सिरदर्द के किस्म, और बचाव के उपाय | Daily Health Tip | 21 July 2020 | AAYU App

protection from headache

तनाव के कारण आपको सिरदर्द हो सकता है। सिरदर्द की वजह से आँखों में परेशानी भी हो सकती है। इसलिए जितना हो सके तनाव कम लें।

Stress may lead to headache which can lead to eye problems so take less stress to live a healthy life.

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सिरदर्द, जो बार-बार आता रहता है, निजी व सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ दर्द, असमर्थता, वित्तीय नुकसान की वजह बनता है। सिरदर्द एक तरह के नहीं होते।

प्राथमिक सिरदर्द (प्राइमरी हैडेक):

किसी अन्य कारण के बगैर हाइपरटेंशन या गर्भाधान के बगैर होने वाले सिरदर्द को प्राथमिक सिरदर्द की श्रेणी में रखा जाता है। वह मानते है कि ऐसा दिमाग में विभिन्न रसायनों की गतिविधियों से होता है, दिमाग की नसें और रक्त नलिकाएं दर्द का संकेत भेजती है।

माइग्रेन:

माइग्रेन में सामान्यत दिमाग का एक भाग प्रभावित होता है। यह दर्द पीड़ित को असहाय बना देता है। दर्द चार घंटे तक और तकरीबन तीन दिन तक कायम रहता है। यह दर्द पीड़ित के हलचल करने पर बढ़ जाता है। माइग्रेन पीड़ित को दर्द चरम स्थिति में होने पर उल्टी का अहसास होता है और किसी को तो उल्टी भी हो सकती है।

माइग्रेन से ग्रसित लोगों को ‘ऑरा’ का अहसास होता है, जिसमें आंखों के सामने चौंधियाने वाली रोशनी, तारों जैसी झिलमिलाहट दिखती है। इसमें किसी के जकड़ने का एहसास होता है। उसके बाद माइग्रेन का दर्द चरम पर पहुंच जाता है। अगर बीमारी कायम रहती है तो माइग्रेन के दर्द का इलाज सुमाट्रिप्टेन या जोल्मिट्रिप्टे जैसे दर्दनिवारकों से किया जाता है।

तनाव वाला सिरदर्द:

सिरदर्द आमतौर पर कई दिनों तक रहता है। तनाव के कारण सिरदर्द पीड़ित को बैचेनी और थकान का अहसास होता है, लेकिन आमतौर पर इसे प्रेशर हैडेक्स भी कहा जाता है। यह गर्दन, पीठ की मांसपेशियों, खोपड़ी में खिंचाव, थकान, गलत मुद्रा में सो जाने की वजह से बढ़ सकता है। आंखों में परेशानी भी सिरदर्द की वजह हो सकती है।

क्लस्टर हैडेक:

सिरदर्द का यह प्रकार बहुत गंभीर होता है। इसे आत्मघाती सिरदर्द (सुसाइडल हैडेक) तक कहा जाता है। इसमें दर्द अधिकांशतय असहनीय होता है। मरीज को एक ही दिन में ऐसे सिरदर्द का 8 बार तक सामना करना पड़ सकता है। यह दर्द दिमाग के केवल एक ओर होता है।

क्लस्टर हैडेक्स लहरों की तरह आता-जाता रहता है और 30 से 60 मिनट तक बना रहता है। इस अवधि में मरीज बैचेन हो जाता है और एक जगह पर ठीक से बैठ तक नहीं पाता।

सेकेंडरी हैडेक:

किसी बीमारी जैसे संक्रमण, मानसिक रोग, हाई ब्लडप्रेशर, सिर में चोट, लकवा (स्ट्रोक) या ट्यूमर के कारण होने वाले सिरदर्द को सैकंडरी हैडेक की श्रेणी में रखा जाता है। मूल बीमारी पर नियंत्रण आमतौर पर सिरदर्द को बड़े पैमाने पर काबू में रखने में मददगार साबित होता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें.

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