DEPRESSION | डिप्रेशन या मानसिक अवसाद से कैसे बचें?

Depression

WHO की  रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में दुनियाभर में डिप्रेशन (Depression) या मानसिक अवसाद के मामलों में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 13 से 15 साल की उम्र का हर 4 में से 1 बच्चा डिप्रेशन (Depression) का शिकार है। वयस्कों में भी ये आंकड़ा डराने वाला है।

पिछले ब्लॉग में हमने पढ़ा की कैसे हम लक्षणों पर गौर करके डिप्रेशन (Depression) की आहट को पहचान सकते हैं। डिप्रेशन (Depression) की स्थिति को पहचानना एक पहला कदम है इसके जल्दी इलाज की ओर। इसकी शुरूआती दौर में पहचान करने के बाद ये अतिआवश्यक है की कैसे इससे बचा जाए।  

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आइये जानते है कैसे बच सकते है आप इस अवस्था से:

1. बातचीत है ज़रूरी: अक्सर देखा गया है की डिप्रेशन (Depression) का शिकार व्यक्ति एकाकीपन में जीने लगता है। वो अपने आप को समाज से काट लेता है व अपनी परेशानी किसी को नहीं बताता। इस स्थिति से उबरने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है की मरीज़ अपने सबसे भरोसेमंद लोगों से बातचीत करे। सभी बातें जो मरीज़ को अन्दर से कमज़ोर कर रही है उनका बाहर आना ज़रूरी है जिससे पता लग सके की मरीज़ के अवसाद की वजह क्या है।

2. लाइफस्टाइल में बदलाव: डिप्रेशन (Depression) में सबसे पहले व्यक्ति अपने सभी सामाजिक जुड़ाव काट लेता है। सभी रोज़मर्रा की गतिविधियों में उसकी रुचि कम हो जाती है। इस स्थिति से लड़ने के लिए सबसे पहले उसे अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाना ज़रूरी हो जाता है। अपनी दिनचर्या नियमित करें जैसे समय से सोना, समय से उठना, कार्यों में रुचि आदि।

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3. अच्छा व सेहतमंद खाएं: डिप्रेशन (Depression) में मानसिक थकावट होने के साथ भूख का कम हो जाना सामान्य है। ऐसे में आप शारीरिक रूप से कमज़ोर होने लगते हैं व थकावट, सांस भरना या हाथ पैर कंपकंपाने जैसे लक्षण दिखने लगते है।  इसके लिए ये ज़रूरी है की आप अच्छा व सेहतमंद खाएं। अपने भोजन में फल-सब्जी, जूस,दही , दूध जैसा पोष्टिक आहार शामिल करें।

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4. व्यायाम व योग करें: व्यायाम व योग, डिप्रेशन (Depression) से लड़ने में बहुत जल्दी मदद करते हैं। अपनी दिनचर्या में इन्हें ज़रूर शामिल करें। ध्यान करने से आप मानसिक रूप से सशक्त बनते हैं व आपकी एकाग्रता बढ़ती है। इसलिए अवसाद में ध्यान करना एक संजीवनी के समान हैं।

5. सकारात्मक सोचें: मानसिक अवसाद में नकारात्मक सोच प्रभावित व्यक्ति पर हावी हो जाती है। ऐसे में मरीज़ हर परिस्थिति में नकारात्मक पहलु की ओर ज़्यादा ध्यान देता है।  सकारात्मक सोच से व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों से आसानी से लड़ सकता है, अतः डिप्रेशन (Depression) में आप पोज़िटिव रहने व सोचने की कोशिश करें।

6. अच्छी नींद लें: कोशिश करें की आप एक अच्छी नींद लें और इसमें आपकी दिनचर्या का बहुत अहम् रोल है। सही भोजन व अच्छा व्यायाम आपको एक बेहतर नींद लेने में मदद करेंगें। सोने जाते समय अपने दिमाग को सभी नकारात्मक भाव व चिंताओं से दूर रखें। जिससे आप एक अच्छी नींद ले पाएं।  

7. घूमनें जायें: कहते है प्रकृति अपने आप में एक बहुत अच्छी दवा है। इसलिए जब भी आप तनाव या अवसाद में हो तब कहीं बाहर घूमने जाएँ व नेचर के पास बेठें। आप छुट्टी ले कर किसी भी पहाड़ी या हरियाली से भरी जगह घूमने निकल जाएँ। डिप्रेशन (Depression) में ये तरीका आपकी बहुत मदद करेगा।  

8. किसी रुचि को अपनाएं: हम में से हर किसी को कोई ना कोई काम ख़ुशी देता है जैसे म्यूज़िक सुनना, लिखना, गार्डनिंग, घूमना, पेंटिंग आदि। डिप्रेशन से लड़ने के लिए आप अपनी किसी रुचि में समय व्यतीत करें। जिससे आपका ध्यान तनाव से हट सके।

9. डॉक्टर से परामर्श लें: डिप्रेशन (Depression) कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है, यह बस हमारे तनावग्रस्त जीवन का एक फल है। अतः इससे बचने के लिए आप डॉक्टरी परामर्श ज़रूर लें।  मेडकार्ड डॉक्टर के अनुसार ज़्यादातर मामलों में काउन्सलिंग के ज़रिये ही स्थिति पर काबू किया जा सकता है। किन्तु यदि काउन्सलिंग से आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर आपको एंटी-डिप्रेसेंट लेने की सलाह देते है जो आपको डिप्रेशन (Depression) से लड़ने में मदद करती हैं।  

तैयार करें अपना सपोर्ट सिस्टम: prepare support system

डिप्रेशन (Depression) में सबसे ज़्यादा अगर कोई सहायता कर सकता है तो वो है आपका सपोर्ट सिस्टम यानी आपका परिवार व दोस्त। आपके तनाव व बदलते मूड को सबसे ज़्यादा समझने वाले लोग यही होते हैं। इसलिए हमेशा अपने इस ग्रुप से बात करें और इनके साथ अपनी समस्याएं साझा करें। आपका ये सपोर्ट सिस्टम आपको मानसिक संबल प्रदान करेगा व आपको मज़बूत बनाएगा। हमेशा प्रेरित व उत्साहित करने वाला ये सपोर्ट सिस्टम आपको किसी भी तनाव या अवसाद से बचने व बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  

बातें साझा करने से ना सिर्फ आप उनके समाधान तक पहुँच पाएंगे बल्कि मानसिक रूप से सशक्त भी बनेंगें।  

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आयु है आपका सहायक

अगर आपके घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमार है या उसकी बीमारी घरेलू उपायों से कुछ समय के लिए ठीक हो जाती है, लेकिन पीछा नहीं छोड़ती है तो आपको तत्काल उसे डॉक्टर से दिखाना चाहिए. क्योंकि कई बार छोटी बीमारी भी विकराल रूप धारण कर लेती है। अभी घर बैठे स्पेशलिस्ट डॉक्टर से “Aayu” ऐप पर परामर्श लें । Aayu ऐप डाउनलोड करने के लिए नीचे दी गई बटन पर क्लिक करें.

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