कोलेस्टेसिस रोग क्या है, लक्षण और उपचार | Daily Health Tip | Aayu App

itching

अगर आपको बहुत ज्यादा खुजली हो रही है तो आपको कोलेस्टेसिस (एक लिवर संबंधी समस्या) हो सकती है। इससे बचने के लिए आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

” If you are suffering from itching, you may have cholestasis (A type of liver problem). Exercise regularly to prevent this disease.

Health Tips for Aayu App

कोलेस्टेसिस रोग क्या है?

कोलेस्टेसिस (Cholestasis) एक यकृत (liver) रोग है। इसको पित्तस्थिरता भी कहते है। ऐसा तब होता है जब आपके यकृत से पित्त का प्रवाह कम या रुक जाता है। पित्त (Bile) आपके यकृत द्वारा निर्मित ऐसा द्रव (Fluid) होता है जो आपके भोजन को पचाने में सहायता करता है। यह विशेष रूप से फैट को पचाने में मदद करता है। जब पित्त प्रवाह में बदलाव होते हैं, तो यह बिलीरुबिन(bilirubin) का निर्माण करता है। बिलीरुबिन आपके यकृत द्वारा उत्पादित द्रव्य होता है, जो पित्त के माध्यम से आपके शरीर से निकलता है।

कोलेस्टेसिस के दो प्रकार होते हैं: इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस (intrahepatic cholestasis) और एक्सट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस(extrahepatic cholestasis)। इंट्राहेपेटिक कोलेस्टासिस यकृत के भीतर उत्पन्न होता है। यह रोग, संक्रमण, नशीली दवाओं के उपयोग, आनुवंशिक असामान्यताओं, पित्त के प्रवाह पर हार्मोन संबंधी प्रभावों के कारण होता है। महिलाओं में गर्भावस्था की स्थिति यह आपको जोखिम में डाल सकता है।

एक्सट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस पित्त नलिकाओं (Bile Ducts) के अवरोध के कारण होता है। यह अवरोध पित्त की पथरी और ट्यूमर के कारण बनता है।

पित्ताशय (गॉलब्लेडर) शरीर का एक अंदरुनी अंग है, जो लिवर के निचले हिस्से से जुड़ा होता है। यह लीवर द्वारा बनाए गए पित्तरस को जमा करके रखने का काम करता है। रक्त में अपशिष्ट पदार्थों को एक प्रकार के पित्तरस में परिवर्तित किया जाता है जिसे बिलीरुबिन कहा जाता है।

पित्तस्थिरता होने पर लीवर की कोशिकाओं या छोटी आंत के बीच कहीं ना कहीं पित्तरस (एक प्रकार का पाचन द्रव) का बहाव प्रभावित होता है। 

कोलेस्टेसिस के लक्षण:

  • अत्यधिक खुजली होना (Pruritus), कोलेस्टेसिस का सबसे मुख्य लक्षण होता है। ऐसा माना जाता है कि खुजली पित्तरस अम्ल के नसों में जाने से होने वाली प्रतिक्रिया के कारण पैदा होती है। कोलेस्टेसिस से एक विशेष प्रकार की खुजली पैदा होती है। यह खुजली सुबह केे समय हल्की होती है और सुबह का खाना खाने के बाद धीरे-धीरे गंभीर हो जाती है। रात के समय खाना ना खाने से पित्तरस के तत्व जमा नहीं हो पाते, इससे सुबह के समय खुजली कम होती है।
  • विटामिन ( A, D, E और K) को अवशोषित करने के लिए पित्तरस आवश्यक होता है। इन विटामिन की कमी होने पर पैदा होने वाले लक्षण भी कोलेस्टेसिस का संकेत दे सकते हैं।
  • पीलिया भी कोलेस्टेसिस का संकेत दे सकता है। इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस में पीलिया होना एक असामान्य स्थिति होती है लेकिन ऑब्सट्रक्टिव कोलेस्टेसिस में यह होना आम बात है।
  • आंखों, हथेली की सिलवटों व शरीर के अन्य भागों की त्वचा में पीले रंग का पदार्थ जमा होना भी कोलेस्टेसिस का एक लक्षण हो सकता है। ऐसी जगहों पर त्वचा थोड़ी उभर जाती है या फिर सपाट रह सकती है।
  • कोलेस्टेसिस से पीड़ित ज्यादातर लोगों में थकान भी देखी जाती है।
  • भूख ना लगना।
  • पेट में दर्द होना।
  • जी मिचलाना।
  • गहरे या काले रंग का पेशाब आना।
  • पीलिया, जिसमें त्वचा व आँख का सफेद हिस्सा पीले रंग का हो जाता है।
  • ठीक से ना सो पाना।
  • हल्के रंग का मल आना

कोलेस्टेसिस के कारण:

कोलेस्टेसिस विकसित होने के कई कारण हो सकते हैं।

एक्स्ट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस जो लिवर के बाहरी तरफ विकसित होता है, इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • पित्त नलिकाओं में ट्यूमर होना
  • सिस्ट
  • अग्न्याशय (Pancreas) में ट्यूमर या स्यूडोसिस्ट
  • आस पास मांस बढ़ने या ट्यूमर आदि होने के कारण पित्त नलिका में दबाव बढ़ जाना
  • पित्त संकुचित नलिकाओं का संकुचित हो जाना
  • पित्त नलिका में पथरी होना
  • प्राइमरी स्क्लेरोसिस कोलनंजाइटिस

इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस जो लिवर के अंदर विकसित होता है, इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • केवल नसों के द्वारा ही मरीज को भोजन प्रदान करना
  • लिम्फोमा
  • गर्भावस्था
  • अल्कोहल से होने वाले लिवर रोग
  • एमिलोइडोसिस
  • प्राइमरी स्क्लेरोसींग कोलेंजाइटिस
  • स्कोरडियोसिस
  • टीबी
  • वायरल हेपेटाइटिस
  • लिवर में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण घाव होना
  • प्राइमरी या मेटास्टेटिक लिवर कैंसर
  • खून के माध्यम से शरीर में इन्फेक्शन फैल जाना

कोलेस्टेसिस से बचाव:

कोलेस्टेसिस विकसित होने के जोखिम को कम करने के लिए कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  • हेपेटाइटिस के लिए टीकाकरण करवाएं
  • शराब ना पिएँ
  • नशीले पदार्थों के टीके ना लगाएं
  • स्वस्थ व संतुलित आहार खाएं
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा आयु ऐप (AAYU App) पर डॉक्टर से संपर्क करें.

फ्री हैल्थ टिप्स अपने मोबाइल पर पाने के लिए अभी आयु ऐप डाऊनलोड करें । क्लिक करें  

Leave a Reply

Your email address will not be published.