामिन, प्रोटीन और खनिज की कमी का आकलन करने के लिए किया जाता है। शरीर में पानी की कमी, कम रक्त शर्करा और गंभीर संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं, यह रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि के कारण हो सकता है।
  3. बच्चों में कुपोषण का निदान – बच्चों के वजन और ऊंचाई को मापा जाता है। और उन चार्टों से तुलना की जाती है, जो उस उम्र के बच्चे के लिए अपेक्षित औसत ऊंचाई और वजन दिखाते हैं। कुछ बच्चे उम्र के मुकाबले छोटे लगते हैं। और आनुवंशिक रूप से ऐसा हो सकते हैं। धीमे विकास दिखाने वाले बच्चे भी कुपोषित हो सकते हैं।

7. कुपोषण से होने वाली बीमारियाँ

खाद्य और पोषण संबंधी बीमारियाँ– बढ़ते बच्चों को पौष्टिक भोजन की बहुत जरूरत होती है। बच्चों के शरीर में जब प्रोटीन और कैलोरी की कमी होती है (कुपोषण), तो उनमें मेरास्मास और क्वाशियॉरकर जैसी बीमारियाँ होती हैं।

8. मेरास्मास और क्वाशियारकर किसे होता है ? What is kwashiorkor or Marasmus malnutrition

यह 1-5 साल तक की आयु के बच्चे को होता है।

9. मेरास्मास के लक्षण Symptoms of Marasmus malnutrition

यह बीमारी पैर में सूजन के साथ शुरू  होती है और फिर हाथ तथा शरीर फूलने लगता है। त्वचा खुरदरी होती है, सिर पर बाल कम होते हैं और उनका रंग लाल भूरा होता है। यह मेरास्मास के लक्षण हैं। इससे ग्रस्त बच्चे बीमार और थके-थके नजर आते हैं।

10. क्वाशियारकर के लक्षण Symptoms of kwashiorkor malnutrition

इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे कमजोर और दुबले होते हैं। बच्चों को शुरुआती दिनों में डायरिया हो सकता है। उनकी त्वचा रूखी होती है।

11. इन बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को खिलाएं पौष्टिक आहार- 👇 

पौष्टक मिश्रण में उपयोग की जानेवाली पदार्थ-

  • भुना हुआ गेहूं- 40 ग्राम
  • पत्तेदार अनाज- 16 ग्राम
  • भुनी मूंगफली- 10 ग्राम
  • जैगरी- 20 ग्राम

इस मिश्रण को पीस लें और अच्छी तरह मिला लें। इसमें 330 ग्राम कैलोरी और 11.3 ग्राम प्रोटीन होता है।

NOTE: इस मिश्रण को दूध या पानी के साथ खिलायें। कुपोषण से निजात पाने में यह काफी हद तक कारगर है। मेरास्मास या क्वाशियारकर से ग्रस्त बच्चों को इसे खिला कर इसका परीक्षण किया गया है।

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12. कुपोषण के बचाव के उपाय – Prevention of Malnutrition in Hindi

कुपोषण का इलाज करने के लिए डायटिशियन के सुझाव :

  • स्वस्थ रहने के लिए बैलेंस डाइट पर जोर
  • वैसे खाद्य पदार्थ जिनमें अतिरिक्ट न्यूट्रीएंट्स हो
  • ऐसे ड्रिंक का सेवन करें जिनमें काफी मात्रा में कैलोरी हो
  • प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें, विटामिन, ए, बी, सी का भरपूर सेवन करें।
  • दिन में 7 से 8 गिलास पानी जरूर पिएं।

13. कुपोषण से होने वाली बीमारियाँ Disease form malnutrition

  • क्वाशियोरकर
  • सूखा रोग (मरास्मस) 
  • आँखों पर प्रभाव- 
  • रिकेट्स 
  • आस्टोमलेशिया – 
  • टिटेनी – 
  • ओस्टियोपोरोसिस- 
  • बेरी बेरी – 
  • पैलेग्रा – 
  • घेंघा रोग – 
  • बौनापन – 
  • मिक्सोडिमा – 
  • रक्तहीनता- 
  • स्कर्वी-  

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