Corona Brief News: कोरोना पर मोदी का 72 घंटे का फ़ॉर्मूला अपना लें तो बदल सकते हैं हालात !

Pm modi 72 hour formula on covid 19

Corona Brief News: कोरोना वायरस पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 72 घंटें का फॉर्मूला दिया है, जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है। श्री मोदी ने कहा- शुरुआती 72 घंटे में ही संक्रमण की पहचान कर लेते हैं, तो संक्रमण धीमा हो सकता है, यह बात लोगों तक पहुँचानी होगी। 

मालूम हो, प्रधानमंत्री मोदीजी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से बात की और कोरोना पर 72 घंटे का फॉर्मूला बताया। 

मोदीजी का कोरोना पर 72 घंटे का फॉर्मूला?

मोदी ने कहा कि एक्सपर्ट कह रहे हैं कि शुरुआती 72 घंटे में ही संक्रमण की पहचान कर लेते हैं, तो संक्रमण धीमा हो सकता है। 72 घंटे में संक्रमित व्यक्ति के आस-पास वालों की भी टेस्टिंग हो जानी चाहिए। हाथ धोने, मास्क की बात हो, कहीं पर नहीं थूकने की बात हो। इसे लेकर जनता के बीच एक नया मंत्र पहुंचाना पड़ेगा।

2. भारत में कैसे पहुँचेगी हर मरीज़ तक वैक्सीन, जानें

How to coronavirus vaccine will reach with every patients in India

कोविड-19 टीके की खरीद एवं प्राथमिकता वाले समूहों को इसे लगाने के नैतिक पहलुओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति बुधवार  यानि 12 अगस्त को बैठक करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को ही अपने ट्वीटर हैंडल पर ये जानकारी दी है। 

बतादें, इस बैठक में देश में लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने की प्रक्रिया समेत इससे जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। यह समिति राज्य सरकारों और वैक्सीन निर्माताओं सहित इससे जुड़े अन्य हितधारकों के साथ अहम बिंदुओं पर चर्चा करेगी।

गौरतलब है कि आईसीएमआर प्रमुख डॉ. बलराम भार्गव के अनुसार भारत बायोटेक और जाइडस कैडिलाका वैक्सीन के फेज 1 का ट्रायल पूरा कर चुके हैं और फेज 2 का ट्रायल जल्द शुरू करने वाले हैं। वहीं  ऑक्सफ़ोर्ड के वैक्सीन को  सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रहा। इसे फेज 2 और फेज 3 के ट्रायल का अनुमति मिल गई है, जो 17 जगहों पर हफ्ते भर में शुरू होगा।

3. आ गई दुनिया की पहली रजिस्टर्ड कोरोना वैक्सीन

Russia Coronavirus COVID 19 Vaccine Launch Update

कोरोना वायरस पर दुनिया की पहली वैक्सीन के सफलतापूर्वक रजिस्टर्ड होने को लेकर 11 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने घोषणा की। 

राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने घोषणा करते हुए बताया कि, कोराना वायरस का पहला टीका (Coronavirus Vaccine) विकसित कर लिया गया है, जिससे COVID-19 के खिलाफ स्‍थाई रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्‍यूनिटी) विकसित की जा सकती है।

रूस के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने दी मंजूरी

कोरोना वायरस के संक्रमण से ये लेख लिखे जाने तक दुनिया भर में 7.45 लाख लोगों की मौंत हो गई। और वायरस का प्रकोप लगातार 8 महीने तक कायम रहने के बाद 12 अगस्त को रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन के पूर्णत: तैयार होने का दावा किया है। रूस की सरकार और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने इस वैक्सीन पर मुहर लगा दी है। 

ग़ौरतलब है कि, वैक्‍सीन का निर्माण मॉस्‍को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट (Gamaleya Research Institute of Epidemiology and Microbiology) ने एडेनोवायरस का आधार बनाकर तैयार किया है। 

रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनकी पिछले 20 साल की मेहनत है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि टीके में जो पार्टिकल्‍स का इस्‍तेमाल किया गया वह खुद को कॉपी या रेप्‍लीकेट नहीं कर सकते हैं।

4. कोविड-19 वैक्सीन को लेकर संदेह के घेरे में रूसी दावे

कोरोना वैक्सीन को लेकर रूस ने दावा किया है कि हमने वैक्सीन खोज ली है और इसका परीक्षण सफल रहा, और यह दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन बताई जा रही है। लेकिन इन सब तर्कों के बाद भी- आखिर क्यों कोविड-19 वैक्सीन को लेकर रूसी दावे संदेह के घेरे में हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की आपत्ति-

Covid 19 vaccine claims of Russia are being questioned

रूसी वैक्सीन पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपत्ति जताई है। WHO का कहना है कि रूस ने उसके साथ वैक्सीन संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की है। विशेषज्ञों के इस संदेह की ठोस वजह यह है कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन के ट्रायल में सालों का समय लग जाता है जिसे रूस की दवा ने केवल दो ही महीनों में पूरा कर लिया है। 

रूसी वैक्सीन पर इन देशों ने भी उठाए सवाल

मालूम हो, इस वैक्सीन को लेकर दुनिया के कई देशों में असहजता है जिसमें अमेरिका और कई यूरोपीय देश शामिल हैं। कहा जा रहा है कि रूस ने परीक्षण की प्रक्रिया के पूरे न होने से पहले ही अपना कर जल्दबाजी में वैक्सीन की घोषणा की है जिससे इसकी प्रभावोत्पादकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने रूस के खिलाफ बहुत तीखे तेवर तो नहीं अपनाए हैं, लेकिन वहां के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ एंथोनी फॉसी ने रूस और चीन दोनों के ऊपर सही प्रक्रिया का पालन करने पर संदेह जताया है। 

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