Sanatizer: सैनिटाइजर का ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक

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  • सैनिटाइजर की तुलना में साबुन से हाथ धोना ज्यादा बेहतर माना जाता है, अगर आपके पास हाथ धोने का विकल्प है तो सैनिटाइज़र का इस्तेमाल ना करें।
  • अगर आप सैनिटाइजर का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो यह शरीर में मौजूद पानी को खींच लेता है, जिससे स्किन ड्राई होती है।

सैनिटाइजर, कोरोना से पहले तक हम तब ही इस्तेमाल करते थे, जब हॉस्पिटल में किसी मरीज की देखभाल किया करते थे। कोविड के दौर में लोग सैनिटाइजर को साबुन से ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। लेकिन, माइक्रो बैक्टीरियल एक्सपर्ट्स इस चीज को मना करते है। पुणे में आईसीएमआर के नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में माइक्रो बॉयोलॉजी के एक्सपर्ट ने कहा हैं कि सैनिटाइजर की तुलना में साबुन से हाथ धोना ज्यादा बेहतर है।

सैनिटाइजर के बारे में वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है:

सैनिटाइजर का क्या काम है?

सैनिटाइजर का काम किसी सतह को स्टेरलाइज्ड करना है। सैनिटाइजर किसी भी सतह को वायरस, बैक्टीरिया, फंगस जैसी चीजों से फ्री करता है। यह डीएन, आरएन जैसी बारीक चीजें साफ हो जाती हैं।

कितने प्रकार के सैनिटाइजर बाजार में बिक रहे है?

बाजार में दो तरह के सैनिटाइजर मौजूद हैं। एक अल्कोहल बेस्ड और एक एंटी बैक्टीरियल। अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर कोविड में ज्यादा कारगर हैं। अगर सैनिटाइजर में अल्कोहल 70% से ज्यादा है तो वह अच्छा है। जिस सैनिटाइजर में 95% से ज्यादा अल्कोहल होता है वह सबसे अच्छा माना जाता है।

  • अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर:

इसमें 60 से 95% तक अल्कोहल मिला होता है, जो कि एथेनॉल, प्रोपेनॉल और आइसो प्रोपेनॉल से मिलकर बना होता है। यह कीटाणुओं से सुरक्षा देता है। इसका इस्तेमाल मेडिकल डिसइंफेक्टमेंट में किया जाता है।

  • अल्कोहल फ्री सैनिटाइजर:

इसमें एंटीसेप्टिक मिला होता है, जो एंटी एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स या बेंजाकोनियम क्लोराइड होते हैं। यह कीटाणुओं को पूरी तरह से खत्म कर देते है, इसमें गुल मेंहदी मिली होता है, जो हमारे हाथ को सॉफ्ट बनाते हैं, जिससे अच्छी खुशबू आती है।

सैनिटाइजर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है:

यदि पेट में कोई बीमारी होती है तो हम एंटीबॉयोटिक खाते हैं, घाव होता है तो एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करते हैं। जब हम किसी सतह से निर्जीव या डेड सेल्स या बैक्टीरिया-वायरस को हटाना चाहते हैं तो डिसइन्फेक्ट का इस्तेमाल करते हैं, इसमें सैनिटाइजर, लाइजोल जैसी चीजें कारगर होती हैं।का

दिन में कितनी बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए:

  • अगर आपके पास हाथ धोने का विकल्प नहीं है तो कुछ खाने से पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते है। बस, ट्रेन या किसी सार्वजनिक वाहन में यात्रा करते समय सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
  • घर में साबुन से हाथ धोएं। बॉडी पर सैनिटाइजर का स्प्रे तब करें, जब आप बाहर से घर में प्रवेश कर रहे हों, इस दौरान स्प्रे से कपड़ो पर लगे बैक्टीरिया मर जाएंगे।

