बारिश के मौसम में फ़ूड पोइज़निंग से कैसे बचें

what is food poisoning

फूड पॉइजनिंग का प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान है। कच्ची सब्जियां, अधपका मांस, कच्चा दूध या उससे बनी चीजें, अंकुरित अनाज, समुद्री खाद्य पदार्थ आदि खाते है, तो आप फूड पॉइजनिंग की गिरफ्त में आ सकते है। बैक्टीरिया और वायरस फूड पॉइजनिंग के मुख्य कारक है। थोड़ी सावधानी बरतकर आप इससे बच सकते है।

फ़ूड पोइज़निंग में उल्टी आना, जी मिचलाना, सिर दर्द, चक्कर आना, पेट में मरोड़ और दस्त लगने की समस्या हो सकती है। फूड पॉइजनिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खुले में या देर तक रखा खाना आपके पेट को संक्रमित कर सकता है। सामान्य फूड पॉइजनिंग में आमतौर पर तीन दिन में व्यक्ति ठीक हो जाता है। अगर स्थिति गंभीर हो जाए, तो जटिलताएं हो सकती है। अगर आप कच्ची सब्जियां या कम पका हुआ मांस खाते है या कच्चा दूध पीते है या अंकुरित अनाज आदि खाते है, तो फूड पॉइजनिंग की गिरफ्त में आ सकते है।

फ़ूड पोइज़निंग कैसे होती है?

फूड पॉइजनिंग के कई कारण होते है। यह आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के कारण होती है। ये बैक्टीरिया या वायरस कई तरह से हमारे पेट में पहुँच सकते है, जैसे अधपका खाना खाने से या गंदे बर्तनों में पकाया गया खाना खाने से। ऐसे डेयरी उत्पाद, जिन्हें उचित तरीके से फ्रिज में ना रखा गया हो या लंबे समय तक उन्हें फ्रिज से बाहर रखा गया हो, तब भी फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते है। इस मौसम में फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोए बगैर नहीं खाएं, क्योंकि वे भी आपकी सेहत खराब कर सकते है।

फ़ूड पोइज़निंग के लक्षण:

फूड पॉइजनिंग चाहे बैक्टीरिया के कारण हुआ हो या वायरस के कारण, लक्षण आमतौर पर समान होते है। पेट दर्द, जी मिचलाना, दस्त, बुखार और शरीर में दर्द के लक्षण दिख सकते है। इसमें ना सिर्फ पेट मरोड़ के साथ दर्द करता है, बल्कि डायरिया, उल्टी आदि की समस्याएं नजर आने लगती है। अगर आपका खाया खाना लंबे समय तक पच नहीं रहा है, पेट फूला-सा महसूस हो रहा है या लगातार पेट दर्द के साथ उल्टियां हो रही है, तो ये सब पेट के संक्रमण के लक्षण हो सकते है। अगर किसी को सूक्ष्मजीव एंटम्यूबा का संक्रमण हुआ हो, तो पेचिश के कारण हल्के रक्त के साथ पतले दस्त आते है। फूड पॉइजनिंग के अधिकांश मामलों की अवधि 5-7 दिनों की होती है, लेकिन कई बार यह जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। खासकर बुजुर्ग, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं और एचआईवी संक्रमण वाले लोगों को फूड पॉइजनिंग के मामले में लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

गर्मी व बारिश का मिला-जुला मौसम सेहत के लिहाज से बहुत संवेदनशील होता है। फ़ूड पोइज़निंग का खतरा बहुत रहता है।

अपनी सेहत के प्रति पूरी सावधानी रखें। फ़ूड पोइज़निंग का लक्षण यह है कि खाना खाने के 1 से 6 घंटे के अंदर अगर आपको उल्टी आने लग जाए तो आपको फ़ूड पोइज़निंग की शिकायत हो सकती है।

यह बैक्टीरिया युक्त भोजन करने से होता है। इससे बचाव के लिए कोशिश यह होनी चाहिए कि घर में साफ-सफाई से बना हुआ ताजा भोजन ही किया जाए। अगर बाहर का खाना खा रहे है तो ध्यान रखें कि खुले में रखे हुए खाद्य पदार्थों तथा ठंडे और असुरक्षित भोजन का सेवन ना करें।

इन दिनों ब्रेड, पाव आदि में जल्दी फंफूद लग जाती है इसलिए इन्हें खरीदते समय या खाते समय इनकी निर्माण तिथि को जरूर देख लें। घर के किचन में साफ-सफाई रखें। गंदे बर्तनों का उपयोग ना करें। कम एसिड वाला भोजन करें।

फ़ूड पोइज़निंग से बचने के उपाय:

  • गंदे बर्तनों में खाना ना खाएं
  • बांसी और फफूंदयुक्त खाना ना खाएं
  • अधपका भोजन ना खाएं
  • मांसाहार खाना ना खाएं
  • फ्रीज में रखे हुए भोजन ना खाएं

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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