हिस्टीरिया (Hysteria)कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

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हिस्टीरिया (Hysteria) एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसमें मरीज को विचित्र प्रकार के दौरे पड़ते हैं. ये दौरे मिर्गी के दौरों से अलग होते हैं. मरीज को यह भ्रम होता है की वह बेहोश है, या उसे दिखाई नहीं दे रहा है, या उसका हाथ अथवा पैर काम नहीं कर रहा है या उसे दौरा पड़ रहा है जिसमे उसके हाथ व पैर लगातार हिल रहे हैं. जो भ्रम उसके मन में होता है वैसा ही वह करने लगता है. इसको कन्वर्जन रिएक्शन भी कहते हैं.

मिर्गी और हिस्टीरिया में अंतर | Difference mirgi and histria

  • हिस्टीरिया और मिर्गी के लक्षण एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं, लेकिन दोनों ही बीमारी एक-दूसरे से अलग होती हैं.
  • हिस्टीरिया मानसिक बीमारी है, जबकि मिर्गी दिमागी बीमारी है. दोनों के इलाज के तरीके अलग-अलग हैं.
  • जब भी मरीज को किसी तरह का दौरा पड़े तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि डॉक्टर बीमारी को ठीक से समझ सकें.

हिस्टीरिया के कारण | Causes of hysteria hindi

सेक्स की फीलिंग को दबाने के कारण

हिस्टीरिया का दौरा पड़ने का मुख्य कारण सेक्स का दमन करना है. जब आप अपनी सेक्स की फीलिंग को जाहिर नहीं कर पाते और स्थितियां सामान्य न होने की वजह से आप अपनी उस फीलिंग को दबा देते हैं तो वह हिस्टीरिया के दौरे की वजह बन जाता है.

गंभीर सदमा लगने के कारण

गंभीर सदमा लगना भी हिस्टीरिया की बीमारी का एक मुख्य कारण है. परिवार में किसी की असमय मृत्यु, संतानहीनता की वजह से या फिर बड़े पैमाने पर धन और जन की क्षति होने की वजह से व्यक्ति हिस्टीरिया का शिकार हो सकता है. हिस्टीरिया का एक मुख्य कारण तनाव भी है.

तनाव के कारण

आप अकसर छोटी-छोटी बातों की वजह से तनावग्रस्त रहते हैं और अपने मन की बातों को किसी दूसरे से बांटने की बजाय अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं तो आगे चलकर यह स्थिति हिस्टीरिया का कारण बन जाती है.

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हिस्टीरिया के लक्षण | Symptoms of hysteria in hindi

  • जब रोगी अचानक हंसने या रोने लगे तो समझ जाएं कि उसे हिस्टीरिया का दौरा पड़ा है.
  • रोगी के शरीर में अचानक गुदगुदी होने लगती है.ऐसे मरीज रोशनी से चिढ़ते है.
  • इस बीमारी के मरीज ज्यादा तेज आवाज बर्दाश्त नहीं कर पाते.
  • ऐसे रोगी को सिर, छाती, पेट, रीढ़ तथा कंधे की मांसपेशियों में तेज दर्द होता है.
  • दौरे आने पर रोगी चीखता-चिल्लाता है और उसको लगातार हिचकियां आने लगती हैं.
  • अगर रोगी के हाथ-पैर में अचानक ऐंठन होने लगे तो समझ जाएं कि उसे हिस्टीरिया का दौरा पड़ा है.

हिस्टीरिया का इलाज | Treatment of hysteria in hindi

इस रोग का संबंध मन में चल रहे तनाव से होता है. ऐसे में मनोचिकित्सा का प्रमुख स्थान है. मनोचिकित्सा के दौरान रोगी के मन में व्याप्त तनाव के साथ जिद्दीपन, गुस्सा, भावनात्मक अस्थिरता व आवेश की पहचान की जाती है और उससे निपटने के सही उपाय सुझाए जाते हैं. मनोचिकित्सा में परिजनों का सहयोग अनिवार्य रूप से लिया जाता है. हिस्टीरिया के दौरे के समय परिजन को क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए, ये भी समझाया जाता है.

हिस्टीरिया के घरेलू उपचार | Home remedies of hysteria in hindi

  • मरीज को जब दौरा पड़े तो उसके अनावश्यक कपड़े निकालकर उसे ऐसी जगह लिटा दें, जहां भरपूर हवा आती हो.
  • मरीज के हाथ-पैर पर मालिश करने से उसे जल्दी आराम मिलता है.
  • इस बीमारी में दौरा पड़ने पर मरीज बेहोश हो जाए तो उसके अंगूठे के नाखून पर अपना नाखून चुभाएं.
  • मरीज के चेहरे पर ठंडे पानी से छींटे मारें. उसे होश आ जाएगा.
  • मरीज को तामसिक भोजन का सेवन करने से परहेज करना चाहिए.
  • बेहोशी आने पर हींग और प्याज काटकर मरीज को सुंघाएं.
  • मरीज को प्रतिदिन जामुन का सेवन करना चाहिए.
  • सुबह शाम एक-एक चम्मच शहद का सेवन करने से मरीज को आराम मिलता है.
  • मरीज को कुछ दिन तक फलाहार करना चाहिए.
  • भूख लगने पर भोजन करने की बजाय फल का सेवन करना फायदेमंद होता है.
  • रोज योगाभ्यास और ध्यान करना फायदेमंद होता है.
  • हिस्टीरिया के रोगी को प्रतिदिन ताड़ासन, भुजंगासन और सिंहासन करना चाहिए.

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