सैनिटाइजर को खरीदने से पहले हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • सैनिटाइजर का सीमित इस्तेमाल ही करें, ज्यादा इस्तेमाल करने से बॉडी के सेल्स का वाटर कंटेंट मर जाता है।
  • सैनिटाइजर स्किन को ड्राई कर सकता है। इसलिए अल्कोहल में कभी-कभी ग्लिसरीन मिलाया जाता है, जिससे स्किन ना सूखे।
  • लॉन्ग टर्म में यह सेल्स के फंक्शंस को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन कोविड के दौर में इसका इस्तेमाल बेहतर है।

सैनिटाइजर का असर कितनी देर तक रहता है?

  • सैनिटाइजर को हाथ या सतह में लगाने के साथ वहाँ मौजूद बैक्टीरिया और वायरस मर जाते हैं। लेकिन सैनिटाइजर का असर तीन से चार मिनट तक रहता है। इसके बाद इसमें मौजूद अल्कोहल उड़ जाता है।
  • इसलिए सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बाद जैसे ही आपने दोबारा किसी सतह को छुआ, तो आप फिर बैक्टीरिया या वायरस के संपर्क में आ सकते हैं।

सैनिटाइजर के इस्तेमाल के बाद क्या आप कुछ खा-पी सकते हैं?

  • सैनिटाइजर लगे हाथ से खाना खाने या पानी पीने से कोई खतरा नहीं रहता क्योंकि, यह लगाने के चंद मिनट बाद ही उड़ जाता है। अल्कोहल की थोड़ी मात्रा में शरीर के अंदर जाने से कोई खतरा नहीं होता। लेकिन, यदि आप दिन में 10 से 20 बार इसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसकी मात्रा बढ़ जाएगी।

सैनिटाइजर वायरस को कैसे मारता है?

  • वायरस प्रोटीन और आरएनए है। यह झाग से मर जाता है। जैसे ही हम साबुन या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं, वह मर जाता है। सैनिटाइजर में 70 एथेनॉल, आइसो प्रोपेनॉल होता है इसलिए यह वायरस के प्रोटीन को मार देता है।
  • कुछ सैनिटाइजर इफेक्टिव होते हैं, लेकिन स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं। एथेनॉल बेस्ड सैनिटाइजर फिर भी बेहतर हैं।

हैंड सैनिटाइजर वायरस से बचाने में कितने कारगर है?

  • सैनिटाइजर का इस्तेमाल तुरंत प्रभावशाली है। सैनिटाइजर 99% बैक्टीरिया को मार देता है, लेकिन कोविड के मामले में यह 100% कारगर है। हालांकि, पोंछा लगाने में हाइपो क्लोराइड से बने डिसइंफेक्ट को इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
  • सैनिटाइजर और साबुन की तुलना करें तो साबुन बैक्टीरिया या वायरस को मारने में ज्यादा बेहतर होता है, क्योंकि साबुन हथेली और उंगलियों के हर पोर में लगाया जा सकता है। फिर पानी से धुलने से हाथ पूरी तरह साफ हो जाता है।

नकली सैनिटाइजर को कैसे पहचानें?

  • अल्कोहलिक स्मेल आनी चाहिए।
  • कलर देखकर आप नहीं समझ सकते हैं।
  • सैनिटाइजर मानक एजेंसियों द्वारा सर्टिफाइड होना चाहिए।
  • इंग्रीडिएंट्स देखकर आप समझ सकते है।

सैनिटाइजर पर भरोसा कैसे करें?

इस वक्त बाजार में तमाम तरह के सैनिटाइजर बिक रहे हैं, इनमें बहुत से नकली या मिलावटी सैनिटाइजर भी हैं। ऐसे में सैनिटाइजर खरीदते वक्त खास सावधानी बरतने की जरूरत है। मिलावटी सैनिटाइजर से वायरस नहीं मरते हैं और संक्रमित होने को खतरा भी बढ़ जाता है।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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