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Latest health updates: कोविड-19 से बचने के लिए अधिक काढ़ा पीने से बढ़ी अल्सर और ब्लीडिंग की समस्या

Latest health updates: कोविड-19 से बचने के लिए अधिक काढ़ा पीने से बढ़ी अल्सर और ब्लीडिंग की समस्या

कोविड-19 (COVID-19) के संक्रमण से बचने के लिए काढ़ा का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कोरोना के ख़ौफ़ में काढ़ा लगभग हर घर में बन रहा है और लोग दिन में कई बार काढ़ा़ पी रहे हैं।

इसके फायदे कई हैं लेकिन इसमें डाले जाने वाली कुछ सामग्री ज्यादा मात्रा में लेने के कारण लोग अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। वो भी अल्सर के कारण अंदरूनी ब्लीडिंग की गंभीर शिकायतों के साथ। 

1. काढ़ा के अधिक सेवन से अल्सर और ब्लीडिंग की समस्या

कोविड-19 (COVID-19) के संक्रमण से  बचने के लिए काढ़े का ज्यादा सेवन अब खतरनाक बन रहा है। इसके चलते लोगों में इंटर्नल ब्लीडिंग यानी शरीर के आंतरिक अंगों में खून का रिसाव, आंत-पेट में मल्टीपल अल्सर और मुंह के छालों के साथ बड़ी संख्या में मरीज़ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

मालूम हो, काढ़े में पड़ने वाले हल्‍दी से हार्ट ब्‍लॉकेज का खतरा कम होता है क्योंकि ये खून को पतला करता है लेकिन काढ़ा या दूध में इसके ज़्यादा इस्तेमाल के कारण हार्ट के मरीज़ों की सर्जरी में ब्लीडिंग की वजह से खूब दिक़्क़त हो रही है।

2. इम्यूनिटी कोविड-19 से दोबारा संक्रमण से बचाव की गारंटी नहीं-रिसर्च

garanty
Coronavirus lancet research COVID-19 reinfection casts new doubts on covid immunity

कोविड-19 (COVID-19) से रिकवर होने के बाद संक्रमण से बचने के लिए सिर्फ इम्यूनिटी ही काफी नही है। क्योंकि कोरोना मरीज़ों को रिकवरी के बाद भी संक्रमण और ज्यादा गंभीर लक्षण सामने आ रहे हैं। 

अमेरिका में नेवाडा के एक 25 साल के मरीज में कोविड निगेटिव पाए जाने के 48 घंटों के अंदर SARS-CoV-2 के फिर कुछ लक्षण दिखाई दिए थे। इस शख्स में दूसरी बार हुए संक्रमण के लक्षण पहली बार से ज्यादा गंभीर थे, जिसके चलते उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 

इस शख्स में दूसरी बार हुए संक्रमण के लक्षण पहली बार से ज्यादा गंभीर थे, जिसके चलते उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 

इस रिसर्च पेपर में दुनिया भर में चार कन्फर्म री-इंफेक्शन मामलों को भी शामिल किया गया है। इसमें बेल्जियम, नेदरलैंड्स, हॉन्ग-कॉन्ग और एक्वडोर से एक-एक मरीज शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि री-इंफेक्शन की स्थिति दुनिया भर में महामारी के खिलाफ चल रही लड़ाई पर बड़ा असर डाल सकती है।

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