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गर्भपात रोकने के 3 आसान घरेलू उपचार जानें

miscarriage

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि अगर कोई महिला मां बनना चाहती है, लेकिन किसी शारीरिक या अन्य तरह के विकार के कारण माँ नहीं बन पाती। ऐसा कई तरह के विकार के कारण हो सकता है जिसमें से एक विकार गर्भपात है। जिसे हम मिसकैरेज भी कहते है। कई महिलाओं को मिसकैरेज की समस्या हो सकती है। कई बार मिसकैरेज के बाद भी महिलाऐं मिसकैरेज के लक्षणों को लेकर भ्रम में रहती है। हम यहाँ पर आपको बताएंगे गर्भपात के बाद घरेलू उपचार, गर्भपात क्या है?, गर्भपात होने के कारण और गर्भपात होने के लक्षण।

गर्भपात क्या है? Miscarriage Meaning in Hindi

समय से पहले प्रसव का गर्भ से बाहर आ जाना गर्भपात या गर्भस्राव कहलाता है। गर्भ के चार महीने पूरे होने तक शिशु में मांस नहीं होता, इसलिए इस अवधि में होने वाले गर्भपात में पीरियड की तरह योनि से सिर्फ खून निकलता है जिसे आप मिसकैरेज समझ सकते है।

 

गर्भपात के कारण: Miscarriage Causes

गर्भाशय की कमजोरी गर्भपात का कारण बन सकती है। जिसे गर्भाशय ग्रीवा की क्षमता में कमी (Cervical Incompetence) कहा जा सकता है। जिसकी वजह से भ्रूण गर्भ में नहीं रुक पाता। ऐसा देखा गया है कि 80 प्रतिशत गर्भपात 0-13 सप्ताह में हो जाता है। अगर अनुवांशिक अनियमितता है तो मिसकैरेज 0-13 सप्ताह के बीच में हो जाता है। 0-6 सप्ताह में ज्यादा खतरा होता है। इन दिनों में मिसकैरेज होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है जिसमें महिलाओं को यह पता नहीं चलता कि वो प्रेग्नेंट है या उनको मासिक धर्म की अनियमितता है। मिसकैरेज के कुछ अन्य कारण भी है।

  • महिलाओं का इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर यह गर्भपात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इम्यून सिस्टम कम होने की वजह से गर्भवती महिलाएं संक्रमण रोग (Infectious disease) का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण मिसकैरेज हो सकता है। (यह भी पढ़ें: गर्भवती महिला के लक्षण)
  • हार्मोन्स: महिलाओं में कुछ हार्मोन्स जैसे: प्रोजेस्ट्रान, एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स पाए जाते हैं जो गर्भ की रक्षा करते हैं। अगर गर्भधारण करने वाली महिलाओं में यह हॉर्मोन असंतुलित हो जाए तो मिसकैरेज होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए आपको गर्भधारण करने का आसान तरीका पता होना चाहिए।
  • अधिक उम्र: महिलाओं की ज्यादा उम्र होने पर भी गर्भपात का जोखिम होता है क्योंकि अंडाणु की खराब गुणवत्ता का होना गर्भपात का मुख्य कारण होता है। कभी-कभी यह माता-पिता के जीन (Genes) में अनियमितता होने के कारण भी हो सकता है। इस वजह से गर्भाशय में बच्चा अधिक गंभीर हो जाता है और मिसकैरेज हो जाता है।
  • अनुवांशिक अनियमितता: क्रोमोसोम (Chromosomes) का अनियमित होना बार-बार मिसकैरेज होने का कारण होता है।
  • ब्लड-ग्रुप: अगर गर्भवती महिला का ब्लड ग्रुप आर.एच निगेटिव (Rh(-)) है और बच्चे का ब्लड ग्रुप आर.एच पोजिटिव (Rh(+)) है तो गर्भपात की समस्या आ सकती है क्योंकि बच्चे की रक्त कोशिका (Blood Cells) माँ के खून से नहीं मिल पाती जिसके कारण गर्भपात होने की आशंका ज्यादा हो जाती है। कुछ महिलाएं गर्भावस्था में खून की कमी का शिकार हो जाती हैं जिसकी वजह से मिसकैरेज हो जाता है।
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गर्भपात होने के लक्षण: Miscarriage Symptoms

गर्भाशय ग्रीवा (Uterine Cervix) की कमजोरी मिसकैरेज के लक्षण हैं।

इसमें महिला को अचानक गर्भाशय में दबाव महसूस होने लगता है जिसके कारण बच्चेदानी फट जाती है और पानी निकलने लगता है। जिस दौरान भ्रूण दर्द के बिना गर्भ से बाहर निकल जाता है।

गर्भपात रोकने के घरेलू उपचार: Home Remedies to prevent miscarriage

आज हम आपको मिसकैरेज होने से रोकने के घरेलू उपचार बताएंगे लेकिन यह असुरक्षित भी हो सकते है।

हींग का उपयोग करें: प्रेग्नेंसी में महिलाऐं अपने खाने में हींग का इस्तेमाल करें। जिससे महिलाओं में मिसकैरेज की समस्या कम हो जाती है इसलिए शुरुआत के महीनों में महिलाऐं गर्भपात के खतरे से बचने के लिए हींग का इस्तेमाल करें। महिलाओं को मिसकैरेज के खतरे से बचने के लिए हींग को अपने खाने में शामिल करना चाहिए।

अनार का पत्ता मिसकैरेज रोकने में मददगार: अगर अचानक से महिला को रक्तस्राव (खून) बहने लगा है तो अनार के ताजा पत्ते लेकर पानी मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर छान लें। छने हुए पानी या जूस को गर्भवती महिला को पिलाएँ। छने हुए पानी के बाद बचे हुए लेप को पेट के नीचे वाले भाग यानि पेडू पर लगा दे। ऐसा करने से रक्तस्राव या खून बहना रुक जाएगा।

संतुलित मात्रा में विटामिन सी का सेवन करें: प्रेंग्नेंसी के समय महिलाओं को विटामिन सी की ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि यह आयरन की कमी को पूरा करता है और भ्रूण का विकास होने में मदद करता है। शिशु की इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है जैसे: पत्ता गोभी, टमाटर, स्ट्रॉबेरी, संतरा आदि खाएं लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान में रखें कि विटामिन सी का इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में ना करें।

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