काली जीभ क्यों होती है, लक्षण और उपचार | Daily Health Tip | Aayu App

kaali jeebh

काली जीभ मुँह से संबंधित एक समस्या है जो कुछ समय के लिए रहती है। यह मुँह की ठीक से सफाई ना होने की वजह से हो सकती है। इसलिए अपने मुँह की सफाई अच्छे से करें।

Black Tongue is a problem related to mouth which lasts for some time. This may occur because mouth cleaning not done properly. Keep your mouth clean.

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काली जीभ मुँह से संबंधित एक समस्या है, जो कुछ ही समय के लिए होती है। इस स्थिति में जीभ काली पड़ जाती है। यह स्थिति मुँह में किसी तरह के बैक्टीरिया या फंगस के संक्रमण से बनती है, जिससे जीभ काली पड़ जाती है।

काली जीभ की स्थिति में शुरुआत में जीभ के पिछले हिस्से का रंग काला पड़ने लग जाता है और फिर धीरे-धीरे जीभ के अगले हिस्से की तरफ आने लगता है। इस स्थिति में जीभ में से काले रंग के धागे की तरह दिखने वाला एक पदार्थ ऊपर की तरफ निकलने लग जाता है। मुँह में से बदबू आना काली जीभ का आम लक्षण है। यह किसी तरह का संक्रमण नहीं होता और ना यह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है।

जीभ का रंग काला होने के कारण का पता आप अपने डॉक्टर या डेंटिस्ट से कर सकते है। इसके लिए आपको कोई टेस्ट नहीं करवाना पड़ता। आमतौर पर इसमें मरीज की स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी ली जाती है और जीभ का परिक्षण किया जाता है। काली जीभ होने से बचाव रखने के लिए मुँह की विशेष रूप से सफाई करना जरूरी है।

काली जीभ का इलाज करने के लिए डॉक्टर मरीज के आहार में कुछ बदलाव करते हैं और धूम्रपान आदि छोड़ने की सलाह देते हैं। इसके अलावा डॉक्टर नरम बालों वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इस ब्रश के द्वारा रोजाना हल्के-हल्के से जीभ साफ करनी चाहिए।

जीभ काली पड़ना क्या है? 

जीभ काली होना ऐसी स्थिति है, जिसमें जीभ का रंग धीरे-धीरे काला पड़ने लग जाता है। जीभ का काला रंग मुँह में बहुत अधिक बैक्टीरिया या यीस्ट आदि होने के परिणामस्वरूप होता है। इस स्थिति में जीभ में पीले या ब्राउन रंग के धब्बे देखे जा सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जो हानिकारक नहीं होती और बिना इलाज की मदद के कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। 

काली जीभ के लक्षण:

जीभ काली होने के साथ-साथ मुँह में बदबू हो जाती है, जो इसका आम लक्षण है। इसके अलावा जीभ का रंग काला पड़ जाने पर मुँह का स्वाद भी बिगड़ जाता है और मुँह में धातु जैसा स्वाद रहता है। कुछ लोगो में जीभ काली होने पर उनको गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होता है।

जीभ काली होने पर दिखने वाले लक्षण: 

  • जीभ का रंग बिगड़ जाना या काला पड़ जाना।
  • ऐसा दिखाई पड़ना जैसे जीभ पर बाल आ गए हैं।
  • स्वाद कलिकाओं (Taste buds) में बदलाव आना। 

जीभ का रंग काला पड़ने पर मुँह का सामान्य स्वाद बदल जाता है। इस स्थिति में सांस छोड़ने के दौरान मुँह से बदबू आती है। इसके अलावा जीभ का रंग काला पड़ जाने पर मरीज को गले में कुछ अटकने जैसा महसूस होने लगता है। जीभ पर पाए जाने वाले छोटे-छोटे दाने जिन्हे पैपेली (Papillae) कहा जाता है, उनका आकार अधिक बढ़ जाने के कारण गुदगुदी भी होने लगती है। 

काली जीभ के कारण:

  • मुंह की ठीक से सफाई ना हो पाना:
    यदि आप नियमित रूप से टूथब्रश व अच्छी तरह से कुल्ला नहीं करते, तो ऐसी स्थिति में मुँह में डेड स्किन सेल्स (Dead skin cells) बनने जमा होने लग जाती हैं।
     
