डायबिटिक कीटोएसिडोसिस: Diabetic Ketoacidosis in Hindi

What is Diabetic Ketoacidosis in Hindi

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic Ketoacidosis in Hindi), मधुमेह रोगियों को होने वाली एक गंभीर बिमारी है। शरीर में कीटोन्स नामक ब्लड एसिड की उच्च मात्रा के उत्पादन की स्थिति में यह समस्या होती है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता।

इंसुलिन, शुगर (ग्लूकोज) को कोशिकाओं में प्रवेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्लूकोज, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है। पर्याप्त इंसुलिन के अभाव में हमारा शरीर ईंधन के रूप में फैट का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया के कारण रक्त में कीटोन्स नामक ब्लड एसिड बढ़ने लगते है। समय पर इसकी पहचान और इलाज ना हो पाने के कारण डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की स्थिति उत्पन्न होने लगती है।

यदि आपको डायबिटीज है या डायबिटीज का खतरा है, तो डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के संकेतों के बारे में पता करके पूर्ण सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का इलाज ना हो पाए तो यह कोमा या मृत्यु का कारण बन सकता है। टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में यह समस्या बहुत आम है। टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के मामले बहुत कम देखने को मिल रहें है।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षण: Symptoms of Diabetic Ketoacidosis in Hindi:

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के लक्षण बहुत तेजी से विकसित होते है। कई लोगों में यह समस्या मात्र 24 घंटों के भीतर ही विकसित हो सकती है। 

इन लक्षणों के आधार पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की स्थिति को पहचाना जा सकता है।

  • ज्यादा प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना
  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाना
  • पेशाब में कीटोन का उच्च स्तर होना
  • लगातार थकान महसूस होना
  • रूखी त्वचा होना
  • उल्टी होना
  • साँस में दुर्गंध आना
  • ध्यान देने में कठिनाई होना

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का कारण: Causes of Diabetic Ketoacidosis in Hindi

शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण ना कर पाने के ​कारण डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या होती है। इस स्थिति में कोशिकाएँ ऊर्जा के लिए रक्त में मौजूद ग्लूकोज की जगह ईंधन के लिए फैट का उपयोग करने लगती है। इस प्रक्रिया में कीटोन्स नामक एसिड का निर्माण होने लगता है। शरीर में कीटोन्स की मात्रा बढ़ जाने के कारण रक्त का रासायनिक संतुलन और पूरे शरीर का सिस्टम बदल जाता है। टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों को कीटोएसिडोसिस का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनके शरीर में बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बना पाता है। शरीर में कीटोन्स बढ़ने के निम्न कारण भी हो सकते है।

  • एक समय भोजन ना करना
  • बीमार या तनावग्रस्त होना
  • इंसुलिन रिएक्शन होना
  • पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का इंजेक्शन नहीं लगना

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों को भी हो सकती है, लेकिन यह दुर्लभ स्थिति है। यदि आप ज्यादा उम्र के है और आपको टाइप 2 मधुमेह भी है तो आपको एचएचएनएस (हाइपरसोमोलर हाइपरग्लाइसेमिक नॉनकेटोटिक सिंड्रोम) का भी खतरा हो सकता है। यह स्थिति गंभीर रूप से निर्जलीकरण की समस्या का कारण बन सकती है।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के रिस्क फैक्टर: Risk Factors of Diabetic Ketoacidosis in Hindi

कई ऐसी स्थितियाँ है जो लोगों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के जोखिम बढ़ा सकते है। जैसे

  • टाइप-1 डायबिटीज
  • इंसुलिन की पर्याप्त खुराक ना लेना
  • पेट की बीमारी होना
  • संक्रमण होना
  • दिल की बीमारी, जैसे दिल का दौरा पड़ना
  • स्ट्रोक आना
  • फेफड़ों में रक्त का थक्का बनना
  • गंभीर बीमारी या कोई ट्रॉमा हो जाना
  • गर्भावस्था के दौरान
  • सर्जरी
  • स्टेरॉयड या एंटीसाइकोटिक्स जैसी दवाओं का सेवन करना
  • अवैध दवाओं और ड्रग्स का सेवन करना

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का परीक्षण: Diabetic Ketoacidosis Diagnosis in Hindi:

