देश में बढ़ता कांगो बुखार का कहर, जानें इसके लक्षण

congo fever

कोरोना महामारी संकट के बीच वायरल फ्लू, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियाँ लोगों को हो रही है, आजकल कांगो बुखार भी बहुत आम हो गया है। कांगो बुखार यानि क्राइमियन कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF) से बचाव को लेकर कुछ एहतियात बरतें, क्योंकि इसका कोई विशेष इलाज नहीं है।

सबसे पहले हम जानते है कोरोना महामारी के बारे में। यह भारत में मार्च से देखने को मिला है। भारत में कोरोना वायरस के मामले बहुत सामने आ रहे है। जिसकी वजह से सामजिक दुरी एक इलाज माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोरोना वायरस आम फ्लू के मुकाबले ज़्यादा खतरनाक है।

इसमें से एक लक्षण सूखी खांसी है जिससे पता चलता है कि आपको सामान्य फ्लू है या कोरोना वायरस।

क्या है सुखी-खांसी और गीली खांसी में फर्क:

खांसी तब होती है जब बलगम, पोलन, धूल या एलर्जी करने वाले तत्वों के खिलाफ शरीर अपनी प्राकर्तिक रक्षात्मक कार्यवाई करता है। ज़्यादातर मरीजों में सूखी खांसी के लक्षण दिखते है इसलिए किसी को खांसी होती है तो उससे दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।

सूखी-खांसी:

सूखी-खांसी में खांसते समय बलगम नहीं आता। जिससे आपके गले में गुदगुदी होती है जबकि गीली खांसी के दौरान आपके फेफड़ों, नाक और गले में जमा बलगम खांसने पर बाहर आता है। सूखी-खांसी आपके श्वसन तंत्र (Respiratory System) अक्सर बैक्टीरिया या वायरस की वजह से यह होता है।

गीली-खांसी:

गीली-खांसी में बलगम (Mucus) बाहर आता है या आपको गले में महसूस होता है। कई बार इसके साथ नाक बहना, थकान होना जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते है। कई बार इसके साथ खून भी आ सकता है। सूखी और गीली खांसी में दर्द और शोर की तीव्रता का फर्क भी देखा गया है। सूखी और गीली खांसी में अलग-अलग तरह की ध्वनि पैदा हो सकती है। सुखी-खांसी में जुकाम या फ्लू ठीक होने में कई हफ्ते लग जाते है। इससे ठीक होना भी मुश्किल होता है।

लेकिन यह कहना गलत होगा कि सूखी-खांसी का मतलब कोरोना वायरस ही है। यह एलर्जी, साइनसाइटिस, अस्थमा, धूल या धुंए की वजह से भी हो सकती है।

कांगो बुखार क्या है?

  • यह वायरल बीमारी खास तरह के कीट के जरिए एक जानवर से दूसरे जानवर में फैलती है।
  • संक्रमित जानवरों के खून के संपर्क में आने या ऐसे जानवरों का मांस खाने पर इंसानों में यह बीमारी फैलती है।
  • सही समय पर बीमारी का पता लगाकर इलाज नहीं किया जाने पर मौत का आंकड़ा बढ़ता जाता है।

कांगो बीमारी कितनी खतरनाक है?

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि समय पर बीमारी का पता नहीं चले, तो खतरा बढ़ सकता है। 
  • समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं होने पर 30 फीसदी मरीजों की मौत हो सकती है। 
  • इस बीमारी से पीड़ित पशुओं या मनुष्यों के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 

कांगो बुखार के लक्षण:

  • कांगो वायरस की चपेट में आने पर सबसे पहले आपको बुखार और सिर व मांसपेशियों में दर्द शुरू होने लगता है। 
  • चक्कर आना, आंखों मे जलन, रोशनी से डर लगने जैसी दिक्कतें भी होती हैं।
  • गला पूरी तरह बैठ जाता है। पीठ में दर्द और उल्टी की समस्या होने लगती है। 
  • मुंह व नाक से अच्चानक खून आने लगता है।
  • इसके बाद शरीर के विभिन्न अंग के फेल होने की संभावना रहती है। 

कांगो बुखार का इलाज:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लक्षण दिखने पर मरीजों को एंटीवायरल ड्रग दी जाती है। इसका इलाज ओरल और इंट्रावेनस दोनों तरह से किया जाता है। इसमें 30 फीसदी मरीजों की मौत बीमारी के दूसरे हफ्ते में होती है। मरीज अगर रिकवर हो रहा है तो इसका असर 9वें-10वें दिन दिख जाता है।

इसकी अब तक कोई वैक्सीन नहीं तैयार की जा सकी है। इसलिए बचाव करना ही इसका एकमात्र इलाज है।

अस्वीकरण: सलाह सहित इस लेख में सामान्य जानकारी दी गई है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है।अधिक जानकारी के लिए आज ही अपने फोन में आयु ऐप डाउनलोड कर घर बैठे विशेषज्ञ  डॉक्टरों से परामर्श करें। स्वास्थ संबंधी जानकारी के लिए आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। आयु ऐप हमेशा आपके बेहतर स्वास्थ के लिए कार्यरत है।

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