कुष्ठ रोग के कारण, लक्षण और इलाज

कुष्ठ रोग (Leprosy) एक हवा जनित संक्रामक रोग है, जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है. यह रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्रबैक्टीरिया के फैलने से होता है. कुष्ठ रोग पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर उसके श्वसन तंत्र से निकलनेवाली जल की बूंदों में लेप्रे बैक्टीरिया होते हैं. ये बैक्टीरिया हवा के साथ मिलकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाते हैं. कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीजों को समाज में फैली गलत अवधारणाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बीमारी का समय रहते इलाज हो जाए तो मुक्ति मिल सकती है.

क्या है माइकोबैक्टीरियम लेप्रे | MYCOBACTERIUM LEPRAE

माइकोबैक्टीरियम लेप्रे एक जीवाणु है जो कुष्ठ रोग नामक एक प्रगतिशील, पुरानी जीवाणु संक्रमण का कारण बनता है. नाक की अस्तर, ऊपरी श्वसन पथ और चरमपंथियों में नसों से प्रभावित होते हैं. मरीज की आंखों में भी तकलीफ हो सकती है. लेप्री बैक्टीरिया उनकी आंख की पुतलियों की नर्व्स को अपनी चपेट में ले लेता है. इससे उसकी आंख झपक नहीं पाती है.

कुष्ठ रोग के कारण | Causes of Leprosy

1. ट्यूबरक्यूलोइड के कारण

कुष्ठ रोग के प्राइमरी स्टेज को ट्यूबरक्यूलोइड कहा जाता है. इसमें लेप्रे बैक्टीरिया शरीर के हाथ, पैर, मुंह जैसे एक्पोज या खुले अंगों और उनकी पेरीफेरल नर्व्स या गौण तंत्रिकाओं को ज्यादा प्रभावित करता है. इसमें ब्लड या ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से प्रभावित अंग सुन्न होने लगते हैं.

2. सेंसेशन खत्म होने के कारण

शरीर की त्वचा पर पैच पड़ने लगते हैं या त्वचा का रंग से हल्का पड़ने लगता. वह जगह सुन्न होने लगती है. वहां का सेंसेशन खत्म हो जाता है. समुचित इलाज न कराने से पैच दूसरे अंगों पर भी होने लगते हैं. पैच वाली स्किन ड्राइ और हार्ड होने लगती है. किसी भी प्रकार की चोट लगने या दूसरे इन्फेक्शन होने पर उनमें अल्सर हो सकता है.

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कुष्ठ रोग के लक्षण | Symptoms of Leprosy

  • हाथ और पैर सुन्न होने से ठंडे-गर्म का एहसास नहीं होना.
  • चोट का एहसास नहीं होना
  • गर्म चीजों को उठाने या आग में हाथ सेंकने से मरीज के हाथ जल जाना.
  • घाव हो जाना
  • चोट लगने पर या पत्थर चुभने से घाव हो जाना
  • घाव गंभीर होकर पैरों के शेप बदलने लगना , विकृति का आना .
  • इससे व्यक्ति को शारीरिक अपंगता हो सकती है.उसके अंग कुरूप हो सकते हैं.

