exercise after c section: सिजेरियन डिलीवरी के बाद व्यायाम करने के 5 फायदे

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जब स्पर्म (Male Sperm) शारीरिक संबंध के बाद महिला के शरीर में जाकर उनके अंडे से मिलता है, तो महिला गर्भधारण कर सकती है। यह फर्टिलाइज अंडा गर्भ की परत से जुड़ जाता है और एक शिशु के रूप में बढ़ने लगता है। गर्भावस्था का सबसे सामान्य संकेत पीरियड्स ना आना है। लेकिन कई बार नार्मल डिलीवरी नहीं हो पाती और ऑपरेशन करना पड़ता है इसलिए आपको सिजेरियन डिलीवरी के बाद व्यायाम (Exercise after c section) के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

गर्भावस्था को पूरा होने में लगभग चालीस हफ्तों का समय लगता है। यह पूरी प्रक्रिया तीन भागों में पूरी होती है, जिन्हें तिमाही कहा जाता है। तीन महीने मिलकर एक तिमाही बनाते हैं और तीन तिमाही नौ माह बनाते है।

आमतौर पर शिशु को योनि से बाहर निकाला जाता है। यह शिशु को जन्म देने की प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह माता और शिशु दोनों के लिए अच्छी होती है। लेकिन कई बार ऑपरेशन करना पड़ता है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग: Exercise after c section in Hindi:

माँ बनने के बाद महिलाओं के शरीर की शेप काफी बदल जाती है और उन्‍हें फिट और स्लिम बॉडी पाने के लिए एक्सरसाइज करनी चाहिए। सी-सेक्‍शन के बाद आप योग तो कर सकती हैं लेकिन कब करें, यह पूरी तरह से आपकी रिकवरी पर निर्भर करता है।

ऑपरेशन के कितने दिन बाद योग करना चाहिए: When to do Exercise after c section:

सामान्‍य तौर पर महिलाऐं डिलीवरी के 6 से 8 हफ्ते बाद योग कर सकती हैं लेकिन सी-सेक्‍शन में डॉक्‍टर से सलाह लेने के बाद ही एक्‍सरसाइज की शुरुआत करनी चाहिए। डॉक्‍टर आपकी शारीरिक स्थिति और मांसपेशियों में लचीलेपन की जाँच करते है और उसके बाद ही आपको एक्‍सरसाइज (Exercise after c section) शुरू करने की सलाह देते है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग के फायदे: Benefits of Exercise after c section in Hindi:

  • सी-सेक्‍शन के बाद योग (Exercise After c section) करने से मांसपेशियां टोन (Muscle Tone) होती हैं और उन्‍हें मजबूती मिलती है। इससे रिकवरी में भी तेजी आती है।
  • योग से लिगामेंट और ढीली पड़ी मांसपेशियाँ ठीक होती हैं।
  • इसकी मदद से मन और मस्तिष्‍क को आराम एवं शांति मिलती है जो माँ बनने के बाद बहुत जरूरी है।
  • किसी भी तनावपूर्ण स्थिति को शांति से सुलझाने में मदद मिलती है।
  • योग से शारीरिक अंगों को मजबूती मिलती है और मानसिक तनाव कम होता है।

अब हम आपको बता चुके हैं सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग (Exercise after c section) करने के क्या-क्या फायदे है। अब आपको यह जानना भी जरूरी है कि आखिर ऐसे कौन-कौन से व्यायाम है जो आपको सिजेरियन डिलीवरी में करनी चाहिए।

सी सेक्शन के लिए व्यायाम: Exercise for c section:

  • पेट के लिए पेल्विक हिस्‍से के लिए कंधरासन और पेट की मांसपेशियों को मजबूती देने के लिए भुजंगासन करें।
  • कमर के निचले हिस्‍से को मजबूती देने, पेट की मांसपेशियों को टोन करने और पोस्‍चर में सुधार लाने के लिए ऊर्ध्‍व प्रसारिता पादासन करना चाहिए।
  • कमर और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाने, जांघों और पिंडलियों की बाहरी मांसपेशियों को स्‍ट्रेच करने एवं उन्‍हें मजबूती देने के लिए अधो मुख शवासन करें।
  • पेट की चर्बी घटाने के लिए भुजंगासन करें।

जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुके है सिजेरियन डिलीवरी के बाद योग (Exercise after c section) करने के फायदे लेकिन आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर सिजेरियन डिलीवरी करने की जरूरत क्या है?

