Causes of Childhood Cancer: क्यों तेजी से पनप रहा है बच्चों में कैंसर?

बच्चों में कैंसर

कैंसर सिर्फ बड़ो में ही नहीं बच्चों में भी बहुत आम हो गया है। आज हम आपको बच्चों में कैंसर कौन-कौन से होते है यह बताएंगे। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन के अनुसार भारत में 1.6 to 4.8% तक कैंसर बच्चों में पाया जाता है। हम बच्चों में 15 साल तक के बच्चों की बात कर रहे है। इसके अलावा भारत में 38 से 124 मिलियन में से एक बच्चे को कैंसर होता है।

बच्चों में होने वाले आम कैंसर में है ब्लड कैंसर, लिम्फोमा कैंसर, रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर, न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर और ऑस्टियोसरकोमा कैंसर है। आइये आपको यह बताते है कि यह कैंसर शरीर के किस भाग को प्रभावित करते है और इनके लक्षण और इलाज बताएंगे जिनसे आप इन्हे जल्दी से जल्दी पहचानकर अपने बच्चों का शुरूआती स्टेज में ही इलाज करवा सकें।

आपको यह बता दें कि बच्चों में कैंसर एक लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारी है यानि यह बीमारी इंसानों में उनके रहन-सहन में अनियमितता आने और गलत खानपान की वजह से बढ़ती है। इससे बचने के लिए अपनी दिनचर्या को बेहतर करें।

सबसे पहले आपको बताते है बच्चों में होने वाले कैंसर में सबसे मुख्य कैंसर जिसका नाम है ब्लड कैंसर या ल्यूकेमिया।

आइये सबसे पहले जानते है ब्लड कैंसर या ल्यूकेमिया कैंसर क्या होता है, इसके लक्षण और इलाज।

बच्चों में कैंसर के प्रकार:

ब्लड कैंसर या ल्यूकेमिया

क्या होता है ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर:

ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर की शुरूआती स्टेज है। यह कैंसर होने पर कैंसर के सेल्स शरीर में खून नहीं बनने देते जिस वजह से इंसान में खून की कमी होने लगती है साथ ही यह आपके बोन मैरो पर भी हमला करते है। अगर इस कैंसर का पता शुरुआत में ही लग जाए तो इसका इलाज करना आसान होता है।

आइये अब आपको बताते है बच्चों में कैंसर का एक प्रकार ब्लड कैंसर के लक्षण।

ब्लड कैंसर के लक्षण:

  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • पेट में सूजन आना
  • भूख कम लगना
  • बिना एक्सरसाइज किए वजन बढ़ना
  • अक्सर बुखार आना
  • सिर दर्द होना
  • स्किन में रैशेज होना
  • जबड़ों में अचानक से सूजन आना

ब्लड कैंसर क्यों होता है?

  1. रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना: ब्लड कैंसर ऐसे लोगों में ज्यादा देखा जाता है जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
  2. किसी तरह का संक्रमण हो जाना: कई बार, ब्लड कैंसर किसी तरह के संक्रमण का परिणाम हो सकता है।यदि कोई इंसान किसी भी तरह केसंक्रमण से पीड़ित है तो उसे इसका इलाज तुरंत करवाना चाहिए ताकि उसे कोई गंभीर बीमारी ना हो।
  3. रेडिएशन थेरेपी का दुष्प्रभाव पड़ना: अक्सर, कैंसर का इलाज करने के लिए रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कई बार यह थेरेपी आपपर काम नहीं कर पाती। इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियां हो सकती है, जिनमें ब्लड कैंसर एक है।
  4. आनुंविशिकी कारण होना: बहुत सारी बीमारियां आनुंविशिकी वजह से होती है। इनमें ब्लड कैंसर भी शामिल है। इसलिए जब कोई व्यक्ति तबियत खराब होने पर डॉक्टर के पास जाते हैं तो उस समय डॉक्टर इस बात की जांच करते हैं कि उस व्यक्ति के परिवार किसी और सदस्यों को तो ब्लड कैंसर नहीं है।
  5. धूम्रपान: ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति नशीले पदार्थों का सेवन या धूम्रपान करते हैं, उसमे कई गंभीर बिमारियां होने की संभावना काफी अधिक रहती है जिसमें ब्लड कैंसर भी शामिल है।

बच्चों में कैंसर का एक प्रकार है लिम्फोमा कैंसर।

लिम्फोमा कैंसर:

क्या होता है लिम्फोमा कैंसर:

अगर गले में सूजन और दर्द लगातार दो हफ्तों तक बना रहता है और दर्द सामान्य से तेज हो रहा है तो यह लिम्फोमा कैंसर हो सकता है। इसमें कैंसर लिम्फ ग्रंथि व अन्य लिम्फ टिश्यू जैसे टॉन्सिल से शुरू होता है। रीढ़ की हड्डी और दूसरे अंग भी लिम्फोमा से प्रभावित होते हैं।

lymphoma cancer

आइये अब आपको बताते है बच्चों में कैंसर के एक प्रकार लिम्फोमा कैंसर के लक्षण।

लिम्फोमा कैंसर के लक्षण:

  • गले की लिम्फ नोड्स में सूजन आना
  • तेजी से वजन कम होना (यह भी पढ़ें: वजन कम करने के उपाय)
  • बुखार आना
  • रात में पसीना आना
  • कमजोरी होना 

लिम्फोमा कैंसर क्यों होता है?

