वृद्धावस्था में कलाई और हाथ की चोट है आम, जाने क्या करें

fracture of hands and arms

जब कोई व्यक्ति गिरता है तो बचाव के लिए हम सबसे पहले हाथों को जमीन पर रखते है और शरीर का सारा वज़न हाथ और कलाई के ऊपर आता है तो कलाई और हाथ की चोट काफी देखने को मिलती है। वृद्धावस्था में यह बहुत सामान्य और गंभीर रूप ले लेता है।

हम जानते हैं कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे हमारी हड्डियाँ कमजोर होने लगती है। यह कितनी ज़्यादा कमज़ोर हुई है उस हिसाब से आसटिसोपीनिया या ऑस्टियोपोरोसिस जैसी परेशानी हो सकती है। हल्की-सी चोट लगने से फ्रैक्चर हो जाता है। सबसे ज़्यादा इसका प्रभाव कूल्हे की हड्डी, रीढ़ की हड्डी एवं कलाई की हड्डी में देखने को मिलता है।

कलाई और हाथ की चोट:

कलाई एवं हाथ में विभिन्न प्रकार के फ्रैक्चर हो सकते हैं। कलाई और हाथ की चोट आम है लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि कलाई का जोड़ दो बड़ी एवं आठ छोटी-छोटी हड्डियों से बनता है। इसके आगे उंगलियों के लिए कई जोड़ और हड्डियाँ रहती है। गिरने के कारण हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है।

इसमें सबसे सामान्य है कोलीज फ्रैक्चर। कोलीज फ्रैक्चर ( Colles Fracture)यह एक तरह का फ़्रैक्चर है जो कलाई के जोड़ से लगभग दो सेंटीमीटर ऊपर होता है क्योंकि इस जगह पर हड्डी सबसे ज़्यादा कमज़ोर होती है। फ्रैक्चर होने के बाद ज़्यादातर, हड्डी ऊपर और एक तरफ़ खिसक जाती है और देखने में खाने वाला काटा या डिनर फ़ोर्क तरह की नज़र आती है।

कई बार इस हड्डी के दो से ज़्यादा टुकड़े हो जाते हैं और ज़ोड वाली तरफ़ भी प्रभाव हो जाती है।

ऐसी चोट लगने के बाद आप अपने आस-पास के ऑर्थोपेडिक सर्जन को दिखाकर उसका एक्सरे करवाएं। निदान अथवा डायगनोसिस होने के बाद इसके इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि बेहोश करके भी हड्डी को वापस अपनी जगह पर लाना पड़ें तो उसमें भी नहीं हिचकिचाना चाहिए।

कलाई और हाथ की चोट जब आती है तब यदि हड्डी अपनी जगह से ज़्यादा नहीं खिसकी तो बिना बेहोश किए केवल प्लास्टर लगाकर इसका इलाज किया जा सकता है। लगभग पाँच हफ़्ते तक प्लास्टर लगाने की जरूरत होती है। यदि फ्रैक्चर के बाद हड्डी अपनी जगह से खिसक गई है तो कोशिश यही करे कि जहाँ तक संभव हो , अपनी जगह से हटी हुई टूटी हड्डी को पूरी तरह से वापिस अपने स्थान पर लाए और उसे वहीं रोका जाए।

ऐसा करने के लिए रोगी को अस्पताल में दाख़िल करवाएं और थोड़ी-सी देर के लिए बेहोश करके हड्डी को अपनी जगह सेट करें। हड्डी को अपनी जगह पर रोकने के लिए कई बार दो छोटी-छोटी तारें भी लगा दी जाती है ताकि वह वहाँ से ना हिले। इन तारों को चार या पाँच हफ़्ते के बाद निकाल लिया जाता है इनको निकालने में कोई दिक़्क़त नहीं रहती क्योंकि इनका एक हिस्सा चमड़े के बाहर ही छोड़ दिया जाता है और बिना किसी एनेस्थीसिया के इनको आराम से निकाला जा सकता है। इसके साथ-साथ पाँच हफ़्ते के लिए प्लास्टर लगाते है।

कई बार हड्डी अगर बहुत बुरी तरह से टूटी हो तो उसे पूरी तरह अपनी जगह पर लाना संभव नहीं होता। उसे अच्छी से अच्छी स्थिति में लाने के लिए बेहोश करने के बाद बाहर से एक खांचा या एक्सटर्नल फिकसेटर ( External Fixator) लगाया जाता है जिसे पाँच या छह हफ़्ते के बाद निकाल सकते है कोशिश यही की जाती है कि चीरा ना लगे। ऑपरेशन ना करना पड़े और छोटी विधि द्वारा ही इलाज कर सकें। लेकिन कभी-कभी इसमें प्लेट लगाने की आवश्यकता पड़ जाती है। कलाई और हाथ की चोट के अलावा जानते है इनके कई दूसरे फ्रैक्चर।

कलाई एवं हाथ के अन्य फ्रैक्चर:

इसी प्रकार से हाथ की छोटी हड्डियों के अन्य कई प्रकार के फ्रैक्चर हो सकते हैं और प्लास्टर या उँगलियों को एक दूसरे के साथ स्टरेपिंग करके ठीक किया जा सकता है। कुछ फ्रैक्चर ऐसे होते हैं जिन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। लेकिन ज्यादातर फ्रैक्चर में बिना ऑपरेशन के ही इलाज हो जाता है।

कमजोर हड्डी की सुरक्षा के लिए घरेलू उपाय:

अगर आपकी हड्डियां कमजोर हैं या हड्डियों में आवाज आती है तो आप ऑस्टियोपीनिया ((Osteopenia) बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं. ऑस्टियोपीनिया (Osteopenia) हड्डियों की एक बीमारी है जिसमे हड्डियां कमजोर होने लगती है। उम्र के साथ जोड़ों में या हड्ड़ियों में आवाज आना या दर्द होना आम बात हो सकती है लेकिन कम उम्र में भी कई लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं। अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। यहाँ हम इसके लिए कुछ घरेलू नुस्खों (Home Remedies) के बारे में बता रहे हैं जो आपको इस समस्या से छुटकारा दिला सकते हैं। जोड़ों से कट की आवाज आने के बहुत सारे कारण हो सकते है और आमतौर पर जोड़ों की हड्डियां कमजोर होने पर ही जोड़ों से कट की आवाज आती हैं।

जोड़ों की हड्डियों में गैप आने पर भी कट की आवाज आ सकती है। आइये जानते है इससे बचने के घरेलू नुस्खे।

हड्डियों की समस्या दूर करने के घरेलू नुस्खे:

  • हड्डियां कमजोर हो जाने पर कैल्शियम से भरपूर चीज़ों का सेवन करें। आप दूध को शामिल कर सकते है।
  • मेथी के दानों को भी हड्डियों के लिए फायदेमंद माना जाता है और इसे खाने से हड्डियां मजबूत रहती हैं। अगर आपको भी यह समस्या है तो आप मैथी का सेवन कर सकते हैं।
  • हड्डियों के लिए पनीर का सेवन भी लाभदायक हो सकता है। पनीर खाने से हड्डियां मजबूत रहती हैं। कच्चा पनीर खाने से जोड़ों की समस्या को दूर किया जा सकता है।
  • बादाम भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत है। बादाम में उच्च कैल्शियम पाया जाता है। इसके अलावा प्रोटीन की मात्रा भी इसमें काफी होती है।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है।अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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