सिजेरियन ऑपरेशन क्या होता है?

दरअसल, अधिकतर डिलीवरी योनि द्वारा होती हैं, लेकिन कई बार कुछ जटिलताओं या खतरों के चलते सिजेरियन डिलीवरी (c section) की जाती है। कभी-कभी इसी तरीके से माता व शिशु का जीवन बचा सकते है। (यह भी पढ़ें: गर्भपात से बचने के घरेलू उपाय)

सी-सेक्शन की योजना तब बनाई जाती है जब सामान्य वजाइनल डिलीवरी में कोई समस्या होती है। ऐसे कई कारण होते हैं, जिनकी वजह से सी सेक्शन डिलीवरी की जाती है जिसमें माता की इच्छा भी शामिल होती है। कई बार कुछ महिलाऐं कोई समस्या नहीं होने पर भी कुछ महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी करवाती हैं।

ऑपरेशन क्यों करते है यह आप सोच रहे होंगे। तो आइये आपको कुछ ऐसे कारण बताते है जब आपको सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दी जाती है।

ऑपरेशन क्यों करते है

  • यदि आपकी श्रोणि में कोई समस्या है, जिसकी वजह से बर्थ कैनाल से शिशु को जन्म देना मुश्किल हो जाता है। श्रोणि (Pelvis) एक हड्डी का ढांचा जो कि पेट के पास होता है जिसमें कूल्हे की हड्डी होती है, यह कमर के निचले भाग और पैरों को जोड़ती है।
  • शिशु के सिर का आकार बर्थ कैनाल से बड़ा है और उसमें से निकल नहीं सकता।
  • लेबर में ज्यादा दर्द नहीं हो पा रहा जिस वजह से मांसपेशियां सिकुड़ नहीं पाती और गर्भाशय ग्रीवा (गर्भाशय का निचला हिस्सा) खुल नहीं पाती जिस वजह से शिशु बर्थ कैनाल से बाहर नहीं आ पाता। इस वजह से सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है।
  • यदि शिशु के हृदय की दर असामान्य है या किसी अन्य मेडिकल स्थिति के कारण सामान्य डिलीवरी नहीं हो पाती तो शिशु को सिजेरियन डिलीवरी (Exercise after c section) द्वारा निकाला जाता है और उसका ट्रीटमेंट किया जाता है।
  • यदि आपको लंबे समय से किसी तरह का रोग है जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह (डायबिटीज) आदि।
  • आमतौर पर शिशु को जब निकाला जाता है तो पहले उसका सिर बर्थ कैनाल से बाहर आता है। हालांकि, कुछ मामलों में शिशु के पैर पहले बाहर आते दिखाई देते हैं जिस स्थिति को ब्रीच कहा जाता है, ऐसी स्थिति में सी सेक्शन डिलीवरी की जाती है।
  • यदि आपकी गर्भावस्था में खतरे के लक्षण दिख रहे है।
  • यदि आपको गर्भनाल से जुड़ी समस्या है जैसे प्लेसेंटा प्रिविया (प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होना) जिसमें गर्भनाल अपने स्थान से हिलकर गर्भाशय के नीचे पहुँच जाती है, यह शिशु के बाहर निकलने के रास्ते को अवरुद्ध कर सकती है, जिससे योनि से रक्तस्राव हो सकता है।

डिस्क्लेमर:

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