Corona Vaccine : देश की पहली mRNA टेक्नीक वाली कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को मंजूरी

Corona Vaccine / देश की पहली mRNA टेक्नीक वाली कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को मंजूरी

Coronavirus Vaccine : कोरोनावायरस (Coronavirus vaccine) की पहली mRNA टेक्नोलॉजी (MRNA Technology) से बनी स्वदेशी वैक्सीन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दे दी है। HGCO19 नाम की यह वैक्सीन पुणे की कंपनी जेनोवा ने विकसित की है। (First MRNA Technology, corona vaccine)

1. mRNA टेक्नोलॉजी से बनी स्वदेशी वैक्सीन (Human Trial Of The Country’s First MRNA Technology, corona vaccine)

  • वैक्सीन का जानवरों पर सफल ट्रायल किया जा चुका है। इसके डोज लगाने के बाद जानवरों में एंटीबॉडी तैयार होने का दावा किया गया है।
  • HGCO19 को दो से आठ डिग्री सेल्सियस टेम्प्रेचर पर दो महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बता दें, जेनोवा ने अमेरिका की कंपनी HDT बायोटेक कॉरपोरेशन के साथ मिलकर यह वैक्सीन बनाई है।

2. फ़ाइज़र और बायोएनटेक भी mRNA टेक्नोलॉजी से बनी

  • एक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने भी वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल मांगा है। ये दोनों ही वैक्सीन मैसेंजर-RNA यानी mRNA पर बेस्ड टेक्नोलॉजी (Human Trial Of The Country’s First MRNA Technology, corona vaccine approved) पर डेवलप की गई हैं और दोनों ही 95% तक इफेक्टिव भी हैं।
  • इस तरह की वैक्सीन mRNA का इस्तेमाल करती हैं, जो शरीर को बताती हैं कि वायरस से लड़ने के लिए किस तरह का प्रोटीन बनाना है।

3. क्या है mRNA टेक्नोलॉजी ? What is mRNA technology?

जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है, तो mRNA टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है।

इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे कन्वेंशनल वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा जल्दी वैक्सीन बन सकती है। इसके साथ ही इससे शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है।

ये पहली बार है जब mRNA टेक्नोलॉजी पर बेस्ड वैक्सीन दुनिया में बन रही है। mRNA या मैसेंजर-RNA जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है।

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