Covid-19: रिसर्चर्स का दावा, CT Scan है ज्यादा कारगर

अब तक भारत में कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए कोई टेस्ट किट उपलब्ध नहीं है। इसके लिए किसी अस्पताल में कई टेस्ट करने के बाद नतीजे निकाले जा सकते है।  कोरोना वायरस की पहचान के लिए किसी अस्पताल में लगातार कई टेस्ट कराने की जरूरत हो सकती है। 

कोरोना वायरस से पीड़ित 1000 से अधिक रोगियों पर हुए अध्ययन को रेडियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने इसमें बताया कि जिस भी व्यक्ति में संक्रमण के थोड़े भी लक्षण दिखाई दें तो प्राथमिक टूल के रुप में सीटी स्कैन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।  विश्वभर के वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि कोरोना वायरस की उत्पति एक जंगली जानवर से हुई ही थी। इस वायरस से चीन में काफी लोगों की मौत भी हो चुकी है।

रिसर्चर्स का दावा: 

COVID-19 के लिए विशिष्ट चिकित्सीय दवाओं या टीकों की अनुपस्थिति में एक संक्रमित मरीज को बिना देरी के स्वस्थ आबादी से अलग करना आवश्यक है। अध्ययन में सामने आया कि इस महामारी से निदान के लिए  प्राथमिक उपचार के रुप में चेस्ट सीटी स्कैन परीक्षण ज्यादा कारगर और प्रभावी है। सीटी स्कैन परीक्षण के ज्यादा सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 

आरटी-पीसीआर की तुलना में सीटी स्कैन है कारगर

हाल ही में चीनी सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार, Covid-19 के इलाज के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (RT-PCR) सांस या रक्त नमूनों की जांच जीन अनुक्रमण द्वारा की जानी चाहिए। क्योंकि किसी भी मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करने के लिए  यह पहला संकेत है। हालांकि, सैंपल टेस्ट संग्रह और परिवहन, आरटी-पीसीआर की गला स्वाब नमूनों की कुल सकारात्मक दर प्रारंभिक प्रस्तुति में लगभग 30 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक बताई गई है। 

बड़ी आबादी के संक्रमण का खतरा

दुनिया में स्वास्थ्य आपातकाल के दौर में RT-PCR की कम संवेदनशीलता का तात्पर्य है कि बड़ी संख्या में COVID-19 रोगियों की शीघ्र पहचान नहीं हो पाएगी और उन्हें उचित उपचार प्राप्त नहीं हो सकता है। इसके अलावा, वायरस की अत्यधिक संक्रामक प्रकृति को देखते हुए, वे एक बड़ी आबादी को संक्रमित कर सकते  हैं।

कोरोना नॉवल-19 पर किए गए रिसर्च में लेखकों ने लिखा की RT-PCR की तुलना में चेस्ट की सीटी स्कैन अधिक विश्ववसनीय और अधिक कारगर है। जहां तक की कोरोना जैसी महामारी का सवाल है विशेष रुप से जिन क्षेत्रों में उपचार के पर्याप्त साधन नहीं हैं और रोगी में महामारी के संकेत दिखने शुरु हो जाएं तो सबसे पहले प्राथमिक जांच के रुप में RT-PCR की जगह CT-Scan की जानी चाहिए। इससे रोगी के जल्दी स्वस्थ होने की उम्मीद होती है। 

वहीं निमोनिया के उपचार के लिए नियमित रुप से चेस्ट सीटी स्कैन और बॉड़ी स्क्रीनिंग अपेक्षाकृत ज्यादा आसान और जल्दी होने वाला उपकरण है। हाल ही में हुए शोध अध्ययन में पाया गया कि 

निमोनिया निदान के लिए एक नियमित इमेजिंग उपकरण चेस्ट सीटी तेजी से और अपेक्षाकृत आसान है। हाल के शोध में पाया गया कि 71% की RT-PCR संवेदनशीलता की तुलना में COVID-19 संक्रमण के लिए CT की संवेदनशीलता 98% थी।

वर्तमान अध्ययन के लिए, चीन के वुहान में तोंगजी अस्पताल के शोधकर्ताओं ने COVID-19 में RT-PCR परख की तुलना में नैदानिक ​​मूल्य और चेस्ट सीटी इमेजिंग की स्थिरता की जांच की।

1014 मरीजों पर हुआ अध्ययन

  • 6 जनवरी से 6 फरवरी के बीच किए अध्ययन में करीब 1014 मरीज शामिल थे जिन्हें चेस्ट सीटी और आरटी-पीसीआर दोनों परीक्षणों से गुजरना पड़ा। इन मरीजों पर आरटी-पीसीआर के साथ चेस्ट सीटी स्कैन के परीक्षणों का आकलन करके इनके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव जाने गए। दोनों मशीनों से कोरोना नॉवेल-19 के रोगियों पर किए गए परीक्षण के सभी प्रभावों का विश्लेषण किया गया।
  • आरटी-पीसीआर से परीक्षण में  601 रोगियों का परिणाम सकारात्मक आया वहीं सीटी स्कैन के परिक्षण में 888 (88%) रोगियों के परिणाम सकारात्मक थे। इस तरह RT-PCR परिणामों के आधार पर COVID-19 के सुझाव में चेस्ट CT की संवेदनशीलता 97% थी। यह परिणाम 4 से 8 दिन के बीच आए। इसलिए अध्ययन कर्ताओं ने इस कोरोना जैसी महामारी के निदान के लिए आरटी पीसीआर की तुलना में चेस्ट सीटी स्कैन को ज्यादा प्रभावी और कारगर बताया। 

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि मैं अपने या परिवार के लोगों में कोरोना के संक्रमण की पहचान किस तरह कर सकता हूँ? कोरोना वायरस की पहचान के लिए लैब टेस्टिंग जरूरी है।

आइये जानते हैं कि इन टेस्ट में क्या-क्या शामिल हैं:

  • स्वाब टेस्ट: इस टेस्ट में लैब एक कॉटन स्वाब से गले या नाक के अंदर से सैंपल लेकर टेस्ट करता है. 
  • नेजल एस्पिरेट: वायरस की जांच करने वाला लैब आपके नाक में एक सॉल्यूशन डालने के बाद सैंपल कलेक्ट कर उसकी जांच करता है।
  • ट्रेशल एस्पिरेट: ब्रोंकोस्कोप नाम का एक पतला ट्यूब आपके फेफड़े में डालकर वहां से सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है।
  • सप्टम टेस्ट: यह फेफड़े में जमा मैटेरियल या नाक से स्वाब के जरिये निकाले जाने वाले सैंपल का टेस्ट होता है.
  • ब्लड टेस्ट इस तरह के सभी सैंपल को जुटाने के बाद कोरोना वायरस के हिसाब से इसका विश्लेषण किया जाता है। कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट के लिए इनका ब्लेंकेट टेस्ट किया जाता है। अगर आपको इन्फेक्शन हो या आपने हाल में उन इलाके की यात्रा की है जो कोरोना से प्रभावित हैं तो आपको अपना टेस्ट कराना चाहिए. अगर आपके जान-पहचान के किसी व्यक्ति ने इस तरह की यात्रा की है और आप उनके संपर्क में रहे हों तब भी आपको कोरोना का टेस्ट कराने की जरूरत है।

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