एसिडिटी के लक्षण, घरेलू उपाय | Daily Health Tip | 27 July 2020 | AAYU App

protection from acidity

अगर आपको एसिडिटी है तो कम मिर्च मसाले का खाना खाएं।

“Avoid spicy food if you have acidity. “

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एसिडिटी की समस्या लगभग सभी को हो जाती है। यह पाचन तंत्र से संबंधित समस्या है, अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन करने से पेट में पित्त के बढ़ने से एसिडिटी की शिकायत हो जाती है और व्यक्ति को पेट में जलन एवं खट्टी डकारों का सामना करना पड़ता है। हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड, पेपसीन मौजूद होता है जो भोजन के पाचन में अहम भूमिका निभाता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को टुकड़ों में तोड़ता है और बाहरी बैक्टेरिया से रोगों को बचाता है। हमारे पेट की परत इस एसिड के लिए अनुकूलित होती है इसलिए यह पेट को नुकसान नहीं पहुँचाती। एसिडिटी यदि बार-बार होती है तो यह गैस्ट्रो इसोफेगल डिजीज (Gastro Oesophaegal Reflex Disease (GERD) में भी बदल सकती है।

कभी-कभी अनुचित भोजन खाने के कारण यह समस्या हो सकती है परंतु कुछ लोगों में यह समस्या अधिक होने लगती है जिसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए अधिक होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए आप घरेलू नुस्खे आजमा सकते है।

एसिडिटी क्या है?

हाइपरएसिडिटी को अम्लपित्त कहा गया है तथा सामान्य भाषा में इसे पित्त बनना भी कहते है। अधिक मसालेदार,  गर्म एवं तीखे भोजन के सेवन के कारण व्यक्ति को एसिडिटी हो जाता है। व्यक्ति को सीने में जलन और खट्टी डकारें आती है। एसिडिटी में व्यक्ति को सीने में जलन और खट्टी डकारें आती है।

एसिडिटी होने के कारण:

  • अत्यधिक मिर्च-मसालेदार और तैलीय भोजन करना।
  • पहले खाए हुए भोजन के बिना पचे ही पुन: भोजन करना।
  • अधिक अम्ल पदार्थों के सेवन करने पर।
  • पर्याप्त नींद न लेने से भी हाइपर एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
  • बहुत देर तक भूखे रहना।
  • लंबे समय से पेनकिलर जैसी दवाइओं का सेवन करना।
  • गर्भवती महिलाओं में भी एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो जाती है।
  • नमक का अत्यधिक सेवन करना।
  • शराब और कैफीन युक्त पदार्थ का अधिक सेवन।
  • अधिक भोजन करना और भोजन करते ही सो जाना।
  • अधिक धूम्रपान के कारण।
  • कभी-कभी अत्यधिक तनाव लेने के कारण भी भोजन ठीक प्रकार से हजम नहीं होता और एसिडिटी की समस्या हो जाती है।

एसिडिटी के लक्षण:

  • सीने में जलन जो भोजन करने के बाद कुछ घंटो तक लगातार रहें।
  • खट्टी डकारों का आना कई बार डकार के साथ खाना भी गले तक आ जाना।
  • अत्यधिक डकार आना और मुँह का स्वाद कड़वा होना।
  • पेट फूलना।
  • मिचलाहट होना एवं उल्टी आना।
  • गले में घरघराहट होना।
  • साँस लेते समय दुर्गन्ध आना।
  • सिर और पेट में दर्द।
  • बैचेनी होना और हिचकी आना।

एसिडिटी से बचने के उपाय:

आमतौर पर असंतुलित भोजन और जीवनशैली के कारण एसिडिटी की समस्या होती है। इसके लिए अपने जीवनशैली और आहार में कुछ बदलाव लाने पर एसिडिटी की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रण में ला सकते है।

  • टमाटर खट्टा होता है लेकिन इससे शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ती है और इसके नियमित सेवन से एसिडिटी की शिकायत नहीं होती।
  • खाने के बाद नियमित रूप से एक कप अनानास के रस का सेवन करें।
  • तैलीय एवं मिर्च-मसालेदार वाले भोजन से दूर रहें, सादा एवं कम मसाले वाला भोजन करें।
  • पेट भरकर भोजन करने के बाद तुरंत ना सोए। सोने से लगभग दो घंटे पहले भोजन करें।
  • भोजन करने के बाद टहलने की आदत डालें।
  • सुबह उठकर नियमित रूप से 2–3 गिलास ठंडा पानी पिएँ तथा उसके लगभग एक घंटे तक कुछ ना खाएं।
  • जंकफूड, प्रिजरवेटिव युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन बिल्कुल न करें।
  • चाय और कॉफी का सेवन कम से कम करें।
  • अनार और आँवला को छोड़कर अन्य खट्टे फलों से परहेज करना चाहिए।
  • नाश्ते में पपीते के फल का सेवन करें।

एसिडिटी से राहत पाने के घरेलू उपाय:

ठंडा दूध, एसिडिटी कम करने में सहायक:

एसिडिटी होने पर ठंडे दूध में एक मिश्री मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

जीरा और अजवाइन का मिश्रण एसिडिटी में कारगर:

एक चम्मच जीरे और अजवायन को भूनकर पानी में उबाल लें और इसे ठण्डा कर के चीनी मिलाकर पिएँ।

सौंफ एसिडिटी में फायदेमंद:

खाना खाने के बाद सौंफ चबाने से एसिडिटी से राहत मिलती है।

एसिडिटी से लड़ने में सहायक है दालचीनी:

दालचीनी एक नैचुरल एंटी एसिड के रूप में काम करता है और हजम शक्ति को बढ़ाकर अतिरिक्त एसिड बनने से रोकता है।

गुड़ का सेवन पेट की एसिडिटी को करता है कम:

भोजन के बाद या दिन में कभी भी गुड़ का सेवन करें। गुड़ पाचन क्रिया को सुधार कर पाचन तंत्र को अधिक क्षारीय बनाता है और पेट की अम्लता को कम करता है।

केला एसिडिटी के लक्षणों से दिलाये राहत:

एसिडिटी की समस्या होने पर रोज एक केला खाने पर आराम मिलता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें.

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