FOOD POISONING | कैसे रहें फ़ूड पोइज़निंग (खाद्य विषाक्तता) से सतर्क

फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) एक खाद्य जनित (खाने से होने वाली) बीमारी है। भोजन में एक विष, रासायनिक या संक्रामक एजेंट (जैसे एक जीवाणु, वायरस, परजीवी, या प्रियन) के होने पर फ़ूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के लक्षण दिखाई देते हैं। वे लक्षण केवल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट से संबंधित हो सकते हैं जिससे उल्टी या दस्त हो सकता है या वे अन्य अंगों जैसे कि किडनी, मस्तिष्क या मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकते हैं

आमतौर पर अधिकांश खाद्य जनित बीमारियाँ उल्टी और दस्त का कारण बनती हैं, जो कम समय तक रहती हैं और अपने आप ही सुलझ जाती हैं, लेकिन निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट असामान्यताएं ज़्यादा दिखाई देने लगती हैं।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) का अनुमान है कि प्रत्येक वर्ष लगभग 48 मिलियन लोग भोजन से संबंधित बीमारियों से बीमार हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप 128,000 अस्पताल और 3,000 मौतें होती हैं।

फूड पॉइजनिंग के लक्षण (Symptoms of Food Poisoning)

फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के लक्षण सामान्य से गंभीर तक हो सकते हैं और कीटाणु के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। खाद्य विषाक्तता या फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के सबसे आम लक्षण हैं:

  • पेट की ख़राबी
  • पेट में ऐंठन
  • जी मिचलाना
  • उल्टी
  • दस्त
  • बुखार

जब आप दूषित भोजन या पेय का सेवन करते हैं, तो फूड पॉइजनिंग (Food Poisioning) के लक्षण विकसित होने में आपको घंटों या दिन लग सकते हैं। यदि आप फूड पॉइजनिंग (Food Poisioning) के लक्षणों का अनुभव करते हैं, जैसे कि दस्त या उल्टी तो निर्जलीकरण को रोकने के लिए बहुत सारे तरल पदार्थ का सेवन करें।

यदि आपके लक्षण गंभीर हैं तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • मल में खून आना
  • उच्च बुखार (102 ° F से अधिक तापमान)
  • बार-बार उल्टी होना (जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है)
  • पेशाब में कमी
  • बहुत शुष्क मुंह
  • गले में जलन
  • खड़े होने पर चक्कर आना
  • निर्जलीकरण
  • दस्त 3 दिनों से अधिक रहना
  •  

फ़ूड पोइज़निंग के कारण (Causes of Food Poisoning)

हर साल लाखों लोग दूषित भोजन से बीमार हो जाते हैं। फूड पॉइजनिंग के लक्षणों में पेट में गड़बड़ी, पेट में ऐंठन, मतली और उल्टी, दस्त, बुखार और निर्जलीकरण शामिल हैं। लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। फूड पॉइजनिंग या खाद्य विषाक्तता कई कारणों से हो सकती हैं जिनमें शामिल हैं:

बैक्टीरिया और वायरस (Bacteria & Virus)

बैक्टीरिया और वायरस खाद्य विषाक्तता का सबसे आम कारण हैं। फूड पॉइजनिंग के लक्षण और गंभीरता अलग-अलग होती है, जिसके आधार पर बैक्टीरिया या वायरस भोजन को दूषित करते हैं।

परजीवी (Parasites)

परजीवी वे जीव होते हैं, जो मेजबान के रूप में ज्ञात अन्य जीवित जीवों से पोषण और संरक्षण प्राप्त करते हैं। सबसे आम खाद्य जनित परजीवी प्रोटोजोआ, राउंडवॉर्म और टेपवर्म हैं।

मोल्ड, टॉक्सिन, और दूषित पदार्थ (Mold, Toxin and Contaminants)

अधिकांश खाद्य विषाक्तता भोजन में विषाक्त पदार्थों के बजाय बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी के कारण होती है। लेकिन, खाद्य विषाक्तता के कुछ मामलों को प्राकृतिक विषाक्त पदार्थों या रासायनिक विषाक्त पदार्थों से जोड़ा जा सकता है।

एलर्जी

खाद्य एलर्जी आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) द्वारा ट्रिगर किए गए भोजन की असामान्य प्रतिक्रिया है। कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे कि नट्स, दूध, अंडे या समुद्री भोजन, खाद्य एलर्जी वाले लोगों में एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

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फ़ूड पोइज़निंग का इलाज (Treatment of Food Poisoning)

