सफेद धब्बों में कोरोनावायरस से संक्रमित फेफड़ों की पहली 3D इमेज आई सामने

चीन के वुहान शहर से तबाही का कदम रखने वाली कोरोना वायरस की बीमारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है। यह वायरस कैसे फैलता है इसकी खोज में  दुनिया भर के मेडिकल प्रोफेशनल्स और वैज्ञानिक जुटे हैं। कोरोना वायरस कैसे शरीर को प्रभावित करता है। इसे समझने के लिए वैज्ञनिकों ने चीन में  कोरोनावारयस COVID-19 संक्रमण से मारे गए 1000 से ज्यादा लोगों के पोस्टमॉर्टम से उनके फेफड़ों की स्थिति की 3D इमेज बनाई है।

कोरोना वायरस से संक्रमित का कैसे दम घुटता है

वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों के फेफड़ों का एक्स-रे और सी.टी स्कैन से सामने आया है कि पीड़ितों के फेफड़ें चिकने और गाढ़ी बलगम (म्यूकस) से भर जाता है। इसके कारण पीड़ित व्यक्ति की सांस घुटने लगती है क्योंकि उसके फेफड़ों में हवा जाने के लिए कोई जगह ही नहीं बचती।

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फेफड़ों में नज़र आए सफेद धब्बे

कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के सीटी स्कैन पर वैज्ञानिकों को उनके फेफड़ों में सफेद धब्बे नज़र आए। पीड़ितों के फेफड़ों के सीटी स्कैन से ऐसे पैचेज़ नजर आए जो निमोनिया के होते हैं। लेकिन, कोरोना के मामले में ये ज्यादा ही गाढ़े होते हैं और फेफड़ों में हवा की जगह कुछ और ही भरा हुआ नजर आया।

कोरोना संक्रमण की 3D इमेज से फायदा

इस 3D इमेज के बनने के बाद डॉक्टर एक्स-रे और सीटी स्कैन से ऐसे मरीजों की बहुत जल्दी पहचान कर पाएंगे जो गंभीर रूप से संक्रमित हैं और जिन्हें तुरंत सबसे आइसोलेट करने की जरूरत है।

इस वायरस के लक्षण भी कोरोना जैसे ही

साल 2002 में दुनियाभर में फैले ऐसे ही संक्रामक रोग ‘सार्स’ में कोरोना की तरह एक्स-रे और सीटी स्कैन से ऐसे ही निष्कर्ष सामने आए थे। इस रोग में भी फेफड़ों में सफेद और गाढ़े धब्बे थे और जिस जगह पर हवा होनी थी वहां पर बलगम भरी थी। 

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