  • अधिक तरल वाले या नरम भोजन खाना:
    यदि आप कठोर भोजन खाते हैं, तो इनसे जीभ पर डेड स्किन सेल्स जमा नहीं हो पाते। जबकि सिर्फ नरम या अधिक तरल वाले भोजन खाने से यह डेड स्किन सेल्स जीभ पर जमा होते रहते हैं।
     
  • दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट:
    कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में मुँह सूखने लग जाता है। ऐसी स्थिति में आसानी से डेड स्किन सेल्स जीभ पर जमा होने लग जाते हैं।
     
  • पर्याप्त लार ना बन पाना:
    मुँह में मौजूद लार की मदद से आप मुँह में जमा डेड स्किन सेल्स को निगल लेते हैं। यदि आप पर्याप्त मात्रा में लार नहीं बना पा रहे हैं, तो डेड स्किन सेल्स आपकी जीभ पर जमा होने लग जाते हैं।
     
  • एंटीबायोटिक दवाएं:
    एंटीबायोटिक दवाएं आपके शरीर में पाए जाने वाले अच्छे व हानिकारक दोनों प्रकार के बैक्टीरिया को मार देती हैं। ऐसी स्थिति में मुँह में मौजूद कुछ बैक्टीरिया का नाजुक संतुलन प्रभावित हो सकता है और कुछ प्रकार के यीस्ट व बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं। 
     
  • तंबाकू:
    यदि आप धूम्रपान करते हैं या तंबाकू चबाते हैं, तो जीभ काली होने का खतरा गंभीर रूप से बढ़ जाता है। तंबाकू आसानी से आपकी जीभ के दानों पर काले रंग के धब्बे छोड़ देती है।
     
  • चाय का कॉफी पीना:
    चाय या कॉफी पीने से जीभ की सतह पर पाए जाने वाले दानों का रंग बिगड़ने लग जाता है, ऐसा खासतौर पर तब होता है जब आप अत्यधिक बार चाय या कॉफी पीते हैं।
     
  • कुछ प्रकार के माउथवॉश:
    कुछ प्रकार के माउथवॉश अधिक शक्तिशाली होते हैं, जिनमें पेरोक्साइड जैसे ऑक्सिडाइजिंग एजेंट होते हैं। यह माउथवॉश मुँह में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित कर देते हैं।
     
  • बिसमथ सबसेलीसिलेट (Bismuth subsalicylate):
    यह एक आम घटक होता है, जो एसिडिटी की कई ओटीसी (डॉक्टर की पर्ची के बिना मिल जाने वाली) दवाओं में पाया जाता है। जब यह मुँह मे मौजूद सल्फर से मिलता है, तो उससे प्रतिक्रिया के रूप में जीभ पर निशान छोड़ देता है। इस स्थिति में जीभ का रंग काला पड़ जाता है। 

काली जीभ होने से बचाव:

जीभ का रंग काला होने से बचाव रखने के लिए मुँह की स्वच्छता रखनी बहुत जरूरी होती है।

  • जीभ को ब्रश करना:
    दांतों को ब्रश करने के दौरान अपनी जीभ को ब्रश के साथ धीरे-धीरे साफ करें, जिससे जीभ पर जमे डेड स्किन सेल्स, बैक्टीरिया व भोजन के टुकड़े साफ करते हैं। जीभ को साफ करने के लिए आपको नरम बालों वाले टूथब्रश या लचीले टंग स्क्रैपर (जीभ को साफ करने वाला) का इस्तेमाल करना चाहिए।
     
  • नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाते रहें:
    आपको नियमित रूप से डेंटिस्ट से अपने दांतों की सफाई व अन्य जाँच करवाते रहनी चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसका समय रहते ही पता लगाया जा सके।
     
  • खाना खाने के बाद ब्रश करना:
    एक दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए और खासकर खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए। ब्रश करने के लिए फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
     
  • फ्लॉसिंग करना:
    अपने दांतों को दिन में कम से कम एक बार धागे से साफ करना चाहिए। अच्छे से फ्लॉसिंग करने से आपके दांतों के बीच में फंसा हुआ मैल साफ हो जाता है।
     
  • अच्छा पोषण बनाए रखें:
    दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और अच्छा व संतुलित आहार खाएं जिनमें पर्याप्त मात्रा में फल व सब्जियाँ शामिल हैं। 

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें.

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