IRREGULAR PERIODS | अनियमित माहवारी से हैं परेशान? जानें इसके बारे में।

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माहवारी सम्बन्धी समस्याएं जैसे अनियमित माहवारी (Irregular Periods) एक बहुत ही आम बात है।

अनियमित माहवारी (Irregular Periods) का अर्थ है की मासिक धर्म के चक्र में बदलाव। सामान्यतया एक मासिक चक्र की अवधि 21 से 35 दिन होती है लेकिन अगर इस अवधि में कोई भी परिवर्तन होता है तो उसे अनियमित माहवारी (Irregular Periods) कहते हैं। यह स्थिति कई वजहों से हो सकती है।

अनियमित माहवारी (Irregular Periods) गर्भनिरोधक विधि में बदलाव, हार्मोन असंतुलन, रजोनिवृत्ति के समय के आसपास हार्मोनल परिवर्तन आदि अनेक कारणों से प्रभावित होती है।

कभी-कभी साल में किसी महीने में माहवारी ना आना या अवधि में परिवर्तन होना सामान्य है लेकिन अगर ये स्थिति ज़्यादा समय या बार-बार हो तो ये चिंता का विषय है। इस स्थिति में महिलाओं को किसी विशेषज्ञ महिला चिकित्सक से परामर्श ज़रूर लेना चाहिए।

अनियमित माहवारी तीन प्रकार की होती है (Types of Irregular Periods):

I) ऐमेनोरिया (Amenorrhea): माहवारी का बंद हो जाना

II) ऑलिगोमेनोरिया (Oligomenorrhea): माहवारी देर से आना या कम आना

III) पॉलिमेनोरिया (Polymenorrhea): माहवारी जल्दी-जल्दी आना

अनियमित माहवारी के कारण (Causes of Irregular Periods):

  1. थाइरॉयड (Thyroid): थाइरॉयड होने पर कई महिलाओं में इसके दुष्प्रभाव के रूप में माहवारी अनियमित हो जाती है।
  2. पी.सी.ओ.एस. (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) PCOS: हॉर्मोन असंतुलन के कारण अंडेदानी या ओवरी में छोटी-छोटी गांठे बन जाने से अंडे ठीक तरह से नहीं बन पाते जिससे अनियमित माहवारी हो जाती है।
  3. तनाव: तनाव होने पर भी माहवारी चक्र में परिवर्तन हो जाता है।  
  4. जीवनशैली में बदलाव: कई बार जीवनशैली में बदलाव जैसे स्थान परिवर्तन, खान-पान में बदलाव व दिनचर्या के अस्त-व्यस्त होने पर भी अनियमित माहवारी की समस्या हो जाती है।
  5. प्रीमच्योर मेनोपौज़ (Premature Menopause): अंडेदानी का काम करना बंद हो जाने पर प्रीमच्योर मेनोपौज़ की स्थिति बनती है जिससे अनियमित माहवारी की समस्या हो जाती है।  
  6. गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स होना (Uterine Fibroids) या अण्डाशय में सिस्ट होना: फाइब्रॉइड्स गर्भाशय में होने वाले ट्यूमर होते है जो कैंसरयुक्त नहीं होते है परन्तु माहवारी पर असर डाल सकते है।

कैसे बचें अनियमित माहवारी से (Prevention from Irregular Periods):

  1. तनाव कम लें
  2. वज़न पर नियंत्रण रखें
  3. जीवनशैली सही रखें
  4. संतुलित आहार लें
  5. योग व व्यायाम ज़रूर करें  

अनियमित माहवारी के प्रभाव (Effects of Irregular Periods)

  1. अंडा ना बनने या देरी से बनने पर प्रेगनेंसी के अवसर कम हो जाते हैं।
  2. प्रेगनेंसी देर से होती है।
  3. तनाव व चिंता बढ़ती है।
  4. पी.सी.ओ.एस. की वजह से इन्सुलिन के कम काम करने से आगे चलकर डायबिटीज़ होने की संभावना बढ़ जाती है।

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अनियमित माहवारी का इलाज़ (Treatment of Irregular Periods)

ये अनियमित माहवारी (Irregular Period) के कारण पर निर्भर करता है। यदि ये अवस्था थाइरॉयड या पी.सी.ओ.एस. के वजह से है तो उसके इलाज के लिए हार्मोनल ट्रीटमेंट दिया जाता है। अगर ये समस्या किसी और वजह से है तो चिकित्सक आपको 3-3 महीने का हार्मोनल ट्रीटमेंट दिया जाता है जिससे माहवारी चक्र को नियमित किया जा सके।

मेडकॉर्ड्स (MedCords) विशेषज्ञ के अनुसार स्थिति के ज़्यादा दिन रहने पर आप किसी महिला विशेषज्ञ से परामर्श लें। अनियमित माहवारी (Irregular Periods) के लिए ज़्यादातर 3 महीने का इलाज दिया जाता है जबकि कई महिलाओं में 6 महीने तक का इलाज देना पड़ सकता हैं।


यदि आपके परिवार के किसी महिला सदस्य को अनियमित माहवारी (Irregular Periods) की समस्या है, तो आज ही हमारे टोल फ्री नंबर +91-781-681-1111 पर कॉल करें और नज़दीकी सेहत साथी के पास जा कर एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लें। याद रहे की लक्षण गंभीर होने पर घरेलु इलाजों पर निर्भर न रहें और जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

डॉ. दिव्या
एम.बी.बी.एस., एम.एस.
प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ


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