कूल्हे का फ्रैक्चर और उपचार, हड्डी जोड़ने की नई तकनीक

why fracture happens

आजकल हड्डी टूटने की घटनाएं बहुत हो रही है। किसी भी वजह से हड्डी टूट सकती है। जैसे कि बाइक से गिरना, स्लिप हो जाना या खानपान में गड़बड़ी आदि।

हाथ की कलाई, पैर और कूल्हे में फ्रेक्चर दुपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा दिखता है। इसमें कूल्हे का फ्रैक्चर सबसे खतरनाक होता है। जो ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों के लिए भी एक चुनौती है। एक हैरान कर देने वाली बात यह है कि शहरों में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होती है जबकि गाँवों में प्रोटीन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होती है।

सबसे ज्यादा खतरनाक चोटों में कूल्हे की हड्डी में चोट लगना और रीढ़ की हड्डी में चोट लगना शामिल है। इन चोटों से इंसान का बच पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

कूल्हे का फ्रैक्चर के कारण:

सड़क हादसों में तेज रफ्तार दोपहिया वाहन से गिरने पर चालक के शरीर का पूरा भार हाथ की कलाई या हिप बोन पर आता है। इसके बाद सिर नीचे लगता है, इसलिए हाथ, बाजू या पैर टूटने के अलावा गंभीर चोट कूल्हे की हड्डी या सिर में भी लगती है। हेलमेट से सिर तो बच जाता है, लेकिन हिप बोन (कूल्हे की हड्डी) टूट जाती है।

हिप बोन फ्रेक्चर में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कूल्हे की हड्डी का निचला और पतला हिस्सा बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है, जिसे बैग ऑफ बोन्स के नाम से जाना जाता है। ऐसे मरीज फिर से अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते क्योंकि इसी हिस्से में टांग की हड्डी कूल्हे के साथ जुड़ी होती है।

बचाव और उपचार:

अगर आपका दिनभर बैठने का काम है तो सुबह या शाम घूमने अवश्य जाएं। किसी शारीरिक गतिविधि में शामिल रहें जैसे जॉगिंग, स्विमिंग, योग, बैडमिंटन आदि। खाने की खराब आदतों को छोड़ें। कोल्ड ड्रिंक की जगह दूध पिएं। स्वस्थ व संतुलित डाइट लें, जिसमें विटामिन डी भी है, ताकि कैल्शियम हजम करने में मदद मिल सके। अगर आप अधिक कैल्शियम लेते हैं और पर्याप्त पानी नहीं पीते तो पेशाब में कैल्शियम जमा हो जाता है और पथरी बनने लगती है। दिन में धूप जरूर लें।

अगर आप स्वस्थ हड्डियों के मालिक बनना चाहते हैं तो जरूरी है कि आपके शरीर में पर्याप्त कैल्शियम हो, क्योंकि जब शरीर में पर्याप्त कैल्शियम होता है तो वह चेहरे पर अंदरूनी मजबूती के तौर पर झलकता है।

शरीर में लगातार पर्याप्त कैल्शियम का बनते रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि शरीर त्वचा, नाखूनों, बालों और मल के जरिए रोज कैल्शियम खोता है। खोए हुए कैल्शियम की पूर्ति का ध्यान रखना आवश्यक है। अगर आप इसका ध्यान नहीं रखेंगे तो आपका शरीर आपकी हड्डियों से कैल्शियम लेने लगेगा। परिणामस्वरूप आप बाहर से भले कमजोर ना दिखें, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी हड्डियां खोखली हो जाएंगी और शरीर कमजोर हो जाएगा।

शरीर कैल्शियम को सही हजम कर सके, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी मिलना चाहिए, जो सूरज की रोशनी से हासिल होता है। कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से पहले डॉंक्टर से सलाह अवश्य लें।

हड्डी जोड़ने की नई तकनीक:

मेडिकल साइंस में एक नई तकनीक आई है। जिसे नेल्सकॉन टेक्निक कहते है। इसके जरिए तीन दिन में टूटी हुई हड्डी को जोड़ सकते है। लोग हड्डी टूटने के बाद प्लास्टर का इस्तेमाल करते है। लेकिन नेल्सकॉन टेक्निक के जरिए 2 से 3 दिन में आप सही होने लग जाते है। पहले लोगों को प्लास्टर लगने की वजह से बहुत परेशान होना पड़ता था, जिससे ना वो कई जा पाते थे और ना चल पाते थे।

क्या है नेल्सकॉन तकनीक:

नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंटरलॉकिंग सर्जन ऐसी सर्जरी है, जिसमें हड्डी को जोड़ने के लिए रॉड यानि नेल का इस्तेमाल कर हड्डियों को जोड़ा जाता है। लौंग बोन को ठीक करने के लिए नेल का इस्तेमाल कर सकते है, जिससे लोगों को कम समय में जल्दी रिलीफ मिलता है। लोग कम दर्द में जल्दी ठीक हो जाते है।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है।अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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