DIABETES | डायबिटीज़ से घबराएं नहीं, लड़ें! जाने लक्षण व उपाय

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डायबिटीज (Diabetes) या मधुमेह एक आम लेकिन गंभीर बीमारियों में से एक है। आजकल के दौर में बदलते खान-पान, जीवनशैली व अनुवांशिक कारणों से यह बीमारी बहुत ज़्यादा लोगों में देखी जा रही है। शरीर की पेंक्रियाज ग्रंथी के ठीक से काम ना करने या फिर पूरी तरह से बेकार होने से डायबिटीज होती है।

कैसे होती है डायबिटीज (Diabetes)?

डायबिटीज (Diabetes) या मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हार्मोन इंसुलिन (Insulin) की समस्या होती है। पेंक्रियाज ग्रंथी से निकलने वाला इन्सुलिन हॉर्मोन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। इंसुलिन (Insulin) द्वारा हमारे रक्त में, कोशिकाओं को शुगर मिलती है। इंसुलिन का कार्य शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाना है। इसी इंसुलिन द्वारा कोशिकाओं या सेल्स को एनर्जी मिलती है। ऐसा नहीं होने पर शरीर को कई नुकसान पहुँचने लगते हैं।

डायबिटीज (Diabetes) एक ख़तरनाक बीमारी है जो जीवनपर्यंत बनी रहती है। इसके लिए आपको अपनी ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखने के साथ उचित दवाई व इंजेक्शन लेने होते है।

टाइप 2 डायबिटीज़ (Diabetes) के साथ, अग्न्याशय आमतौर पर कुछ इंसुलिन बनाता है, लेकिन या तो बनाई गई मात्रा शरीर की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है, या शरीर की कोशिकाएं इसका प्रतिरोध करती हैं। इंसुलिन प्रतिरोध, या इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता की कमी मुख्य रूप से वसा, यकृत और मांसपेशियों की कोशिकाओं में होती है।

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मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) तीन प्रमुख प्रकार का होता है:

टाइप 1 (Type 1 Diabetes), टाइप 2 (Type 2 Diabetes) और गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes)

1.टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes): टाइप 1 डायबिटीज़ तब होता है जब शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में विफल रहता है। टाइप 1 डायबिटीज़ वाले लोग इंसुलिन पर निर्भर होते हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें रोजाना कृत्रिम इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।

2. टाइप 2 डायबिटीज़ (Type 2 Diabetes): टाइप 2 डायबिटीज़, शरीर को इंसुलिन के उपयोग के तरीके को प्रभावित करता है। शरीर द्वारा इन्सुलिन बनाने के बावजूद भी, प्रकार 1 के विपरीत, शरीर में कोशिकाएं इसके प्रति उतनी प्रभावी रूप से प्रतिक्रिया नहीं देती हैं जितनी कि वो पहले देती थी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज़ के अनुसार यह डायबिटीज़ का सबसे आम प्रकार है, और इसके होने के मुख्य कारकों में से मोटापा प्रमुख है।

3. गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes): यह प्रकार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होता है जब शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है। गर्भकालीन मधुमेह सभी महिलाओं में नहीं होता है और आमतौर पर जन्म देने के बाद ये समस्या हल हो जाती है।

इनके अलावा मोनोजेनिक डायबिटीज़ और सिस्टिक फाइब्रोसिस से संबंधित डायबिटीज़ भी कुछ लोगों में पाया जाता है हालांकि यह बहुत कम पाया जाता है।

सामान्य लक्षण

दोनों प्रकार के डायबिटीज़ (Diabetes) में कुछ वार्निंग लक्षण समान होते है:

1.भूख और थकान – आपका शरीर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को ग्लूकोज में परिवर्तित करता है जिसका उपयोग आपकी कोशिकाएं ऊर्जा के लिए करती हैं। लेकिन ग्लूकोज को अवशोषित करने के लिए आपकी कोशिकाओं को इंसुलिन की आवश्यकता होती है।

यदि आपका शरीर पर्याप्त या बिलकुल इंसुलिन नहीं बनाता है, या यदि आपकी कोशिकाएं आपके शरीर द्वारा निर्मित इंसुलिन का विरोध करती हैं, तो ग्लूकोज उनमें नहीं जा सकता है और उससे ऊर्जा की कमी से आपको सामान्य से अधिक भूख लगने के साथ जल्दी थकान महसूस हो सकती है।

2. बार-बार पेशाब आना और प्यास लगना – औसत व्यक्ति को आमतौर पर 24 घंटे में चार से सात बार पेशाब जाना पड़ता है, लेकिन मधुमेह वाले लोगों में यह आवृति अधिक होती है।

ऐसा क्यूं होता है? आम तौर पर आपका शरीर ग्लूकोज को पुन: अवशोषित कर लेता है क्योंकि यह आपके गुर्दे से गुजरता है। लेकिन जब डायबिटीज़ या मधुमेह आपके रक्त शर्करा को बढ़ाता है, तो आपके गुर्दे इसे वापस लाने में सक्षम नहीं हो पाते। इसके कारण व्यक्ति अधिक पेशाब जाता है जो शरीर से अधिक तरल पदार्थ का उपयोग करता है।

3. शुष्क मुंह और त्वचा में खुजली –  चूंकि आपका शरीर पेशाब बनाने के लिए तरल पदार्थों का उपयोग ज़्यादा करता है, इसलिए शरीर में नमी की कमी हो जाती है। निर्जलित होने के वजह से आपका मुंह सूख सकता है जिसकी वजह से सूखी त्वचा व खुजली की समस्या हो सकती है।

4. धुंधली दृष्टि –  आपके शरीर में तरल पदार्थ का स्तर बदलने से आपकी आँखों में सूजन आ जाती हैं। परिवर्तित लेंस अकार के वजह से फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है जिससे सब धुंधला दिखाई देने लगता है।

