Corona brief news: कोरोना से लड़ने का नया तरीका,Covaxin के ह्यूमन ट्रायल के लिए भारत बायोटेक की पार्टनरशिप

India Biotech Partnership for Human Trial of Covaxin

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अमेरिका ने एक नया तरीका निकाला है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन ने कोरोनावायरस का डुप्लिकेट मॉडल VSV-SARS-CoV-2 बनाया है। दूसरी ओर Covaxin के ह्यूमन ट्रायल के लिए भारत बायोटेक से दिल्ली की यह प्राइवेट लैब पार्टनरशिप करेगी। 

1.कोरोना से लड़ने का नया तरीका, प्रोटीन से बनाया वायरस का डुप्लीकेट

अमेरिका ने प्रोटीन से बनाया कोरोनावायरस का डुप्लीकेट
  • अमेरिकी शोधकर्ताओं ने नए वायरस VSV के ऊपरी प्रोटीन को हटाकर इस पर कोरोनावायरस का स्पाइक प्रोटीन लगाया। इस तरह वायरस को कोरोना का डुप्लीकेट मॉडल (VSV-SARS-CoV-2) तैयार किया गया। नए वायरस में सिर्फ कोरोना का प्रोटीन इस्तेमाल किया गया, बीमारी को घातक बनाने वाला जीन नहीं डाला गया। 
  • शोधकर्ताओं ने कोरोना सर्वाइवर के शरीर से सीरम लेकर एंटी-बॉडीज अलग कीं। बाद में इसका प्रयोग लैब में बने वायरस पर किया। प्रयोग में सामने आया कि मरीज की एंटी-बॉडीज ने इस नए वायरस को पहचाना और ब्लॉक किया। 
  • परिणाम के तौर पर सामने आया कि मरीज की एंटी-बॉडीज ने इस नए वायरस को पहचाना और ब्लॉक किया।
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस एंटी-बॉडीज ने हायब्रिड वायरस को रोका है वही आगे कोरोनावायरस को भी संक्रमित करने से रोकेगी। अगर कोई एंटीबॉडी लैब वाले वायरस को नहीं रोक सकती तो कोरोना को भी नहीं रोक पाएंगी। 

2. Covaxin के ह्यूमन ट्रायल-

Covaxin के ह्यूमन ट्रायल

Covaxin के ह्यूमन ट्रायल के लिए भारत बायोटेक से दिल्ली की यह प्राइवेट लैब पार्टनरशिप करेगी। कोवैक्सीन के इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल के लिए उसे सेंट्रल लैब के तौर पर चुना गया है।  मालूम हो,  हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने Indian Council of Medical Research (ICMR) और पुणे के National Institute of Virology (NIV) के साथ मिलकर यह वैक्सीन बनाया है।

डॉ. डैंग्स लैब की ओर से कहा गया कि उसने ट्रायल कराने के लिए भारत बायोटेक के साथ पार्टनरशिप किया है। ‘ट्रायल के कई चरणों के स्क्रीनिंग और सेफ्टी के लिए सभी सैंपलों को प्रोसेस किया जा रहा है, जिसके बाद इनके नतीजों का अध्ययन NIV में किया जाएगा।’

3. क्या कोरोना से ठीक हो चुका व्यक्ति दोबारा संक्रमित हो सकता है?

कोरोना वायरस संक्रमण से दो महीने पहले ठीक हो चुका इंसान क्या दोबारा संक्रमित हो सकता है? इसका सटीक जवाब भले किसी के पास न हो लेकिन दिल्ली में ऐसा ही मामला सामने आने से इस पर एक नई बहस चल पड़ी है। क्योंकि दिल्ली के एक इंस्पेक्टर कोरोना संक्रमण से ठीक होने के 2 महीने बाद फिर से संक्रमित हो गए हैं। इस बात से डॉक्टर भी हैरान हैं। 

कोरोना वायरस संक्रमण

हालांकि CSIR यानी वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद इस बात को न तो मान रही है और न खारिज कर रही है। उसका कहना है कि इसके लिए एक गहन अनुसंधान की जरूरत है। CSIR के  महानिदेशक शेखर मांडे ने कहा कि अभी तक ऐसी रिपोर्ट नहीं आई है कि दोबारा कोरोना किसी को हो सकता हो। किसी भी जर्नल में नहीं आया है। आज के दिन हम ये नहीं मानेंगे कि दोबारा कोरोना हुआ है। अगर वायरस पॉजिटिव किसी को हो तो उसमें एंटीबॉडी बनने के चांसेज बहुत होते हैं।

4. दुनिया के इन 12 देशों में नहीं पहुंचा है कोरोना वायरस

कोरोना वायरस

कोरोना वायरस चीन से निकलने के बाद पूरी दुनिया में फैल चुका और आज ये बड़ी महामारी बन गई है। दुनिया के 188 देश अब तक इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। कई देशों ने कोरोना वायरस को खत्म करने का दावा किया। लेकिन कुछ ही हफ्तों के बाद कोरोना वायरस ने एक बार फिर से वापसी कर ली।

आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि क्या दुनिया का कोई ऐसा देश है जहां कोरोना वायरस नहीं पहुंचा है। इन देशों में किरीबाती, मार्शल आइलैंड, माइक्रोनेशिया, नॉरू, उत्तर कोरिया, पलाउ, समोवा, सोलोमन आइलौंड, टोंगा, तुर्कमेनिस्तान, तुवालू, वानूआतू आदि देशों में कोरोना वायरस नहीं पहुँचा है। 

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