फूड पॉइजनिंग का इलाज करते समय सबसे ज़रूरी है हाइड्रेशन बनाए रखना। यदि स्थिति गंभीर हो तो मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करवाना उचित होता है क्यूंकि ऐसे में शरीर में तरल पदार्थ या इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन हो जाता हैं। ऐसे में मतली और उल्टी को नियंत्रित करने के लिए मरीज़ को दवाएं दी जाती हैं।

संक्रामक रोग विशेषज्ञों के परामर्श से कुछ प्रकार के खाद्य विषाक्तता की जटिलताओं का अच्छा इलाज किया जा सकता है।

फ़ूड पोइज़निंग के घरेलु उपचार (Home Remedies for Food Poisoning)

घरेलु इलाज में व्यक्ति को हाइड्रेटेड रखना अतिआवश्यक है। इसके लिए मरीज़ को बहुत अधिक पानी व संतुलित इलेक्ट्रोलाइट देना महत्वपूर्ण है। अधिक दस्त और उल्टी के कारण शरीर पानी की मात्रा खो देता है इसलिए उन्हें  प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता होती है।

इसके लिए उन्हें नमक-शक्कर का घोल, ओआरएस घोल, नारियल पानी, पतले जूस आदि दिए जाने चाहिए। फ़ूड पोइज़निंग के मुख्या लक्षण जैसे निर्जलीकरण, पेशाब में कमी, चक्कर आना आदि दिखाई दें तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ क्यूंकि फ़ूड पोइज़निंग जानलेवा भी साबित हो सकती है।

गंभीर स्थिति में मरीज़ को आईवी के ज़रिये ड्रिप लगा कर उनके शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जाता है।

फ़ूड पोइज़निंग की रोकथाम (Prevention from Food Poisoning)

खाद्य विषाक्तता को कैसे रोका जा सकता है?

  • भोजन तैयार करने के तरीकों से ही घर पर खाद्य-जनित बीमारी की रोकथाम शुरू हो जाती है।
  • खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह से पकाया जाना चाहिए।
  • बचे हुए खाने को तुरंत रेफ्रिजरेट किया जाना चाहिए ताकि बैक्टीरिया और वायरस को बढ़ने का समय न मिले।
  • खाने से पहले फलों और सब्जियों को अच्छे से धोएं। यह गंदगी, कीटनाशक, रसायन, या अन्य संक्रामक एजेंटों को हटा देता है, या खेतों में खाद्य पदार्थों या भंडारण के समय उनसे संक्रमित हो सकते हैं।
  • संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भोजन को खाने व बनाने से पहले और बाद में नियमित रूप से हाथ धोएं।
  • खाद्य पदार्थों को साफ करने, तैयार करने और इकट्ठा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले काउंटर और अन्य क्षेत्र को साफ़ रखें। उदाहरण के लिए, कच्चे चिकन को काटने के लिए उपयोग किए जाने वाले कटिंग बोर्ड और चाकू को साल्मोनेला के प्रसार को रोकने के लिए फल और सब्जियों को काटने से पहले अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए।
  • रेस्तरां में, भोजन दूसरों द्वारा तैयार किया जाता है। स्वास्थ्य निरीक्षक नियमित रूप से रेस्तरां की जांच करते हैं और सैनिटरी प्रथाओं पर उनकी रिपोर्ट आमतौर पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। सुनिश्चित करें कि जो खाना ऑर्डर किया गया है वह अच्छी तरह से पकाया गया है।
  • गर्भवती महिलाओं और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो, जैसे कि कीमोथेरेपी से गुजरने वाले या जो प्रेडनिसोन जैसी दवा ले रहे हैं, उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुनिश्चित करें कि खाने से पहले सभी फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से साफ किया जाए।

मेडकॉर्ड्स (MedCords) डॉक्टर के अनुसार फ़ूड पोइज़निंग (Food Poisoning) या खाद्य विषाक्तता को हल्के में नहीं लेना चाहिए व लक्षण दिखने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर कई बार अस्पताल में भर्ती होने की  सलाह देते हैं।

यदि आप में या आपके परिवार के किसी सदस्य में फ़ूड पोइज़निंग (Food Poisoning) के लक्षण दिख रहे हैं, तो आज ही हमारे टोल फ्री नंबर +91-781-681-1111 पर कॉल करें और नज़दीकी सेहत साथी के पास जा कर एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लें। याद रहे की लक्षण गंभीर होने पर घरेलु इलाजों पर निर्भर न रहें और जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

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