फाइलेरिया क्या है ? Filaria का निदान और उपचार | filariasis symptoms and treatment

Filaria या हाथी पांव से कैसे बचें? filariasis symptoms and treatment

फाइलेरिया (Filaria) एक गंभीर बीमारी है। यह जान तो नहीं लेती है, लेकिन जिंदा आदमी को मृत के समान बना देती है। इस बीमारी को हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। अगर समय पर फाइलेरिया (Filaria) की पहचान कर ली जाए तो जल्द इलाज शुरू किया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 65 करोड़ भारतीयों पर फाइलेरिया (Filaria)रोग का खतरा मंडरा रहा है। 21 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के 256 जिले फाइलेरिया से प्रभावित हैं।

फाइलेरिया (Filaria) दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बना रही है। दुनिया के 52 देशों में करीब 85.6 करोड़ लोग फाइलेरिया के खतरे की जद में हैं। लिंफेटिक फाइलेरियासिस (Lymphatic Filariasis) को ही आम बोलचाल की भाषा में फाइलेरिया (Filaria) कहा जाता है। filariasis symptoms and treatment-

. कारण

फाइलेरिया (हाथी पांव) के क्या कारण हो सकते हैं? Causes of Filaria in Hindi.

फाइलेरिया बीमारी मुख्य रुप से फाइलेरिया संक्रमण मच्छरों के काटने से होती है। ये मच्छर फ्युलेक्स और मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं। ये मच्छर एक धागे के समान परजीवी को छोड़ता है। ये परजीवी हमारे शरीर में प्रवेश करके हाथी पांव की बीमारी का कारण बन सकते हैं।

इसके अलावा एक अकेली वयस्क मादा फाइलेरिया परजीवी नर कृमि से जुड़ने के बाद, लाखों सूक्ष्म फाइलेरिया भ्रूणों की पीढ़ियों को जन्म दे सकती है, जो शरीर में प्रवेश कर खून को प्रभावित करते हैं। इनकी यह प्रक्रिया बीमार व्यक्ति के खून की नसों में होता है।

  • इसके अलावा यह रोग इससे बीमार व्यक्ति के संपर्क आने में किसी अन्य व्यक्ति में भी फैल सकता है, जैसेः
  • बीमार व्यक्ति का खून किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में चढ़ाना
  • बीमार व्यक्ति का जूठा खाना या पानी पीना
  • बीमार व्यक्ति को किस करना (मुंह में बनने वाले लार्वा से इसके फैलने की संभवना हो सकती है)

फाइलेरिया के लक्षण Symptoms of Filaria in Hindi.

आमतौर पर फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं।

चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। वैसे तो फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन कई सालों तक इसके लक्षण नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

फाइलेरिया से बचाव Treatment of Filaria in Hindi.

  • फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए अपने घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
  • समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रहें।
  • सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें
  • हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें।

अस्वीकरण- सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए अभी डाउनलोड करें ‘आयु ऐप और घर बैठे डॉक्टर से परामर्श लें।

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