मलेरिया क्या है? कारण, लक्षण और मलेरिया से बचाव के उपाय

Malaria Causes,Symptoms & Treatment in Hindi

मलेरिया मच्छर के काटने से होने वाली एक गंभीर बीमारी है। आमतौर पर लोग मलेरिया का नाम सुनते ही डर जाते हैं। क्योंकि मलेरिया (Malaria) का समय पर इलाज न मिलने पर ये जानलेवा साबित होती है। मलेरिया का मच्छर यानि ऐनोफलीज़ मच्छर (Anopheles mosquito) के काटने से होता है। Malaria Symptoms,Causes & Treatment

आइए जानते हैं मलेरिया क्या है? कैसे होता है, कितने प्रकार का होता है और इसके क्या-क्या लक्षण और बचाव आदि। Malaria kya h, kaise falta h, malaria ke karan, or malaria sy Bachao k upay.

  1. मलेरिया के लक्षण – Malaria Symptoms in Hindi
  2. मलेरिया के कारण – Malaria Causes in Hindi
  3. मलेरिया से बचाव – Prevention of Malaria in Hindi
  4. मलेरिया का परीक्षण – Diagnosis of Malaria in Hindi
  5. मलेरिया का इलाज – Malaria Treatment in Hindi

मलेरिया क्या है? (What is Malaria)

मलेरिया (Malaria) एक प्रकार का बुखार है जो ठंड या सर्दी लगकर आता है। मलेरिया रोगी को रोजाना या एक दिन छोड़ कर तेज बुखार आता है। भारत में हर साल मलेरिया से लाखों लोग मरते है। ये बिमारी मादा (Female) मच्छर के काटने से होती है। मलेरिया मादा एनोफेलीज मच्छर (Anopheles mosquito) के काटने से शुरू होता है जो इस परजीवी को शरीर में छोड़ता है।

मलेरिया के लक्षण: Malaria Symptoms in Hindi

  • अचानक ठंड लगना
  • सर्दी लगने के बाद गर्मी लगकर तेज बुखार आना
  • पसीना आकर बुखार कम होना व कमजोर महसूस होना
  • सिरदर्द
  • शरीर में दर्द
  • जी मिचलाना
  • उल्टी

मलेरिया रोग कैसे फैलता है? How does malaria spread in hindi

मलेरिया प्लास्मोडियम परजीवी जो कि मादा मच्छर एनोफेलीज़ के काटने से होता है। जब यह किसी व्यक्ति को काटती है, तो उसके खून की नली में मलेरिया के कीटाणु फैल जाते है। ये परजीवी हीमोजॅाइन टॅाक्सिन को मानव शरीर में उत्पादित करता है।

जब ये लिवर (Liver) तक पहुँचते है तब यह काफी संख्या में बढ़ जाते है। जैसे ही लिवर (Liver) की कोशिका फटती है तो कीटाणु वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में पहुँच जाते हैं और वहाँ कीटाणु की संख्या बढ़ जाती हैं।

लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने से यह नष्ट हो जाती है और फट जाती है। तब यह कीटाणु दूसरी लाल रक्त कोशकाओं पर हमला करते हैं और ये सिलसिला इस तरह से चलता रहता है. जब-जब लाल रक्त कोशिका फटती है तब व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण दिखते है।

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मलेरिया के बचाव के तरीके Malaria Treatment in Hindi

  • घर के पास साफ-सफाई रखना
  • कूलर के पानी की सप्ताह में एक बार सफाई करना
  • पुराने बर्तनों में पानी जमा न होने देना4. पूरी बाजू के कपड़े पहनना
  • मच्छरदानी या मॉस्किटो रेप्लीकेंट का उपयोग करना

मानव शरीर में मलेरिया विभिन्न प्रकार की प्लास्मोडियम की प्रजातियों के कारण होता है।

Types of malarial parasites in hindi

1. प्लास्मोडियम फैल्सीपेरम (P. Falciparum):  इस कीटाणु के काटने से खतरनाक मलेरिया बुखार होता है जिससे मरीज की मृत्यु हो सकती है। इसमें पीड़ित रोगों को मालूम नहीं चलता कि वह क्या बोल रहा है। इसमें बहुत तेज़ ठंड लगती है, सिर में काफी दर्द और उल्टियाँ भी होती हैं।

क्या आप जानते हैं कि क्वाडीटियन मलेरिया उत्पन्न करता है जो अधिकांश दिन के समय में आक्रमण करता है।मैलिंग्नेट टर्शियन मलेरिया में 48 घंटों के बाद प्रभाव होता है। इसमें व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

2. प्लास्मोडियम विवैक्स (P. Vivax): अधिकतर लोगों में इस तरह के मलेरिया वाला बुखार देखा जाता है। वाईवैक्स परजीवी दिन के समय आता है। यह बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है जो प्रत्येक तीसरे दिन अर्थात 48 घंटों के बाद प्रभाव देता है। इसके लक्षण कमर, सिर, हाथ, पैरों में दर्द, भूख ना लगना, कंपकपी के साथ तेज बुखार का आना आदि. है।

3. प्लास्मोडियम ओवेल (P. Ovale): यह बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है।

4. प्लास्मोडियम मलेरी (P. malariae): यह क्वार्टन मलेरिया उत्पन्न करता है, जिसमें मरीज को हर चौथे दिन बुखार आता है, मतलब 72 घंटे में सिर्फ एक बार बुखार आता है। जब किसी व्यक्ति को यह रोग होता है तो उसके यूरिन से प्रोटीन जाने लगता है जिसके कारण शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है और सूजन आती है।

5. प्लास्मोडियम नोलेसी ( P. knowlesi): यह आमतौर पर दक्षिणपूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक प्राइमेट मलेरिया है। इसमें ठंड लगकर बुखार आता है, सिर में दर्द, भूख ना लगना आदि जैसे लक्षण दिखते हैं।

मलेरिया से बचाव और रोकथाम के उपाय : Prevention of Malaria in Hindi

  • घरो के अन्‍दर डी. डी .टी. जैसी कीटनाशकों का छिडकाव करवाएं, जिससे मच्‍छरो को खत्म किया जा सकें।
  • घरों में व आसपास गड्डों, नालियों, बेकार पडे खाली डिब्बों, पानी की टंकियों, गमलों, टायर ट्यूब मे पानी इकट़्ठा ना होने दें।
  • आमतौर पर यह मच्‍छर साफ पानी मे जल्‍दी पनपता है। इसलिए सप्‍ताह मे एक बार पानी से भरी टंकियो मटके, कूलर आदि खाली करके सुखाएं।
  • टांके आदि पेयजल स्रोतों मे स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से टेमोफोस नामक दवाई समय समय पर डलवाते रहें।
  • पानी के स्‍थायी स्रोतों मे मछलिया छुडवाने हेतु कार्यकर्ता से संपर्क करें।
  • जहाँ पानी एकत्रित होने से रोका ना जा सकें वहाँ पानी पर मिट्टी का तेल या जला हुआ तेल छिडकें।
  • खिड़कियों, दरवाजों मे जालियाँ लगवा लें। मच्‍छर दानी इस्‍तेमाल करें या मच्‍छर को खत्म करने वाली क्रीम, सरसों का तेल आदि इस्‍तेमाल करें।

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