यदि डॉक्टर को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का संदेह होता है, तो शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ खून की जाँच करवाने की सलाह देते है। कुछ मामलों में, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस को ट्रिगर करने वाली स्थितियों के बारे में जानने के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

खून की जाँच:

कीटोएसिडोसिस के परीक्षण के लिए किए जाने वाले खून की जाँच के दौरान निम्न स्तरों पर ध्यान दिया जाता है।

ब्लड शुगर लेवल: यदि शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं है, जिससे ग्लूकोज, कोशिकाओं में प्रवेश कर सके तो ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है जैसे-जैसे शरीर ऊर्जा के लिए फैट और प्रोटीन का ब्रेकडाउन करता है उसी आधार पर ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ता है।

कीटोन का स्तर: जब शरीर ऊर्जा के लिए फैट और प्रोटीन का ब्रेकडाउन करने लगता है, तो रक्तप्रवाह में कीटोन्स नामक एसिड बढ़ना शुरू हो जाता है।

ब्लड एसिड: यदि खून में कीटोन्स की मात्रा बढ़ जाए तो रक्त अम्लीय (एसिडोसिस) हो जाता है। इससे पूरे शरीर का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है।

अतिरिक्त परीक्षण:

डॉक्टर अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने के लिए कुछ अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते है, जो डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की समस्या को उत्पन्न कर सकते है। ऐसे में डॉक्टर निम्न प्रकार के परीक्षणों की सलाह दे सकते है।

  • ब्लड इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट
  • यूरिनलाइसिस
  • चेस्ट एक्स-रे
  • हृदय की विद्युत गतिविधि जानने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का इलाज:

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के इलाज का सबसे पहला लक्ष्य रोगी के ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है। शुरुआत में ब्लड शुगर कम करने की दवाईयाँ दी जाती है। हालांकि, यदि शुगर लेवल बहुत अधिक है तो रोगी को इंसुलिन के इंजेक्शन देने की आवश्यकता होती है। इसलिए डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का इलाज रोगी के शुगर लेवल के आधार पर तय किया जाता है।

इलेक्ट्रोलाइट रिप्लेसमेंट: इलेक्ट्रोलाइट आपके खून में मौजूद मिनरल्स होते है जो सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रिक चार्ज को पूरे शरीर में पहुँचाते है। इंसुलिन की कमी के कारण खून में कई तरह के इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है। आपको नस के जरिए इलेक्ट्रोलाइट दिए जा सकते है, ताकि आपके दिल, मांसपेशियाँ और तंत्रिका कोशिकाएँ सामान्य रूप से काम कर सकें।  

इंसुलिन थेरेपी: डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का कारण बनने वाली समस्याओं को इंसुलिन के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स के अलावा रोगी को इंसुलिन थेरेपी दी जाती है। जब ब्लड शुगर का स्तर लगभग 200 मिलीग्राम/ डीएल तक आ जाए और रक्त की अम्लीयता खत्म हो जाए तो इंसुलिन थेरेपी को रोक दिया जाता है। इसके बाद सामान्य रूप से चमड़ी के नीचे इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते है।

स्वयं से देखभाल:

  • ब्लड शुगर के स्तर की सावधानीपूर्वक निगरानी करें।
  • एंटी डायबिटिक दवाएँ लेने के बाद यदि आपको हाइपोग्लाइसीमिया का अनुभव होता है तो ऐसी स्थिति में अपने साथ मिश्री या चॉकलेट रखें। यह इमरजेंसी की स्थिति में मददगार होता है।
  • डॉक्टरी सलाह के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें।
  • स्वस्थ महसूस ना होने पर 4-6 घंटे में कीटोन की जाँच करें।
  • यदि यूरिन टेस्ट में कीटोन्स की उपस्थिति का पता चलता है तो व्यायाम करने से बचें।
  • यदि आप असहज महसूस करते है तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

जीवनशैली में परिवर्तन:

  • आहार में चीनी युक्त खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करें।
  • कम फैट और अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • खून से कीटोन्स खत्म होने और ब्लड शुगर नियंत्रित होने के बाद नियमित रूप से व्यायाम करें।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐपडाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.