Corona Brief News: कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी की हुई पहचान, अब इस अंग के लिए काल बन रहा कोरोना !

Corona Antibodies कोरोना

कोरोना वायरस  (Coronavirus) के खात्में के लिए दुनिया के कई देशों में कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) पर परीक्षण चल रहा है। तो वहीं कई देश कोरोना वैक्सीन (vaccine) बनाने के अंतिम चरण में पहुँच गए हैं। कोरोना वैक्सीन के बीच वैज्ञानिकों को अब विशेष सफलता मिली है।

वैज्ञानिकों ने कोरोना के खात्में के लिए एंटीबॉडी (Corona Antibodies) की पहचान कर ली है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये एंटीबॉडी रोगाणुओं को कोशिकाओं में प्रवेश करने और प्रजनन करने से रोक सकता है।

1. नई एंटीबॉडी से मिलेगी वायरस से लड़ने में मदद

जर्नल सेल पत्रिका में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक कोरोना वायरस पर रिसर्च कर रहे जर्मन सेंटर फॉर न्यूरोडीजेनेरेटिव एंड चैरिटी यूनिवर्सिटामेडिजिन बर्लिन के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। 

  • इन वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमित मरीज़ों के खून से 600 अलग-अलग प्रकार की एंटीबॉडी ली और इसकी जांच की। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इन एंटीबॉडी के जरिए एक कृत्रिम एंटीबॉडी विकसित कर ली। न्यूट्रलाइजिंग नाम की इस कृत्रिम एंटीबॉडी का कोरोना वायरस पर असर देखा गया है।
  • वैज्ञानिकों ने कहा ​कि कृत्रिम एंटीबॉडी न्यूट्रलाइजिंग के जरिए हमने काफी हद तक कोरोना का खात्मा करने में सफलता हासिल कर ली है लेकिन अभी भी इस पर काफी शोध किया जाना बाकी है। वैज्ञानिकों ने कहा कि हमने शोध में पाया है कि यह एंटीबॉडी रोगाणुओं को कोशिकाओं में प्रवेश करने और प्रजनन करने से रोक सकता है।

2. आयुष मंत्रालय के ‘योग ब्रेक’ प्रोटोकॉल की गतिविधियाँ फिर से शुरु

कोरोना महामारी के कारण बंद की गई योग गतिविधियों को आयुष मंत्रालय ने फिर से शुरु कर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रोटोकॉल का मकसद कार्यस्थल पर लोगों का ध्यान योग की तरफ आकर्षित करना है। ताकि वे पांच मिनट के योग ब्रेक के बाद ताजा होकर फिर से अपना काम कर सकें। 

Ayush Ministry Resumes Yoga Break Protocol- मंत्रालय ने कहा कि कंप्यूटर पर लगातार घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए यह काफी लाभदायक है। इससे उनका तनाव कम होता है। तनाव का असर काम पर भी नजर आता है जिसे कम करने में योग बहुत लाभदायक है।

बतादें, आयुष मंत्रालय ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के साथ मिलकर पिछले साल योग ब्रेक नियम की शुरुआत की थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोविड-19 के 25 सितंबर तक 90 हजार से कम नए मामले सामने आए हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के कुल मामले 25 सितंबर को 58 लाख के पार चले गए हैं। 

3. सिर्फ सर्दी-खांसी नहीं बल्कि इस अंग को काल बना रहा है कोरोना 

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना महामारी के आम लक्षण सर्दी, जुकाम और बुखार हैं लेकिन जैसे-जैसे कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है वैसे वैसे इसके लक्षण भी बदलते जा रहे हैं। 

ऐसे कईं केस सामने आ चुके हैं जहां लोगों में कोरोना के लक्षण तो दिख रहे हैं लेकिन उनका टेस्ट नेगेटिव आ रहा है। ऐसे में कोरोना साइलेंट होकर शरीर के एक ऐसे अंग पर असर डाल रहा होता है जिनसे हम सभी अनजान होते हैं। 

कोरोना ठीक हुए मरीज़ों के चाहे किसी अंग पर असर न डाले लेकिन यह फेफड़ों के लिए जानलेवा बन रहा है। चाहे आप में कोरोना के लक्षण दिखाई दे या ना लेकिन कोरोना साइलेंट किलर बन कर आपके फेफड़ों को अंदर ही अंदर से खत्म कर देता है। 

हेल्थ एक्सपर्ट्स भी यह सलाह देते हैं कि आपको चाहे शरीर में थकान, कमजोरी, सर्दी झुकाम जैसे लक्षण न दिखाई दे लेकिन अगर आपको सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो आपको अपने फेफड़ों की जांच करवानी चाहिए। 

अगर आप भी कोरोना से ठीक हो चुके हैं या आप का कोरोना टेस्ट भी लगातार नेगेटिव आ रहा है लेकिन फिर भी आप में कोरोना के लभण नजर आ रहे हैं तो आपको अपने शरीर के इस अंग की जांच जरूर करवानी चाहिए। 

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