आजकल की गलत जीवनशैली और खानपान लिम्फोमा कैंसर के कारण है।

बच्चों में कैंसर का एक प्रकार है रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर है।

रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर:

क्या है रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर:

यह आंखों होने वाला कैंसर है। आमतौर पर यह दो साल की उम्र के आसपास होता है। इसमें आंख के रेटिना पर सफेद गोल धब्बा हो जाता है।

Retinoblastoma Cancer

आइये अब जानते है बच्चों में कैंसर का एक प्रकार रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर के लक्षण।

रेटिनोब्लास्टोमा के लक्षण:

  • आँखों की रोशनी पड़ने पर रेटिना का सफेद दिखाई देना
  • आँख में दर्द महसूस होना
  • आँखों का बाहर उभर जाना

रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज:

रेटिनोब्लास्टोमा दिमाग और रीढ़ की हड्डी तक फैल जाता हो। यह हड्डियों, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहाँ खून बनता है), लसिका ग्रंथियों तक भी फैल सकता है। इन स्थितियों में कीमोथेरेपी की आवश्यकता हो सकती है, जिसके बाद ऑटोलोगस बोन मैरो ट्रांस्पलांट किया जा सकता है। कुछ रोगियों में रेडिएशन थेरेपी की आवश्यकता भी हो सकती है।

बच्चों में कैंसर में एक प्रकार है न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर। यह चौथा सबसे आम कैंसर जो बच्चों में पाया जाता है वह है न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर आइये जानते है यह क्या है, लक्षण और इलाज

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर:

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर आमतौर पर नर्व सेल्स या तंत्रिका कोशिकाओं में बढ़ता है। कई बार यह बच्चों में यह कैंसर मां के गर्भ में होने के दौरान ही विकसित हो जाता है। यह कैंसर 10 वर्ष से कम उम्र खासकर 5 वर्षों तक के बच्चों में अधिक देखने को मिलता है। यह क्यों होता है।

क्या है न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर:

न्यूरोब्लास्टोमा किडनी के ऊपर स्थित अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal glands) में से एक में होता है। यह तंत्रिका ऊतक (nervous tissue) में होता है जो गर्दन, छाती, पेट या श्रोणि में रीढ़ की हड्डी के साथ चलता है। यह कैंसर हड्डी, लिम्फ नोड्स, अस्थि मज्जा (bone marrow), लिवर और त्वचा में भी हो सकता है।

Neuroblastoma Cancer

आइये अब जानते है बच्चों में कैंसर का एक प्रकार न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर के लक्षण।

न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर के लक्षण:

  • बच्चे के पेट में दर्द रहना
  • कब्ज और पेशाब निकलने में परेशानी होना
  • सांस फूलना
  • खाना निगलने में तकलीफ होना
  • गर्दन में गांठ होना
  • पैरो में कमजोरी महसूस होना
  • थकान महसूस होना
  • हड्डी में दर्द रहना
  • चिड़चिड़ापन महसूस होना

न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज:

न्यूरोब्लास्टोमा का उपचार कैंसर के स्टेज पर निर्भर करता है। न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर (Treatment of Neuroblastoma) को दूर करने के लिए सर्जरी की जाती है। कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी (इसमें विकिरण के जरिए कैंसर कोशिकाओं को मारने की कोशिश की जाती है), स्टेम सेल प्रत्यारोपण आदि के जरिए न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज किया जाता है।

आइये अब आपको कैंसर का इलाज में इस्तेमाल होने वाली तकनीकियां बताते है।

कैंसर का इलाज:

  • कीमोथेरेपी:
    इस इलाज में कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने और नष्ट करने के लिए बच्चों को दवा दी जाती हैं। इसमें बच्चों को खाने वाली गोली, कैप्सूल या नसों के माध्यम से दवा दी जाती है। 
     
  • ऑपरेशन:
    डॉक्टर सर्जरी के द्वारा कैंसर से संक्रमित अंग (ट्यूमर) और उसके आस पास के हिस्से को निकाल देते हैं। इसके बाद कैंसर को पूरी तरह से खत्म करने के लिए डॉक्टर कीमो और रेडिएशन की सलाह देते हैं।  
  • रेडिएशन थेरेपी:
    इसमें डॉक्टर शक्तिशाली एक्स रे और फोटोन से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। इस प्रक्रिया में रेडिएशन से अन्य अंग और टिश्यू के प्रभावित होने की संभावना अधिक होती है, इस कारण से डॉक्टर इस विकल्प को चुनने की सलाह कम देते हैं।

डिस्क्लेमर: बड़ो के साथ-साथ बच्चों में कैंसर भी आम हो गया है। यहाँ आज हमने आपको बच्चों में कैंसर की कुछ सामान्य जानकारियाँ दे दी है। किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें ।

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