प्रकार 2 के अन्य लक्षण:

लंबे समय तक आपके शरीर में ग्लूकोज के स्तर के उच्च होने के बाद ये दिखाई देते हैं।

A) यीस्ट संक्रमण – मधुमेह से प्रभावित पुरुषों और महिलाओं दोनों में ये मिल सकता है। यीस्ट ग्लूकोज से पोषण लेता है, इसलिए यह सभी और पनपता है। संक्रमण त्वचा के किसी भी गर्म, नम तह में बढ़ सकता है, जिसमें शामिल हैं:

  • उंगलियों और पैर की उंगलियों के बीच
  • स्तनों के नीचे
  • जननांगों या उसके आसपास

B) धीमी गति से घावों का भरना – समय के साथ, उच्च रक्त शर्करा या ब्लड शुगर आपके रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है और तंत्रिका या नर्व में क्षति का कारण बन सकता है जो आपके शरीर के घावों को भरने देने में मुश्किल बढ़ाता है।

C) पैरों में दर्द या सुन्नता – यह नर्व डैमेज या तंत्रिका क्षति का एक परिणाम है।

प्रकार 1 के अन्य लक्षण:

A) अनियोजित वजन घटना –  यदि आपके शरीर को आपके भोजन से ऊर्जा नहीं मिल रही है, तो यह मांसपेशियों और वसा से ऊर्जा लेना शुरू कर देगा। इससे आपका वज़न घटने लगेगा चाहे आपने अपनी खाने की आदतों में कोई बदलाव ना किया हो।

B) मतली और उल्टी – जब आपका शरीर वसा जलने का विरोध करता है, तो यह “कीटोन्स” बनाता है। ये आपके रक्त में खतरनाक स्तर तक, संभवतः एक जानलेवा बीमारी जिसे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कहा जाता है, तक हो सकती हैं। केटोन्स आपके पेट में कई समस्याओं को जन्म देते हैं।

कब लें डॉक्टर से परामर्श?

यदि आप 45 वर्ष से अधिक उम्र के हैं या आपको मधुमेह होने का खतरा अधिक है तो आपको जांच कराना महत्वपूर्ण है। स्थिति की गंभीरता को जल्दी समझने से आप तंत्रिका क्षति, हृदय से सम्बंधित परेशानी और अन्य जटिलताओं से बच सकते हैं।

तुरंत डॉक्टर को दिखाएं यदि:

  • पेट में दिक्कत, कमज़ोरी और अधिक प्यास लगे  ज़्यादा पेशाब आए
  • तीव्र पेट दर्द हो
  • सामान्य से अधिक गहरी और तेज़ी से सांस आए
  • सांस लेते समय नेल पॉलिश रिमूवर जैसी खुशबू आए (यह हाई केटोन्स होने का संकेत है।)

अगर आपको डायबिटीज़ के साथ ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो इसकी जांच करवाना चाहिए। साथ ही एक महीने में एक बार या दो महीने में एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

इंसुलिन लेते समय ध्यान रखें: इंसुलिन लेते समय इंजेक्शन लगाने से पहले शीशी को दोनों हाथो से 2 मिनट तक घुमाएँ ताकि लगाते वक़्त दर्द ना हो।

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व्यायाम और आहार:

यदि किसी व्यक्ति में टाइप 2 डायबिटीज़ या मधुमेह पाया जाता है तो डॉक्टर उन्हें अक्सर वज़न घटाने और जीवन शैली में बदलाव करने का सुझाव करते हैं।

मेडकॉर्ड्स (MedCords) डॉक्टर डायबिटिक या प्रीडायबिटिक व्यक्ति को एक पोषण विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह देते है। एक आहार विशेषज्ञ मधुमेह वाले व्यक्ति को सक्रिय, संतुलित जीवन शैली जीने के लिए उसके खान-पान व रोज़मर्रा की गतिविधियों के लिए अनेक तरीके सुझाव करता है।

डायबिटीज़ (Diabetes) या मधुमेह के साथ एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए व्यक्ति के लिए ज़रूरी है की वो अपने दैनिक जीवन में निम्नलिखित आहार व परहेज़ शामिल करे:

1. साबुत अनाज, फल, सब्जियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, और नट्स जैसे स्वस्थ वसा स्रोतों सहित, पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना।

2. उच्च शर्करा वाले खाद्य पदार्थों से बचना जो सिर्फ कैलोरी प्रदान करते हैं, या कैलोरी जिसमें अन्य पोषण संबंधी लाभ नहीं होते हैं, जैसे कि मीठा सोडा, तले हुए खाद्य पदार्थ और ज़्यादा शक्कर वाले मीठे खाद्य पदार्थ अथवा मिठाइयां, पिज़्ज़ा, बर्गर, मैदे वाली चीज़ें आदि का सेवन ना करें।

3. अधिक मात्रा में धूम्रपान , शराब ना पिएं।

4. सप्ताह में 5 दिन कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करना, जैसे चलना, एरोबिक्स, साइकिल चलाना या तैराकी करना।

5. अपनी दिनचर्या में योग को ज़रूर शामिल करें।

6. व्यायाम करते समय कम ब्लड शुगर के संकेतों को पहचाने, जैसे चक्कर आना, भ्रम, कमजोरी और पसीना।

लोग अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कम करने के लिए भी कुछ आसान कदम उठा सकते हैं, जो टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लोगों को बिना दवा लिए डायबिटीज़ की स्थिति को संभालने में मदद कर सकते है।

इन तरीकों को अपनाकर एक डायबिटिक व्यक्ति एक सामान्य जीवनयापन कर सकता है व अपनी बीमारी से अच्छे से लड़ सकता है।

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