Corona Brief news: कोरोना वैक्सीन की पहली डोज हेल्थ वर्कर्स को, सरकार का फ्री प्लाज्मा देने का ऐलान

Health workers will get first dose of corona vaccine

कोरोना वैक्सीन की पहली डोज सबसे पहले हेल्थ वर्कर्स को दी जाएगी। कोरोना की वैक्सीन अगस्त के अंत तक आने की उम्मीद जताई जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन कोविड-19 वैक्सीन के प्रयोग पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं पंजाब सरकार ने कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए फ्री प्लाज्मा देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य में ज़रूरतमंदों को मुफ्त में प्लाज्मा दिया जाएगा।

1.हेल्थ वर्कर्स को मिलेगी कोरोना वैक्सीन की पहली डोज

कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) की पहली डोज सबसे पहले हेल्थ वर्कर्स को देने पर चर्चा चल रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इशारों ही इशारों में कुछ संकेत जरूर दे दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की बातों पर गौर करें तो कोराना वैक्सीन की पहली प्राथमिकता हेल्थ वर्कर्स (Health workers) को मिल सकती है।

Corona Vaccine

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अभी ऐसी कोई लिस्ट तैयार नहीं की जा रही है लेकिन अगर लिस्ट तैयार होती है तो पहले हेल्थ वर्कर्स और दूसरे नंबर पर बुजुर्ग और अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है। वैक्सीन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अपनी नजर बनाए हुए है। 

2. WHO की चेतावनी-युवाओं में भी मौत का खतरा

डब्ल्यूएचओ (WHO) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रॉस अडहॉनम गीब्रीएसुस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा है कि दुनिया को करोना वायरस के साथ ‘जीना सीखना होगा।’

WHO ने चेतावनी दी है कि अगर युवा ये समझ रहे हैं कि उन्हें वायरस से खतरा नहीं तो ऐसा गलत है। युवाओं की न सिर्फ संक्रमण से मौत हो सकती है, बल्कि वे कई कमजोर वर्गों तक इसे फैलाने का काम भी कर रहे हैं। 

WHO के मुताबिक,  कोरोना वायरस (Coronavirus) की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बनने में वक़्त लगेगा। तब तक दुनिया को इसके साथ जीना सीख लेना चाहिए। उनका कहना है कि युवाओं को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने साथ दूसरों की सुरक्षा के भी काम करना चाहिए। 

दूसरी ओर, ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई वैक्सीन कितनी कारगर होगी या नहीं इसके बारे में हमें अगले साल ही पता चलेगा। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पास्कल सोरियो ने कहा है कि ‘इस वायरस का व्यवहार बेहद अप्रत्याशित है. ऐसे में इससे बचने के लिए वैक्सीन की एक डोज़ काफी होगी या नहीं ये अभी कहा नहीं जा सकता।’ कंपनी ने बताया कि ‘हमें उम्मीद है कि वैक्सीन कम से कम 12 महीनों तक प्रभावी रहेगी।

3. पंजाब सरकार का फ्री प्लाज्मा देने का ऐलान, मरीजों को करेंगे ट्रैक

पंजाब सरकार ने कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए फ्री प्लाज्मा देने का ऐलान किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य में ज़रूरतमंदों को मुफ्त में प्लाज्मा दिया जाएगा। प्राइवेट और अन्य कोरोना ट्रीटमेंट फैसिलिटी को राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज से फ्री में प्लाज्मा दिया जाएगा। इ

सके अलावा मरीजों को सही उपचार उपलब्ध करवाने के लिए सरकार ने 22 आईएएस, आईएफएस और पीसीएस अफसरों को कोरोना पेशेंट ट्रैकिंग अधिकारी (सीटीपीओ) के रूप में नियुक्त किया है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्लाज्मा थैरेपी पहले से ही फ्री है। अब कोरोना मरीजों के इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को फ्री में प्लाज्मा दिया जाएगा।

4. रैपिड एंटीजन टेस्ट 20 मिनट-कोरोना की कौन सी जांच कब कराएं:

रैपिड एंटीजन टेस्ट से अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इसकी विश्वसनीयता लगभग 100% है। एंटीबॉडी टेस्ट से कोरोना वायरस की मौजूदगी का सीधा पता नहीं चलता, यह बताता है व्यक्ति को कभी इंफेक्शन हो चुका है। जानिए कोरोना की कौन सी जांच कब कराएं:- 

रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट)

नाक से स्वैब लिया जाता है। वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है। इसका रिज़ल्ट आने में 20 मिनट का समय लगता है। रैपिड एंटीजन टेस्ट की एक्यूरेसी विश्वसनीयता लगभग 100% है। अगर टेस्ट पॉजिटिव है तो, मगर 30-40 % मामलों में यह निगेटिव रह सकता है। उस स्थिति में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जा सकता है।

आरटी- पीसीआर टेस्ट

  • इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मटीरियल है। इसमें नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं।
  • इसका रिज़ल्ट आने में12 से 16 घंटे का समय लगता है।
  • टेस्टिंग की इस पद्धति की विश्वसनीयता लगभग 60% है। कोरोना संक्रमण के बाद भी टेस्ट निगेटिव आ सकता है। मरीज को लक्षणिक रूप से भी देखा जाना जरूरी है।

एंटीबॉडी टेस्ट

  • कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति का शरीर लगभग एक सप्ताह बाद लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। 9वें दिन से 14वें दिन तक एंटीबॉडी बन जाती है।
  • ये टेस्ट खून का सैंपल लेकर किया जाता है और इसका रिज़ल्ट आने में 1 घंटे का समय लगता है।
  • बता दें, कोरोना वायरस की मौजूदगी का सीधा पता नहीं चलता। केवल एंटीबॉडी की उपस्थिति की जानकारी मिलती है। इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति को कभी इंफेक्शन हो चुका है। संक्रमण बहुत हल्का होने पर कभी कभी एंटीबॉडी टेस्ट में नहीं पाई जाएगी।

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