Corona vaccine update: सिर्फ आपको बचाएगी कोरोना वैक्सीन, अपनों की सुरक्षा की गारंटी नहीं

Corona vaccine / कोरोना वैक्सीन

Corona Vaccine : कोरोना वैक्सीन का टीकाकरण (Coronavirus vaccination) दुनिया के कई देशों में शुरु हो गया है। जनवरी से भारत में भी टीकाकरण (Vaccination) शुरु होने की उम्मीद है। लेकिन वैक्सीन को लेकर लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल हैं-कौन सा टीका सुरक्षित होगा, इसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं होगा, टीका लगने के बाद हम सुरक्षित तो हो जाएंगे। 

1. कोरोना वैक्सीन सिर्फ आपको बचाएगी, अपनों की सुरक्षा की गारंटी नहीं 

जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय की महामारी विशेषज्ञ प्रो. लीना वेन ने का कहना है कि कोरोना का टीका आपको तो संक्रमण से बचाता है मगर लापरवाही बरतने पर आप दूसरों तक संक्रमण फैलाने के वाहक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात समझनी होगी कि कोरोना का टीका आपको तो बचाएगा, लेकिन आपके अपनों की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है। क्योंकि अगर लोग टीका लगवाने के बाद बचाव के तरीकों का पालन नहीं करेंगे तो वे अपनों के लिए खतरा बन सकते हैं।

2. मास्क वैक्सीन के बाद भी है जरूरी 

कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को कम करने के लिए वैक्सीन लगवाना ही एकमात्र उपाय नहीं है, इसके बाद भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। इसलिए मास्क लगाना बहुत ही अनिवार्य है। वैक्सीन लगवाने वाला व्यक्ति एसिम्प्टोमैटिक कोरोना संक्रमण का वाहक हो सकता है।

उस व्यक्ति के नासिका मार्ग में वायरस हो सकता है, जो उसके बोलने, सांस लेने, छींकने पर दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है, इसलिए जरूरी है कि टीका लगवाने के बाद भी सभी मास्क पहनें और शारीरिक दूरी का पालन करें। 

3. हर्ड इम्युनिटी बनने तक रहें सतर्क

जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय की महामारी विशेषज्ञ प्रो. लीना वेन ने कहा कि अमेरिका में संक्रमण के खिलाफ झुंड की प्रतिरक्षा या हर्ड इम्युनिटी (herd immunity) पैदा होने के लिए जरूरी है कि 70 फीसदी अमेरिकियों को टीका दिया जाए।

अभी यहां सीमित मात्रा में ही टीका उपलब्ध है, ऐसे में अगले साल गर्मी तक ही इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है, इसलिए जरूरी है कि जो लोग टीका पा रहे हैं, वे बचाव के तरीकों का पालन दूसरों की तरह करें। 

4. सुरक्षा की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं देती वैक्सीन

फ़ाइज़र के टीका निर्माण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच पड़ताल करने वाले गैर लाभकारी संगठन एलर्जी एंड अस्थमा नेटवर्क की डॉ. पूर्वी पारिख का कहना है कि इन टीकों के निर्माण में संक्रमण के फैलाव से ज्यादा इसके बचाव पर जोर दिया गया है।

वैज्ञानिकों के पास टीका बनाने का बहुत ही कम समय था, ऐसे में उन्होंने संक्रमण से बचाव, संचरण व फैलाव यानी तीनों पक्षों पर गहरायी से काम नहीं किया. इसलिए संभावना है कि टीका लगवाने के बाद भी लोग संक्रमण के वाहक बन जाएं। 

लीना ने कहा कि हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि टीका प्रभावी तो है पर यह शत प्रतिशत प्रभावी नहीं साबित हुआ है। यानी इस बात की संभावना है कि टीका लगवाने वाला भी संक्रमण फैला सके या संक्रमित हो जाए।

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