Latest Health Update: कोरोना वायरस से बचने के लिए ऐसे लोगों से बनाएं दूरी

कोरोनावायरस Corona virus

कोरोनावायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर ने भारत में दस्तक दे दी है। फिर से लॉकडाउन (Lockdown) जैसी स्थिति पनपती जा रही है। देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) के 92 लाख से ज्यादा मामले हो गए हैं। एक अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना वायरस संक्रमितों का दसवां हिस्सा सुपर स्प्रेडर (Corona Super Spreader) यानी संक्रमण (Infection) को ज्यादा फैलाने वाले हैं। 

1. किन लोगों से अधिक फैलता है कोरोना वायरस?

  • अध्ययन में साबित होने के बाद, कोरोना फैलाने वाले लोगों को सुपर स्प्रेडर (Corona Super Spreader) का नाम दिया गया है। कई बार इनमें संक्रमण के बावजूद लक्षण नहीं दिखते हैं। इस बात से अंजान ये सुपर स्प्रेडर (Super Spreader) लोगों के बीच जाते हैं और कई लोगों को संक्रमित कर देते हैं।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका की सेंट्रल फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सुपर स्प्रेडर को पहचानने के लिए रिसर्च की है।
  • जिसमें पाया गया कि संक्रमित लोगों में अलग-अलग तरह से छींकने का तरीका, दांतों की संख्या और मुंह में लार की मात्रा तय करती है कि इनके ड्रॉप्लेट्स हवा में कितनी दूर तक जाएंगे और इनसे लोगों में संक्रमण का कितना खतरा है।

2. जिनके दांत पूरे, उनसे ज्यादा ड्रॉप्लेट्स निकलते हैं>>>>

रिसर्चर्स का कहना है, दांत छींक की तेजी को और बढ़ाते हैं। जिन लोगों के दांतों की संख्या पूरी है उनमें से ज्यादा ड्रॉप्लेट्स निकलते हैं। दो दांतों के बीच बनी झीरियों से निकलने वाले ड्रॉप्लेट्स शक्तिशाली होते हैं। जिन इंसानों की नाक साफ नहीं है और मुंह में पूरे दांत हैं वे 60 फीसदी तक ज्यादा खतरनाक ड्रॉप्लेट्स जनरेट करते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मुंह की लार भी छींक के ड्रॉप्लेट्स को फैलाने में मदद करती है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने लार को तीन कैटेगरी में बांटकर समझाया। बेहद पतली, मध्यम और गाढ़ी लार।

-लार पतली होने पर ड्रॉप्लेट्स छोटे होते हैं। ये हवा में लम्बे समय तक रहते हैं । अगर संक्रमित इंसान के मुंह से ड्रॉप्लेट्स निकलकर स्वस्थ इंसान तक पहुंचते हैं तो संक्रमण हो सकता है। मीडियम और गाढ़ी लार वाले ड्रॉप्लेट्स ज्यादा समय तक हवा में नहीं रहते। ये जल्द ही जमीन पर गिर जाते हैं और संक्रमण का खतरा कम रहता है।

-रिसर्चर करीम अहमद कहते हैं, संक्रमित इंसान की लार भी तय करती है कि महामारी में सुपरस्पेडर घटेंगे या बढ़ेंगे।

2. कोरोना वायरस कहाँ-कितने समय तक रहता है जिंदा

आईआईटी बॉम्बे ने दावा किया है कि कोरोना वायरस पतली लिक्विड लेयर से चिपककर सतह पर जीवित रहता है। रिसर्च के मुताबिक, यह घातक वायरस ठोस सतहों पर कई घंटे और कई दिन तक जिंदा रहता है।  ‘फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स’ जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट में बताया गया है कि ठोस सतहों पर कई दिन कई घंटे तक कैसे वायरस जीवित रहता है।

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