कुष्ठ रोग में रखें इन बातों का ध्यान

  • मरीज सुबह उठ कर आईना के सामने बैठ कर अपने अंगों को परखें. कहीं पैच या छाला तो नहीं पड़ा.
  • त्वचा में कहीं जख्म तो नहीं पड़ा. पैच की स्किन मोटी तो नहीं हुई है, आंखों में लालिमा या पानी तो नहीं आ रहा है.
  • यदि मरीज का हाथ-पैर सुन्न हो, त्वचा मोटी या खुरदरी हो रही हो, तो नहाने के बाद उन्हें गुनगुने पानी में थोड़ी देर रखें, फिर उसमें तेल से मालिश करें ताकि नमी बरकरार रहे.
  • अगर कहीं छाला हो, तो उसे साफ कपड़े से बांध दें. अगर परेशानी ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
  • काम करते हुए कोई गर्म चीज पकड़नी हो, तो चिमटा, रूमाल या तौलिया से पकड़ें. संभव हो, तो हाथों में ग्लब्स पहन कर काम करें या हाथों पर कपड़ा बांध लें.
  • नुकीली चीजों से दूर रहें, बहुत जरूरी होने पर ही उसके संपर्क में आएं.
  • पैदल ज्यादा दूर तक न चलें, थोड़ी-थोड़ी देर पर काम करें. पर्याप्त आराम करें.
  • आंखों पर चश्मा लगाकर रखें, रात को सोते समय आंख पर साफ कपड़ा ढीला बांध कर सोएं, जिससे वह खुली न रहे.
  • कुष्ठ रोग आसानी से फैलने वाली बीमारी नहीं है. लंबे समय तक कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति के साथ रहने पर भी दूसरे को यह रोग होने की आशंका नहीं होती है.
  • कुछ मामलों में कुष्ठ रोग के मरीज को क्रॉनिक ट्यूबरोक्लोसिस हो जाता है. उसके खांसने से लेप्रोसी का बैक्टीरिया हवा में फैलता है और दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है.
  • मरीज के परिवार को साफ-सफाई या हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है. इलाज करानेवाले मरीज के परिवार का भी चेकअप कराते रहना जरूरी है. ताकि संक्रमण न हो.
  • कुष्ठ रोग आनुवंशिक बीमारी नहीं है. शुरुआती अवस्था में इसे पूरी ठीक किया जा सकता है और मरीज को अपंगता से रोका जा सकता है.

कुष्ठ रोग का इलाज | Treatment of Leprosy

WHO ने मरीज की जांच के लिए तीन कार्डिनल लक्षण बनाये हैं. इनके आधार पर डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं. अगर मरीज को इन तीनों में से कोई लक्षण नहीं होते, तो कुष्ठ रोग को कंफर्म करने के लिए बॉयोप्सी भी की जाती है.

इसमें राइफैम्पिसिन दवाई लेप्रोसी की प्राइमरी स्टेज में दी जाती है, जबकि एडवांस स्टेज में राइफैम्पिसिन के साथ क्लोफाजीन और डैपसोन भी दी जाती है. वहीं मरीज की स्थिति के आधार पर 6 से 12 महीने का कोर्स कराया जाता है. मरीज एमडीटी मेडिसिन का पहला डोज भी ले लेता है, तो उसके शरीर में मौजूद 99 प्रतिशत बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं.

बाकी मेडिसिन का कोर्स एक साल तक चलता है. इनके अलावा रीफापिसिन, ऑक्लोक्सासीन और मीनासाइक्लीन मेडिसिन भी मरीज को दी जाती है. प्राइमरी स्टेज पर ही इलाज शुरू कर दिया जाये और नियमित रूप से मेडिसिन ली जाएं, तो लेप्रे बैक्टीरिया में बीमारी फैलाने की क्षमता खत्म हो जाती है.

कुष्ठ रोग में मरीज की स्थिति जब गंभीर हो जाती है यानी जब कोई विकृति या अल्सर हो जाता है, हाथ टेढ़े हो जाते हैं या पैर लटक जाते हैं और चलने में तकलीफ होती है. तब उनकी सर्जरी की जाती है. ऑपरेशन के बाद डॉक्टर की देखरेख में फिजियोथेरेपी की जाती है. कुछ महीनों बाद वह मरीज उस हाथ-पैर से पुनः काम करने योग्य हो जाता है.

अफवाहों से बचे

लेप्रोसी के मरीजों को छुआछूत, कोढ़ और सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ता है, जो सर्वथा गलत है. संक्रामक बीमारी होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, उठने-बैठने या कुछ समय के लिए साथ रहने से नहीं फैलती. साथ ही आपको हमारा लेख कैसा लगा हमें कमेन्ट द्वारा जरूर बताएं और इसी तरह की जानकारियों को पाने के लिए शेयर, लाइक और फालो करें

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2 Replies to “कुष्ठ रोग के कारण, लक्षण और इलाज

  1. Sar mere dhad ho raha hai mere apane gaanva ke sarkari Aasaptal, privet doctor aadi see maine ilaj karva liya hai fhir bhi thik nahin ho raha hai sar aapse nivedan hai ki ye bhimari jadd se khatam ho jae aesi dava ya oopachar batao. Sar main is bhimari se pareshan ho gaya hoon. Ye bhimari kariban 12maah se mere piche padi hooi hai.

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